2021 को टिकाऊ ऊर्जा के लिये कार्रवाई का वर्ष बनाने के 'प्रयासों में तेज़ी'

4 जनवरी 2021

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने असरदार जलवायु कार्रवाई में स्वच्छ ऊर्जा की अहमियत पर बल देते हुए उम्मीद जताई है कि वर्ष 2021 में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रगति की रफ़्तार तेज़ होगी. यूएन एजेंसी में ऊर्जा मामलों के प्रमुख मार्सेल एलर्स ने विश्वास व्यक्ति किया है कि स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े ऐसे समाधान मौजूद हैं जो जलवायु और टिकाऊ विकास से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं. 

दुनिया जलवायु लक्ष्यों और टिकाऊ विकास एजेण्डा के सातवें लक्ष्य – स्वच्छ, किफ़ायती और भरोसेमन्द ऊर्जा की सार्वभौमिक सुलभता – को हासिल करने से अभी दूर है. 

लेकिन यूएन अधिकारी मार्सेल एलर्स ने कहा कि राजनैतिक और निवेश के तौर पर स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता बनाए जाने के लिये प्रयासों में तेज़ी आ रही है. 

बताया गया है कि अतीत में स्वच्छ ऊर्जा की तुलना में जीवाश्म ईंधन कम ख़र्चीले रहे हैं लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है.  

मार्सेल एलर्स के मुताबिक नवीकरणीय ऊर्जा हर वर्ष अब और अधिक किफ़ायती बनती जा रही है और कुछ विकल्पों की क़ीमत अब जीवाश्म ईंधनों की तुलना में कम है. 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 से अब तक, सौर ऊर्जा की क़ीमत में 89 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हो चुकी है. 

“अब अधिकाँश देशों में नए कोयला ऊर्जा संयन्त्रों के निर्माण के बजाय, सौर ऊर्जा को अपनाना सस्ता है, और सौर ऊर्जा अब इतिहास में सबसे सस्ती बिजली है.”

वर्ष 2020 के दौरान अभूतपूर्व चुनौतियों के बीच और कुछ विफलताओं के बावजूद, नवीकरणीय ऊर्जा सैक्टर ने सुदृढ़ता का परिचय दिया है.

“प्रौद्योगिक प्रगति और नवाचारी व्यावसायिक मॉडल के आगमन के साथ-साथ क़ीमतों में यह गिरावट का अर्थ है कि अब हम बड़े बदलावों के कगार पर पहुँच चुके हैं.” 

इस क्रम में उन्होंने सार्वजनिक और निजी सैक्टरों से व्यापक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा निवेश का आग्रह किया है.

संकल्पों से कार्रवाई तक

वर्ष 2020 में देशों ने बेहतर, हरित और न्यायसंगत पुनर्निर्माण का संकल्प लिया है. 

यूएनडीपी की जलवायु वादा (Climate Promise) पहल में उन सभी देशों को मदद प्रदान करने का संकल्प लिया गया है जो अपनी राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाओं को महत्वाकाँक्षी बनाना चाहते हैं. 

नैदरलैण्ड्स के ग्रामीण इलाक़े में एक महिला, पवन चक्कियों के पास से होकर गुज़र रही है.
Unsplash/Les Corpographes
नैदरलैण्ड्स के ग्रामीण इलाक़े में एक महिला, पवन चक्कियों के पास से होकर गुज़र रही है.

इस पहल से समर्थन मिलने के साथ अब तक 115 देशों ने जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबला करने के लिये अपनी योजनाओं को पुख़्ता बनाने का संकल्प लिया है.

यूएन एजेंसी अधिकारी ने बताया कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और योरोपीय संघ जैसी, ज़्यादा कार्बन उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार अर्थव्यवस्थाओं, ने नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य करने का संकल्प लिया है. 

इसके अलावा अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने फिर से पेरिस जलवायु समझौते में शामिल होने की मंशा ज़ाहिर की है.

“अब इन संकल्पों को मूर्त रूप देने की ज़रूरत है... महत्वाकाँक्षी संकल्प एक मज़बूत संकेत हैं और नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य करने की दिशा में पहला ज़रूरी क़दम हैं.”

“अब हमें इस कार्रवाई को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है.”

हरित पुनर्बहाली

कोविड-19 से उबरने के दौरान स्वच्छ ऊर्जा एक ऐसा असरदार समाधान है जिसका हर तरह से लाभ है. 

इससे विश्व के निर्धनतम लोगों के लिये स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और साथ ही भरोसेमन्द बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकेगी जिसकी स्वास्थ्य केन्द्रों को ज़रूरत होती है.

“चूँकि कोविड-19 वैक्सीनों के टीकाकरण की शुरुआत की जा रही है, कुछ वैक्सीनों को -70 डिग्री सेल्सियस पर रखने की ज़रूरत होती है. इसके लिये एक टिकाऊ और भरोसेमन्द शीत भण्डारण सुविधाओं के लिये बिजली मुहैया कराना अति महत्वपूर्ण है.”

साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश करने से जीवाश्म ईंधनों में निवेश की तुलना में लगभग तीन गुणा रोज़गार सृजित किये जा सकते हैं. 

“जैसे-जैसे दुनिया का तेज़ी से शहरीकरण हो रहा है, इमारतों में ऊर्जा दक्षता, टिकाऊ शीतलन और तापन, स्मार्ट शहरी नियोजन व टिकाऊ परिवहन विकल्प... शहरों के भविष्य के लिये कुँजी हैं.”

संयुक्त राष्ट्र, पिछले 40 वर्षों में पहली बार ऊर्जा पर, सितम्बर 2021 में, एक उच्चस्तरीय सम्वाद की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहा है. 

इस कार्यक्रम के ज़रिये देशों, व्यवसायों, नागरिक समाज और अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा टिकाऊ ऊर्जा पर कार्रवाई का दायरा और स्तर बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. 

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रशासक एखिम श्टाइनर ने हाल ही में वैश्विक ऊर्जा शासन प्रणाली को मज़बूती प्रदान किये जाने की पुकार लगाई थी. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि स्वच्छ ऊर्जा के सहारे सार्वभौमिक ऊर्जा सुलभता सुनिश्चित करने और जलवायु संकट से निपटने में मदद मिल सकती है.

मार्सेल एलर्स के मुताबिक जीवाश्म ईंधनों को चरणबद्ध ढँग से इस्तेमाल से बाहर करना और हरित अर्थव्यवस्थाओं की ओर क़दम बढ़ाना, एक विशाल प्रक्रिया है, लेकिन हम इस चुनौती का मुक़ाबला करने के लिये तैयार हैं. 

 

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