यूक्रेन: परिवारों से बिछड़े व अकेले बच्चों की सुरक्षा पुख़्ता करने की पुकार

यूक्रेन के पश्चिमी इलाक़े में, 5 मार्च को बच्चे व परिवार, पोलैण्ड की तरफ़ जाने वाले रास्ते पर.
© UNICEF/Viktor Moskaliuk
यूक्रेन के पश्चिमी इलाक़े में, 5 मार्च को बच्चे व परिवार, पोलैण्ड की तरफ़ जाने वाले रास्ते पर.

यूक्रेन: परिवारों से बिछड़े व अकेले बच्चों की सुरक्षा पुख़्ता करने की पुकार

प्रवासी और शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को एक संयुक्त बयान में, यूक्रेन में संघर्ष से बचकर निकलने वाले और अपने माता-पिता व अभिभावकों से बिछड़े बच्चों की रक्षा सुनिश्चित किये जाने की पुकार लगाई है.

संयुक्त राष्ट्र बाल एजेंसी UNICEF की कार्यकारी निदेशिका कैथरीन रसैल और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - UNHCR के उच्चायुक्त, फ़िलिपो ग्रैण्डी ने देशों के, विस्थापित यूक्रेनी लोगों को अपने यहाँ जगह देने वाले देशों से ये सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि इन बच्चों व युवजन की तुरन्त शिनाख़्त की जाए और उनका पंजीकरण किया जाए. 

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युवाओं की जान जोखिम में

यूएन एजेंसियों के इन प्रमुखों ने कहा, “माता-पिता की देखभाल के बिना बच्चों को हिंसा, दुर्व्यवहार और शोषण का ख़तरा बढ़ जाता है. जब ये बच्चे सीमाओं के पार जाते हैं तो जोखिम कई गुना बढ़ जाते हैं. आपात स्थितियों में तस्करी का ख़तरा भी बढ़ जाता है."

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी, (UNHCR) के आँकड़ों के अनुसार, लगभग दो सप्ताह पहले रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से 17 लाख से अधिक लोग, सुरक्षित स्थानों की तलाश में, यूक्रेन से निकल चुके हैं. 

इनमें से ज़्यादा संख्या यानि लगभग दस लाख लोग, पोलैण्ड गए हैं, जबकि अन्य लोग, हंगरी, मोल्दोवा, रोमानिया, स्लोवाकिया और उससे आगे चले गए हैं.

सैकड़ों-हजारों बच्चे शरणार्थियों में शामिल हैं, जिनमें बहुत ऐसे भी हैं जो अकेले हैं या जो अपने माता-पिता व परिजन से अलग हो गए हैं.

आपातकालीन देखभाल का विस्तार हो

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रमुखों ने कहा कि देशों को, बच्चों और परिवारों के लिये, सीमा पार करने के तुरन्त बाद ही सुरक्षित स्थान प्रदान करना चाहिये, और इन स्थलों को राष्ट्रीय बाल संरक्षण प्रणालियों से जोड़ा जाना चाहिये.

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए आपातकालीन देखभाल व्यवस्था की क्षमता का भी विस्तार किया जाना चाहिये.

बच्चों की सुरक्षा के लिये महत्वपूर्ण अन्य सेवाओं के साथ-साथ परिवारों का पता लगाने और बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने के लिये व्यवस्था किये जाने के साथ-साथ, पृष्ठभूमि की जाँच-परख पूरी कर चुके, देखभाल करने वालों की तैनाती हो.

परिवार का पुनर्मिलन महत्वपूर्ण

उन्होंने कहा, "अपने परिवारों के बिना सीमाओं के पार विस्थापित हुए बच्चों के लिये, एक सरकारी प्रणाली के माध्यम से अस्थाई पालक या समुदाय-आधारित अन्य देखभाल सुविधा, महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है."

"आपातकाल के दौरान या तुरन्त बाद की परिस्थितियों में दत्तक ग्रहण नहीं होना चाहिये. बच्चों को उनके परिवारों के साथ फिर से मिलाने का हर सम्भव प्रयास किया जाना चाहिये, यदि ऐसा पुनर्मिलन उनके सर्वोत्तम हित में हो.”

इस बीच, यूक्रेन में लगभग एक लाख बच्चे संस्थागत देखभाल सुविधाओं और बोर्डिंग स्कूलों में रह रहे हैं, जिनमें आधे विकलांग हैं. इनमें से अनेक बच्चों के रिश्तेदार या क़ानूनी अभिभावक मौजूद हैं.

बच्चों के हितों की रक्षा करें

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रमुखों ने, पड़ोसी देशों या उससे आगे, बच्चों को सुरक्षा में स्थानान्तरित करने की मांग करने वाली संस्थाओं की रिपोर्ट्स का सन्दर्भ देते हुए, बच्चों के सर्वोत्तम हित में उपाय सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित किया है.

यह सुनिश्चित किये जाने का भी आहवान किया गया है कि उन बच्चों के माता-पिता या उनके अभिभावकों ने इस बारे में सहमति दी है.

उन्होंने कहा, "किसी भी परिस्थिति में परिवारों को, स्थानान्तरण या निकासी गतिविधियों के परिणामस्वरूप अलग नहीं किया जाना चाहिये. यूक्रेन के भीतर संस्थानों में बच्चों की निकासी, राष्ट्रीय अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार की जानी चाहिये."

सीमाओं के पार सभी गतिविधियों के बारे में, तुरन्त देश के भीतर और पड़ोसी देशों में सक्षम अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिये. बच्चों को यथा सम्भव उनकी पहचान और उनके मामलों की फाइलों के साथ ही निकाला जाना चाहिये.

संयुक्त राष्ट्र के इन अधिकारियों ने देशों द्वारा दिखाई गई एकजुटता और तत्परता के लिये आभारी व्यक्त करते हुए, ज़ोर देकर ये भी कहा कि अकेले और अलग किये गए बच्चे, विशेष रूप से कमज़ोर होते हैं.

इसलिये, उनकी तात्कालिक ज़रूरतों और सुरक्षा को तात्कालिक प्राथमिकता दी जानी चाहिये, जबकि मध्यम से दीर्घकालिक समाधानों की पहचान की जानी चाहिये.