श्रीलंका : समुद्री मार्ग में फँसे, 100 से अधिक रोहिंज्या शरणार्थियों को बचाया गया

समुद्र में फँसे लोगो में रोहिंज्या समुदाय के लोग भी हैं.
UNHCR/Christophe Archambault
समुद्र में फँसे लोगो में रोहिंज्या समुदाय के लोग भी हैं.

श्रीलंका : समुद्री मार्ग में फँसे, 100 से अधिक रोहिंज्या शरणार्थियों को बचाया गया

प्रवासी और शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - UNHCR ने, पिछले सप्ताहांत श्रीलंका की नौसेना और स्थानीय मछुआरों द्वारा, जोखिमपूर्ण हालात में फँसी एक नाव से रोहिंज्या शरणार्थियों को बचाने और उन्हें तट पर सुरक्षित उतारने की कार्रवाई की सराहना की है.

समाचारों के अनुसार, उत्तरी श्रीलंका के पास समुद्री क्षेत्र में लगभग 105 रोहिंज्या शरणार्थियों के अधर में फँसे होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें जल्द सुरक्षित बाहर निकाल लिया.

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म्याँमार के रख़ाइन प्रान्त में अगस्त 2017 में भड़की हिंसा की वजह से एक गम्भीर मानवीय संकट पैदा हो गया, जिसके बाद लाखों रोहिंज्या लोगों ने शरण के लिये अन्य देशों का रुख़ किया है.

सुरक्षित शरण व बेहतर अवसरों की तलाश में उन्हें अक्सर ख़तरों भरे समुद्री मार्ग से यात्रा करने के लिये मजबूर होना पड़ता है.

यूएन शरणार्थी एजेंसी में एशिया व प्रशान्त क्षेत्र के लिये निदेशक इंद्रिका रवात्ते ने कहा, ''हम श्रीलंकाई नौसेना और उन सभी के आभारी हैं जिन्होंने इन लोगों की जान बचाने में सहायता की.''

"यह मानवता का एक उदाहरण है कि क्षेत्र के सभी देशों को समुद्र में जीवन की त्रासदीपूर्ण हानि की रोकथाम के लिये तत्काल, तेज़ी से कार्रवाई करनी होगी."

नाव से सुरक्षित उतारे गए लोगों की तत्काल ज़रूरतों को पूरा करने के लिये, यूएन शरणार्थी एजेंसी द्वारा श्रीलंकाई प्रशासन को समर्थन मुहैया कराया जा रहा है.

यूएन एजेंसी ने सभी देशों से एक बार फिर अपील की है कि नावों पर सवार और जोखिम भरी परिस्थितियों से जूझ रहे सभी लोगों को बचाना होगा, और क़ानूनी दायित्वों और मानवीय परम्पराओं के अनुरूप सुरक्षित रूप से उतरने की अनुमति दी जानी होगी.

शरणार्थी संगठन ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास, बंगाल की खाड़ी में संकटपूर्ण हालात का सामना कर रही एक अन्य नाव के सिलसिले में प्राप्त रिपोर्टों पर चिन्ता जताई है.

वर्ष 2022 में 160 से अधिक शरणार्थियों की समुद्री मार्ग में या तो मौत हुई है या फिर वे लापता हुए हैं. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है.