महासागरों के बग़ैर पृथ्वी पर मानव जीवन असम्भव - महासभा प्रमुख

1 जून 2021

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने कहा है कि महासागरों पर मंडराते संकट पर पार पाने के लिये, स्पष्ट, रूपान्तरकारी और व्यावहारिक समाधानों का तत्काल सहारा लिया जाना होगा.  उन्होंने वर्ष 2022 में महासागरों से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले की तैयारियों के तहत आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि ऐसा कोई परिदृश्य नहीं है जिसमें पृथ्वी पर महासागरों के बग़ैर जीवन की कल्पना की जा सके.

टिकाऊ विकास एजेण्डा के 14वें लक्ष्य (Life below water) और महासागर के विषय पर मंगलवार को एक उच्चस्तरीय चर्चा का आयोजन किया गया.

यूएन महासभा प्रमुख ने इस चर्चा को सम्बोधित करते हुए कहा, "सरल शब्दों में कहें तो, हमारे ग्रह पर, महासागरों के साथ हमारे रिश्ते को बदलना होगा."

उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों के लिये भोजन व आजीविका के साधन, इन पारस्थितिकी तंत्रों के नाज़ुक सन्तुलन के लिये, मानवीय गतिविधियों के कारण ख़तरा पैदा हुआ है.

यूएन महासभा प्रमुख ने सचेत किया कि ऐसा कोई परिदृश्य नहीं है जिसमें पृथ्वी पर महासागरों के बग़ैर जीवन की कल्पना की जा सके.

वोल्कान बोज़किर ने कहा कि आमजन एक ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहते, जहाँ उन्हें एक के बाद दूसरे संकट का सामना करना पड़े.

इसके बजाय सुरक्षा, टिकाऊपन और मानसिक शान्ति को प्राथमिकता दी जाती है, जोकि एक स्वस्थ पृथ्वी के ज़रिये ही सम्भव है.

उन्होंने कहा कि नीतिनिर्धारक अब इस बात को समझने लगे हैं कि एक मज़बूत अर्थव्यवस्था के लिये, महासागरों का अच्छा स्वास्थ्य बेहद ज़रूरी है.

"एक टिकाऊ महासागर अर्थव्यवस्था का निर्माण, हमारे समय के सबसे अहम कार्य और महानतम अवसरों में से एक है."

इस सन्दर्भ में, उन्होंने सरकारों, उद्योगों, नागरिक समाज और अन्य हितधारकों से महासागरों के समक्ष उत्पन्न चुनौती से निपटने के लिये, साथ मिलकर समाधानों को लागू करने का आहवान किया है.

यूएन महासभा अध्यक्ष ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि पुर्तगाल के लिस्बन में आयोजित होने वाले, महासागरों पर दूसरे सम्मेलन में प्रगति को दर्शाते तथ्यों के साथ पहुँचना होगा.

महासागरों से जुड़े मामलों के लिये विशेष दूत पीटर थॉमसन ने महासागरों के साथ रिश्ते को बेहतर बनाने का आग्रह करते हुए सम्मान व सन्तुलन की अहमियत पर बल दिया है.

उन्होंने आगाह किया कि महासागरों के अम्लीकरण को निर्बाध रूप से जारी नहीं रहने दिया जा सकता है, साथ ही वर्ष 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिये, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में भी कटौती करनी होगी.

विशेष दूत के मुताबिक महासागरों की अहमियत के प्रति जागरूकता, समुद्री संरक्षित क्षेत्र के विस्तार और महासागर विज्ञान के विषय में प्रगति हुई है, मगर इसका दायरा व स्तर बढ़ाया जाना अहम है.

 

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