75वाँ सत्र: बांग्लादेश का रोहिंज्या मुद्दे पर व्यापक अन्तरराष्ट्रीय कार्रवाई का आग्रह

26 सितम्बर 2020

बांग्लादेश की प्रधानमन्त्री शेख़ हसीना ने देश में रोहिंज्या शरणार्थियों की मदद के लिये मज़बूत अन्तरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता की पुकार लगाई है ताकि रोहिंज्या समुदाय के लोगों की म्याँमार वापसी सुनिश्चित हो सके.  बांग्लादेश में इस समय दस लाख रोहिंज्या रह रहे हैं जो मुख्यत: मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय से हैं और राष्ट्रविहीन हैं.  

वर्ष 2017 में म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में हिंसा भड़कने के बाद जान बचाने के लिये बड़ी संख्या में रोहिंज्या समुदाय के लोगों ने भागकर बांग्लदेश में शरण ले ली थी.   

प्रधानमन्त्री शेख़ हसीना ने शनिवार को यूएन महासभा की जनरल डिबेट के लिये पहले से ही रिकॉर्ड किये गए अपने वीडियो सन्देश में कहा, “तीन वर्ष से ज़्यादा का समय बीत चुका है. यह अफ़सोसनाक है कि एक भी रोहिंज्या व्यक्ति को वापिस देश नहीं भेजा जा सका है. यह समस्या म्याँमार की देन है और इसका समाधान भी म्याँमार में ढूँढा जाना होगा.”

“मैं अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से इस संकट के समाधान के लिये एक ज़्यादा प्रभावी भूमिका निभाने का अनुरोध करती हूँ.”

ग़ौरतलब है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 से बचाव के लिये ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र इस वर्ष यूएन महासभा के 75वें सत्र में राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख वर्चुअली शिरकत कर रहे हैं. 

आर्थिक पैकेज से राहत

बांग्लादेश की प्रधानमन्त्री ने कोरोनावायरस संकट पर पार पाने के लिये और उसके असर को कम करने के लिये उनकी सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों के बारे में जानकारी दी. 

कोविड-19 की वजह से बांग्लादेश में आर्थिक प्रगति पर असर पड़ा है, लेकिन उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन द्वारा लागू की गई पहलों में जीवन और आजीविका को प्राथमिकता दी गई है. 

इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने उद्योगों के लिये 13 अरब डॉलर से ज़्यादा आर्थिक राहत पैकेजों और सामाजिक संरक्षा का दायरा बढ़ाने का उल्लेख किया.  

“हमने उन लोगों के लिये जल्द तैयार होने वाले भोजन और अन्य सहायता का प्रबन्ध किये हैं जो कोविड-19 के कारण बेरोज़गार हो गए थे. इस प्रबन्ध से एक करोड़ परिवारों को लाभ पहुँचा है.”

“हमने 40 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की है. हमने 50 लाख लोगों को नक़दी प्रोत्साहन भी दिये हैं जिनमें महामारी से प्रभावित किसान, कामगार और श्रमिक हैं.”

“आम लोगों की स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के लिये हम 18 हज़ार सामुदायिक क्लीनिक और संघीय स्वास्थ्य केन्द्रों के ज़रिये 30 प्रकार की दवाएँ निशुल्क मुहैया करा रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि विभिन्न उपायों के ज़रिये महामारी का असर मोटे तौर पर कम ही देखने को मिला है.  

प्रधानमन्त्री हसीना ने कहा कि महामारी की चुनौती से निपटने के बीच खाद्य उत्पादन उनके लिये उच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहा है. 

प्रमुख उद्योगों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिये विशेष प्रबन्ध किये गए हैं और इसे सम्भव बनाने के लिये स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है. 

“इसके परिणामस्वरूप, हमारा स्वास्थ्य सैक्टर और अर्थव्यवस्था तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है.”

“वैश्विक औद्योगिक उत्पादकता में कोविड-19 के कारण आई मन्दी के बावजूद, हमारे जीडीपी में 5.24 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है जिसके अगले वित्तीय वर्ष में बढ़कर सात फ़ीसदी होने की सम्भावना है.”

सर्वजन के लिये वैक्सीन 

बांग्लादेश की प्रधानमन्त्री ने कहा कि कोविड-19 ने हमें आगाह किया है कि हम सभी इनसानों के भाग्य एक दूसरे से जुड़े हैं और सहयोग के अभाव में कोई भी सुरक्षित नहीं है.  

प्रधानमन्त्री शेख़ हसीना ने आशा व्यक्त की है कि महामारी के ख़िलाफ़ विकसित वैक्सीन हर एक व्यक्ति के लिये हर स्थान पर ज़रूरतमन्दों के लिये उपलब्ध होगी.

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस प्रक्रिया में अपना योगदान दे सकता है.  

उनके मुताबिक यदि बांग्लादेश को तकनीकी ज्ञान और पेटेन्ट मुहैया कराया जाता है तो फिर बांग्लादेश के औषधि-उत्पादन उद्योग में व्यापक पैमाने पर वैक्सीन की खुराकें तैयार करने की क्षमता है. 

 

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