फ़लस्तीन में संकट समाप्त करने के लिए ठोस प्रयासों पर बल

23 जुलाई 2019

संयुक्त राष्ट्र में राजनैतिक और शांति निर्माण मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डिकार्लो ने कहा है कि इसराइली-फ़लस्तीनी संघर्ष में ख़तरनाक गतिरोध बना हुआ है जिससे चरमपंथ को बढ़ावा मिल रहा है और क्षेत्र में तनाव भड़क रहा है. मंगलवार को सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए उन्होंने आगाह किया कि फ़िलहाल क़ायम स्थिति से बातचीत के ज़रिए शांति हासिल करने की उम्मीदें क्षीण होती नज़र आ रही हैं.

रोज़मैरी डीकार्लो ने सुरक्षा परिषद को अपने संबोधन में कहा कि ऐसा नहीं है कि दो-राष्ट्र समाधान अब हासिल नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके लिए इसराइल और फ़लस्तीन के बीच मतभेदों को दूर करना होगा जिसके लिए “नेतृत्व, राजनैतिक इच्छाशक्ति और मुश्किलों की मौजूदगी के बावजूद ठोस प्रगति के प्रति संकल्प” की आवश्यकता होगी.

दो राष्ट्र समाधान के तहत एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र का निर्माण होना है जिसके बाद दोनों राष्ट्र – फ़लस्तीन और इसराइल – शांति और सुरक्षा के साथ रहेंगे.

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यथार्थ के धरातल पर दो-राष्ट्र का समाधान अब दूर ही नज़र आता है.

इसराइल में क़ानूनी रास्ता तैयार किया गया है जिसके बाद दो हज़ार ऐसे घरों को नियमित किया जा रहा है जो अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत ग़ैरक़ानूनी हैं.

रोज़मैरी डीकार्लो ने शांति के रास्ते में इसे एक बड़ा अवरोध क़रार दिया है.

मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के सभी पहलुओं पर सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए अवर महासचिव डिकार्लो ने बताया कि इसराइली प्रशासन द्वारा फ़लस्तीनी घरों को ढहाना और उन्हें क़ब्ज़े में लिया जाना जारी है और अब तक 66 संपत्तियाँ ढहाई जा चुकी हैं या फिर उन्हें क़ब्ज़े में लिया गया है.

UN Photo/Loey Felipe
यूएन राजनैतिक मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डीकार्लो.मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया पर सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए.

इससे 90 फ़लस्तीनी लोग विस्थापित हुए हैं जिनमें 58 बच्चे शामिल हैं और क़रीब साढ़े छह हज़ार लोगों की आजीविका पर असर पड़ा है.

उन्होंने इस कार्रवाई को रोके जाने का पुरज़ोर आग्रह किया है.

ग़ाज़ा में हिंसा अभी उस स्तर पर नहीं पहुंची है जितना फ़लस्तीनी इलाक़ों को अलग करने के लिए इसराइल द्वारा दीवार निर्माण के समय विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई थी. लेकिन पिछले तीन महीनों में एक फ़लस्तीनी व्यक्ति की इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा मौत हो चुकी है और 736 लोग घायल हुए हैं जिनमें 234 बच्चे हैं.

इसराइल में आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अब भी फ़लस्तीनी इलाक़ों से आग लगाने वाली पतंगें और रॉकेट दाग़ा जाना जारी है हालांकि उनकी संख्या में कमी आई है.

“हमास और फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद को तत्काल इन गतिविधियों पर लगाम कसने की ज़रूरत है.” उन्होंने बताया कि पश्चिमी तट में हिंसा अब भी जारी है.

हमास के नियंत्रण वाले ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय, आर्थिक और राजनैतिक स्थिति अब भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है.

उनके मुताबिक़ सभी समस्याओं की जड़ में राजनीति है. साथ ही उन्होंने फ़लस्तीनी धड़ों से अपील की है कि उन्हें एक लोकतांत्रिक और वैधानिक राष्ट्रीय सरकार में शामिल हो जाना चाहिए.

राजनैतिक मामलों की प्रमुख ने कहा कि फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था लगातार ढलान के रास्ते पर है.

इसराइल ने टैक्स राजस्व को आंशिक रूप से फ़लस्तीन को भेजा था लेकिन सरकार ने लगातार पांचवे महीने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.

फ़लस्तीनी प्रशासन की वित्तीय दिक्कतों को देखते हुए तुरंत राहत के तौर पर इसराइल और फ़लस्तीन से साथ मिलकर उपाय तलाश करने का आग्रह किया गया है.

अपने संबोधन के समापन में उन्होंने क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़ों में स्थिति की गंभीरता के बारे में ध्यान दिलाया और हालात में बदलाव के लिए ठोस क़दम उठाने की तत्काल ज़रूरत पर बल दिया है.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र फ़लस्तीनियों को मदद देने और इसराइल द्वारा अशांति समाप्त करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है.

 

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