नया IMF पूर्वानुमान: बढ़ता महामारी प्रकोप, बाधित पुनर्बहाली, उच्च महंगाई

25 जनवरी 2022

अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, अपेक्षाओं के विपरीत कहीं ज़्यादा कमज़ोर अवस्था में, वर्ष 2022 में दाख़िल हो रही है. एजेंसी ने मंगलवार को, विश्व आर्थिक परिदृश्य (WEO) के बारे में प्रस्तुत ताज़ा जानकारी में ये बात कही है.

मुद्रा कोष का अब मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस वर्ष 4.4 प्रतिशत का विस्तार होने की उम्मीद है, जबकि अक्टूबर 2021 में ये आँकड़ा 5.9 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई थी.

इस तरह, ये विस्तार आँकड़ा आधा अंक प्रतिशत कम रहने की सम्भावना है, जिसमें अनेक परिवर्तन झलकते हैं.

कोविड-19 के नए वैरिएण्ट ओमिक्रॉन के फैलाव के साथ ही, बहुत से देशों ने आवागमन पर पाबन्दियाँ लगाईं, जिनके कारण आर्थिक पुनर्बहाली में कुछ ठहराव आया.

बढ़ती ऊर्जा क़ीमतों और आपूर्ति श्रंखला में बाधाओं के कारण भी, पहले के अनुमानों से कहीं ज़्यादा महंगाई दर्ज की गई है. ऐसा, मुख्य रूप से अमेरिका और उभरते  बाज़ारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में देखा गया है.

अमेरिका और चीन

ये समीक्षा, मुख्य रूप से, दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों – अमेरिका व चीन की परिस्थितियों के पूर्वानुमानों के नतीजों पर आधारित है.

मुद्रा कोष का कहना है कि अमेरिका में विभिन्न कारणों से, इस वर्ष आर्थिक विकास 4 प्रतिशत रहने की सम्भावना है, जोकि पूर्व में किये गए अनुमानों से 1.2 प्रतिशत कम है.

चीन में, सम्पदा सैक्टर में संकुचन, निजी खपत में उम्मीद से कहीं कम पुनर्बहाली, और कोविड-19 महामारी सम्बन्धी कड़े उपायों के कारण, 0.8 प्रतिशत कम आर्थिक वृद्धि होगी.

महंगाई और 2023

मुद्रा कोष ने, वर्ष 2023 के लिये, वैश्विक आर्थिक वृद्धि, धीमी होकर 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है.

इस अनुमान में माना गया है कि इस वर्ष के अन्त तक, अधिकतर देशों में ख़राब स्वास्थ्य परिणामों में कमी होगी, दुनिया भर में टीकाकरण की दर बेहतर होगी, और उपचार ज़्यादा कारगर होंगे.

दूसरी तरफ़, महंगाई की उच्च दर, पहले व्यक्त किये गए अनुमानों से कहीं ज़्यादा लम्बी अवधि तक रहेगी, और आपूर्ति श्रंखला में मौजूद बाधाएँ व उच्च ऊर्जा क़ीमतें, इस पूरे वर्ष के दौरान रहने का अनुमान है.

जोखिम

अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने, अपनी ताज़ा जानकारी में आगाह भी किया है कि कोविड-19 के नए वैरिएण्ट, इस महामारी को लम्बा खींच सकते हैं, और नए प्रकार की आर्थिक बाधाएँ उत्पन्न कर सकते हैं.

इसके अलावा, आपूर्ति श्रंखला में बाधाएँ, ऊर्जा क़ीमतों में उछाल, और स्थानीय स्तर पर आय सम्बन्धी दबावों से नज़र आता है कि महंगाई व नीति मार्गों के इर्द-गिर्द बहुत अनिश्चितता बरक़रार है.

भू-राजनैतिक तनाव और जलवायु आपदा भी अनेक जोखिम उत्पन्न करते हैं, जिसका मतलब है कि घातक प्राकृतिक आपदाओं की सम्भावना काफ़ी बलवती है.

सहयोग है - वृद्धि के लिये कुंजी

ऐसे में जबकि महामारी ने अपनी पकड़ मज़बूत की हुई है, मुद्रा कोष का विश्वास है कि एक प्रभावशाली वैश्विक स्वास्थ्य रणनीति की, पहले से कहीं ज़्यादा दरकार है.

और ज़्यादा वैरिएण्ट्स के जोखिम को कम करने के लिये, विश्व स्तर पर वैक्सीन, परीक्षण और उपचारों की सुलभता बहुत ज़रूरी है. इसके लिये, वैक्सीन टीकों का बढ़ा उत्पादन, देशों के भीतर बेहतर वितरण प्रणालियाँ, और न्यायसंगत अन्तरराष्ट्रीय वितरण की आवश्यकता है.

अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मानना है कि नक़दी तक पहुँच आसान बनाने और देशों के स्तर पर क़र्ज़ प्रणालियों में व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की दरकार है.

 

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