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परमाणु शस्त्र समाप्ति से ही ख़त्म होगा परमाणु जोखिम, गुटेरेश

परमाणु शस्त्रों के पूर्ण उन्मूनल का अन्तरराष्ट्रीय दिवस, हर वर्ष 26 सितम्बर को मनाया जाता है.
© ICAN/Marlena Koenig
परमाणु शस्त्रों के पूर्ण उन्मूनल का अन्तरराष्ट्रीय दिवस, हर वर्ष 26 सितम्बर को मनाया जाता है.

परमाणु शस्त्र समाप्ति से ही ख़त्म होगा परमाणु जोखिम, गुटेरेश

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि भूराजनैतिक अविश्वास और प्रतिस्पर्धा ने, परमाणु जोखिम, शीत युद्ध के समय के स्तरों पर पहुँचा दिया है, ऐसे में परमाणु शस्त्रों का सम्पूर्ण उन्मूलन ही, एक शान्तिपूर्ण भविष्य की दिशा में, एक मात्र रास्ता है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, यह बात, परमाणु हथियारों के सम्पूर्ण उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर कही है. यह दिवस हर वर्ष 26 सितम्बर को मनाया जाता है.

उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि परमाणु शस्त्रों के प्रयोग, प्रसार और परीक्षण को रोकने के लिए, अनेक दशकों के दौरान हासिल की गई प्रगति को व्यर्थ बनाया जा रहा है. उन्होंने परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार की एक ख़ूब मज़बूत व्यवस्था का आहवान किया है. 

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बढ़ता जोखिम

यूएन प्रमुख ने कहा कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमलों से हुए भीषण विनाश के बाद के दशकों में, यूएन के नेतृत्व में कुछ प्रगति हुई है – मगर अब उस प्रगति को भी व्यर्थ बनाया जा रहा है.

यूएन महासभा ने वर्ष 1946 में अपने प्रथम प्रस्ताव में, परमाणु निरस्त्रीकरण को, एक प्रमुख लक्ष्य के रूप में पहचान दी थी. उसके बावजूद, आज, लगभग 12 हज़ार 512 परमाणु हथियार मौजूद हैं.

क़ानूनी आधार का अभाव नहीं

परमाणु हथियारों को सुरक्षित रूप में नष्ट किए जाने के लिए, उपयुक्त सन्धियों व समझौतों का अभाव नहीं है, जिनमें क्षेत्रीय और वैश्विक प्रावधान भी शामिल हैं.

परमाणु अप्रसार सन्धि, इसमें शामिल पक्षों को, ना केवल परमाणु शस्त्र प्रसार से रोकती है, बल्कि ये सन्धि उन्हें परमाणु ऊर्जा के शान्ति पूर्ण प्रयोग व निरस्त्रीकरण के लिए भी प्रोत्साहित करती है.

इसी तरह का एक और अहम स्तम्भ है – वृहद परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि (CTBT), जिसे 1996 में पारित किया गया था.

सीटीबीटी पर 185 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं, और 170 देशों में इस स्वीकृति भी दे दी है, जिनमें तीन परमाणु शस्त्र सम्पन्न देश भी शामिल हैं – रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन.

अलबत्ता, इस सन्धि के क्रियान्वयन के लिए ये अनिवार्य है कि इस पर विशिष्ट परमाणु प्रौद्योगिकी वाले 44 देश इस पर हस्ताक्षर करें और इसे मंज़ूरी दें. उनमें से अभी 8 देशों ने तो इसे मंज़ूर भी नहीं किया है, जिनके नाम हैं – चीन, मिस्र, भारत, ईरान, इसराइल, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका.

परमाणु सन्धि व्यवस्था में तुलनात्मक रूप से नया सम्मिलन है – परमाणु शस्त्रों की निषिद्धता पर सन्धि, जिसमें किसी भी तरह की परमाणु गतिविधियों में भाग लेने की निषिद्धता का प्रावधान किया गया है. ये सन्धि 22 जनवरी 2022 को लागू हो गई है.

परमाणु जोखिम को ख़त्म करें

यूएन प्रमुख ने कहा, “परमाणु जोखिम को ख़त्म करने का एक मात्र रास्ता, पमराणु हथियारों का उन्मूलन करना है.”

उनके अनुसार, इसका मतलब है कि परमाणु निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मज़बूत करना होगा, जिनमें परमाणु अप्रसार सन्धि और परमाणु शस्त्र निषिद्धता सन्धियों को, बिना देरी के लागू किया जाना शामिल है.

एंतोनियो गुटेरेश ने इस सम्बन्ध मॉं तनावों को दूर करने और परमाणु जोखिम का अन्त करने के लिए, संवाद, राजनय और बातचीत के, चिरकालिक उपकरणों का प्रयोग किए जाने का आहवान किया.

उन्होंने साथ ही ये याद भी दिलाया कि निरस्त्रीकरण, उनके नवीन शान्ति एजेंडा पर, जुलाई 2023 में जारी नीति-पत्र का मुख्य बिन्दु है.