‘परमाणु भयादोहन’ और 'मानवीयता के पूर्ण विनाश' ख़तरे का अन्त करने की पुकार

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में परिसर का एक दृश्य
UN/Ingrid Kasper
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में परिसर का एक दृश्य

‘परमाणु भयादोहन’ और 'मानवीयता के पूर्ण विनाश' ख़तरे का अन्त करने की पुकार

शांति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने “परमाणु भयादोहन” (Nuclear blackmail) के एक दौर के सन्दर्भ में, सोमवार को देशों से, सम्भावित वैश्विक त्रासदी के जोखिम से क़दम पीछे हटाने और शान्ति के लिये फिर से प्रतिबद्धता व्यक्त करने का आग्रह किया है.

यूएन महासचिव ने परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये आग्रह किया.

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उधर यूएन महासभा के 77वें सत्र की उच्चस्तरीय जनरल डिबेट सोमवार को सम्पन्न हो रही है.

यूएन प्रमुख ने कहा, “परमाणु शस्त्र, अभी तक निर्मित हथियारों में से, सबसे ज़्यादा विध्वंसकारी हैं.

उनसे किसी भी तरह की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती – केवल विनाश और अशान्ति होते हैं.

उन्होंने कहा कि इन हथियारों का उन्मूलन, ऐसा एक महानतम तोहफ़ा हो सकता है जो हम भविष्य की पीढ़ियों को दे सकते हैं.

मानवीय विध्वंस का जोखिम

ये कार्यक्रम न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में, ट्रस्टीशिप काउंसिल के सभागार में आयोजित किया गया जिसमें विश्व नेताओं, विदेश मंत्रियों और देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने शिरकत की.

यूएन प्रमुख ने याद करते हुए कहा कि शीत युद्ध ने मानवता को मिनटों के भीतर पूर्ण विनाश के नज़दीक पहुँचा दिया था.  

उन्होंने कहा कि बर्लिन दीवार के गिरने के साथ ही शीत युद्ध की समाप्ति के दशकों बाद भी, हम फिर से परमाणु हथियारों की सुगबुगाहट सुन रहे हैं.

यूएन प्रमुख ने कहा, “मैं बेबाकी से कहना चाहता हूँ. परमाणु भयादोहन का दौर बन्द होना होगा."

"ये विचार ही अपने आप में बेतुका है कि कोई भी देश परमाणु युद्ध लड़ सकता है और जीत सकता है. परमाणु हथियारों का किसी भी तरह का प्रयोग, मानवता के पूर्ण विध्वंस का रास्ता खोलेगा. हमें अपने क़दम पीछे हटाने होंगे.”

मायूसी और दृढ़ संकल्प

यूएन महासचिव ने ऐतिहासिक परमाणु अप्रसार सन्धि (NPT) की समीक्षा के लिये, अगस्त 2022 में हुए एक सम्मेलन में, देशों के बीच कोई सहमति नहीं बनने पर, अपनी निराशा व्यक्त की है.

यही एक मात्र ऐसी सन्धि है जो परमाणु हथियारों के भंडार वाले देशों को, निरस्त्रीकरण के लक्ष्य के लिये बांधती है.

यूएन मुख्यालय में चार सप्ताहों के गहन विचार-विमर्श के बाद भी प्रतिनिधि, कोई निष्कर्ष दस्तावेज़ जारी किये बिना ही वापिस लौट गए क्योंकि, रूस ने यूक्रेन में परमाणु सुविधाओं पर अपने नियंत्रण के बारे में दस्तावेज़ की भाषा पर आपत्ति दर्ज की.

यूएन प्रमुख ने प्रयास नहीं छोड़ने का संकल्प लिया और देशों से – तनाव कम करने, जोखिम कम घटाने और परमाणु जोखिम का उन्मूलन करने के लिये, संवाद, राजनय और विचार-विमर्श करने के हर अवसर का प्रयोग करने का आग्रह किया.

यूक्रेन के कीयेव में विस्फोट के कारण भीषण क्षति हुई है.
© UNICEF/Anton Skyba for The Globe and Mail
यूक्रेन के कीयेव में विस्फोट के कारण भीषण क्षति हुई है.

नई भविष्य दृष्टि और प्रतिबद्धता

एंतोनियो गुटेरेश ने परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार के लिये एक नई भविष्य दृष्टि (Vision) की ज़रूरत को रेखांकित किया, इस सन्दर्भ में उन्होंने अपने – शान्ति के लिये नया एजेण्डा का ज़िक्र किया. इसमें एक सार्थक निरस्त्रीकरण और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के सामने दरपेश बहुत से ख़तरों के बारे में एक आम समझ विकसित करने की मांग की गई है.

उन्होंने कहा, “हमें विकसित होती परमाणु व्यवस्था पर ध्यान देने की ज़रूरत है, जिसमें सभी तरह के परमाणु हथियार और उनके उत्पादन व आपूर्ति के तरीक़े शामिल हैं. और हमें सामरिक व परम्परागत हथियारों के दरम्यान फीकी पड़ चुकी रेखा, और साइबर व बाहरी अन्तरिक्ष के नए विवादास्पद क्षेत्रों की मिलीभगत से भी निपटना होगा.”

यूएन महासचिव ने याद दिलाया कि यूएन महासभा की जनरल डिबेट इस सप्ताह समाप्त हो रही है तो देशों से न्यूयॉर्क छोड़ते समय, एक शान्तिपूर्ण भविष्य की दिशा में काम करने का नया संकल्प लेने की पुकार लगाई.

उन्होंने कहा, “परमाणु हथियारों के उन्मूलन किये बिना, शान्ति स्थापित नहीं हो सकती. कोई विश्वास नहीं हो सकता. और टिकाऊ भविष्य भी नहीं हो सकता.”