शान्तिरक्षा अभियानों में महिला सशक्तिकरण 'शीर्ष प्राथमिकता'

25 मार्च 2021

शान्तिरक्षा अभियानों के लिये संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने शान्तिरक्षा और शान्तिनिर्माण प्रयासों में महिलाओं के बुनियादी योगदानों की सराहना की है. यूएन अवर महासचिव ज्याँ-पिएर लाक्रोआ ने गुरुवार को दोहराया कि सैन्य बलों में महिलाओं का सशक्तिकरण, एक अहम प्राथमिकता है लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये, हर किसी द्वारा यथासम्भव प्रयास किये जाने की ज़रूरत है.   

शान्ति अभियानों के लिये यूएन अवर महासचिव ज्याँ-पिएर लाक्रोआ ने महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 65वें सत्र के दौरान ‘सैन्य बलों में महिला नेतृत्व’ के विषय पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है. 

उन्होंने कहा, “यूएन शान्तिरक्षा में महिलाओं की पूर्ण, समान और अर्थपूर्ण भागीदारी को बढ़ावा देना, मेरे विभाग की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है.”

“यह सुरक्षा परिषद के महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा के प्रस्ताव और महासचिव के शान्तिरक्षा के लिये कार्रवाई पहल पर आधारित है.”

‘शान्तिरक्षा के लिये कार्रवाई’ (Action for Peacekeeping/A4P) पिछले तीन वर्षों से शान्तिरक्षा के लिये दिशा निर्धारित कराने वाला एक फ़्रेमवर्क रहा है. इसके ज़रिये शान्तिरक्षा में हर स्तर पर और महत्वपूर्ण पदों पर असैनिक व वर्दीधारी महिलाओं की संख्या बढ़ाए जाने का लक्ष्य रखा गया है. 

“यह अगले चरण के लिये भी एक प्राथमिकता के तौर पर जारी रहेगा.”

यूएन अधिकारी ने बताया कि शान्तिरक्षा मिशनों के वर्दीधारी घटकों में लैंगिक बराबरी हासिल करने की दिशा में बेहतरी के बावजूद, प्रगति की रफ़्तार धीमी है. 

जनवरी 2021 में, मिशन और स्टाफ़ अधिकारियों में महिला विशेषज्ञों की संख्या 20 फ़ीसदी से भी कम थी. सैन्य यूनिटों में उनका हिस्सा महज़ 5.4 प्रतिशत था. 

“हमें एक लम्बा रास्ता तय करना है, लेकिन हम प्रगति होते देख रहे हैं.”

विविधतापूर्ण नेतृत्व

अवर महासचिव ज्याँ-पिएर लाक्रोआ ने बताया कि विविधतापूर्ण नेतृत्व और दलों से विविधतापूर्ण परिप्रेक्ष्यों को समझना, बेहतर निर्णय ले पाना और अभियानों को बेहतर बनाना सम्भव हो पाता है.  

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में सुधार लाने, अवरोधों को तोड़ने और शीर्ष पदों पर ज़्यादा संख्या में महिलाओं के लिये रास्ता बनाया जाना होगा. 

अवर महासचिव के अनुसार विभिन्न पदों व भूमिकाओं में महिला नेतृत्व की अहमियत को पहचाने जाने और सामर्थ्यपूर्ण माहौल के सृजन की आवश्यकता है. 

यूएन मुख्यालय से लेकर यूएन मिशनों तक, ताकि शान्ति मिशन असरदार ढँग से उनके लिये तय दायित्वों का निर्वहन कर सकें. 

शान्तिरक्षा मामलों के प्रमुख ने उन पहलों का भी उल्लेख किया जिनके ज़रिये लैंगिक बराबरी हासिल किये जाने पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है. 

इनमें पेशेवर विकास, प्रतिभा प्रबन्धन और कार्यस्थल संस्कृति सहित अन्य विषयों पर प्रयास हो रहे हैं. साथ ही यौन उत्पीड़न, भेदभाव, अचेतन पूर्वाग्रह और रूढ़ीवादी मान्यताओं से भी मुक़ाबला किया जा रहा है.

अवर महासचिव ने कहा कि शान्ति अभियानों के लिये विभाग, योगदान देने वाले देशों के साथ रचनात्मक सहयोग पर निर्भर है. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लैंगिक पहचान को परे रखते हुए, हर किसी को लैंगिक समानता में बदलाव के वाहक के तौर पर साथ लेकर चलने की ज़रूरत है. 

उन्होंने यूएन शान्तिरक्षा मिशनों में योगदान देने वाले देशों से कहा कि लैंगिक समानता, महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा और लैंगिक बराबरी को एक साझा राजनैतिक प्राथमिकता के रूप मे देखने की आवश्यकता है. 

साथ ही इस कार्य क लिये संसाधनों व राजनैतिक इच्छाशक्ति का निवेश ज़रूरी है, चूँकि इस ज़िम्मेदारी को अकेले पूरा नहीं किया जा सकता.

 

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