UNCTAD: वैश्विक महामारी से उबरने में सभी की समृद्धि का रास्ता...

24 सितम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की वर्ष 2020 की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी ने अत्यधिक वैश्वीकृत विश्व की कमियों को उजागर कर दिया है जो 1980 के दशक में शुरू हुआ था. इसमें असमानता के उच्च स्तर, किरायों का एकीकृत होना, श्रम बाज़ार का कम होता हिस्सा, अनौपचारिक सैक्टर का बढ़ता दायरा और क़र्ज़ का बढ़ता स्तर और देशों की घटती भूमिका जैसी ख़ामियाँ शामिल हैं. संगठन के  वैश्वीकरण और विकास रणनीति विभाग में आर्थिक मामलों की वरिष्ठ अधिकारी रश्मि बाँगा का ब्लॉग...

UNCTAD की व्यापार और विकास रिपोर्ट 2020 (From Global Pandemic to Prosperity for All: Avoiding Another Lost Decade) में यह सुझाव दिया गया है कि 'मुक्त व्यापार' को प्रोत्साहन देना महामारी के दौरान भी जारी है, जिसने, सभी स्तरों पर असमानताएँ और ज़्यादा बढ़ा दी हैं, और बहुपक्षवाद की भावना खण्डित करके, विश्व व्यापार संगठन जैसे बहुपक्षीय संगठनों से लोगों का भरोसा कम कर दिया है.

विश्व अर्थव्यवस्था

वैश्विक अर्थव्यवस्था के कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप इस वर्ष 4 प्रतिशत से अधिक सिकुड़ने का अनुमान है जिसमें अनुमानित 6.8 प्रतिशत अंकों की गिरावट के कारण साल के अन्त तक वैश्विक उत्पाद में 6 खरब डॉलर से अधिक की कमी आएगी.

विश्व अर्थव्यवस्था "90% अर्थव्यवस्था" होगी, जो पहले की तुलना में छोटी व बहुत नाज़ुक होगी और अधिक असमान व भविष्य के झटकों के लिये अधिक असुरक्षित है. दुनिया "K" आकार की पुनर्बहाली (Recovery) का अनुभव करेगी, जिसमें असमान पुनर्बहाली और प्रगति होती है, धनी वर्ग के लिये "V-आकार" की पुनर्बहाली और बाक़ी सभी के लिये संघर्ष का दौर. "V" आकार की पुनर्बहाली में मन्दी के बाद तेज़ी से हालात बेहतर हो जाते हैं.

 अनुमान के मुताबिक V-आकार की पुनर्बहाली विश्व अर्थव्यवस्था को 2019 के विकास के स्तर पर वापस नहीं ला सकेगी. 

व्यापार में संकुचन

व्यापार में इस वर्ष लगभग 20 प्रतिशत संकुचन होगा, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आएगी, और विदेशों व अन्य स्थानों से अपनें घरों व मूल स्थानों को भेजी जाने वाली रक़म में 100 अरब डॉलर तक की कमी आएगी. 

सबसे ज़्यादा कमी, वैसे तो विकसित दुनिया में होगी, मगर सबसे बड़े आर्थिक व सामाजिक नुक़सान विकासशील विश्व में होंगे जहाँ अनौपचारिक सैक्टर का स्तर बहुत ज़्यादा है. विकासशील देशों में उपभोक्ता वस्तुएँ और पर्यटन विदेशी मुद्रा के मुख्य स्रोत हैं. वित्तीय क्षेत्र को भारी-भरकम क़र्ज़ ने दबा दिया है.

इस वर्ष विकसित दुनिया 5.8 प्रतिशत तक सिकुड़ जाएगी और 2021 में वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत होगी, यानि खोया हुआ विकास पूरी तरह हासिल नहीं होगा.

हालाँकि विकासशील देश खोया हुआ विकास पुन: प्राप्त करने में सक्षम होंगे, लेकिन वो भी ज़्यादातर चीन की वजह से. भारत में 2021 में 5.9 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि बढ़कर 3.9 प्रतिशत होने की उम्मीद है.

कोविड-19 महामारी से हमें बेहतर तरीक़े से पुनर्बहाली करने का दूसरा मौका मिला है. दुनिया को अब जिस चीज़ की ज़रूरत है वह है पूर्ण रोज़गार और सामाजिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के सम्बन्ध में देशों की बेहतर भूमिका. यह एक तरह से बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने का भी सही समय है जिससे खोया हुआ भरोसा वो फिर से जीता जा सके. 

UNCTAD ने विश्व व्यापार संगठन में और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में महामारी से सम्बन्धित सरकारी कार्यों पर एक अस्थायी "शान्ति खण्ड" का प्रस्ताव दिया है, जो देशों को बौद्धिक सम्पदा, डेटा और सूचना अवरोधों को दूर करने के लिये आपातकालीन उपाय जल्द अपनाने और उपयोग करने में सक्षम करेगा.

2001 में दोहा विकास एजेण्डा के तहत शुरू हुई बातचीत में, महत्वपूर्ण मामलों में व्यापार प्रणाली के पुनर्सन्तुलन के प्रयास किये गए.

भविष्य के लिये, दोहा दौर का समापन और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में दोहा विकास एजेण्डे के वादे पूरे करना व्यापार प्रणाली में विश्वास बहाल करने में सहायक होगा, जिसमें एक विशेष व न्यायसंगत नतीजा सुनिश्चित करने के लिये अलग व्यवहार की प्रतिबद्धता हो.

डिजिटल नियम

उद्योग 4.0 ने विकासशील देशों के लि/s नई चुनौतियाँ पैदा की हैं. डिजिटल खाई को पाटने के लिये नीतिगत आज़ादी की ज़रूरत होगी. संयुक्त वक्तव्य पहल के तहत देशों के बीच डिजिटल नियमों जैसे नए मुद्दों पर चर्चा चल रही है, जो इस नीतिगत स्वतन्त्रता को गम्भीर रूप से सीमित कर सकता है.

इसलिये, ये नियम तब तक बहुपक्षीय नहीं बनाए जाने चाहियें, जब तक कि विकासशील देश अपने विकास के निहितार्थ को पूरी तरह समझ ना जाएँ.

बहुपक्षवाद की वास्तविक भावना को पुनर्जीवित करना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि व्यापार वैश्वीकरण और राष्ट्र व राज्य एक-दूसरे के मुक़ाबले प्रतिस्पर्धी न बनें, बल्कि पारस्परिक रूप से ख़ुद को सुदृढ़ करें.

 

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