75वाँ सत्र: पुतिन ने कहा, 'इतिहास से मिले सबक को नज़रअन्दाज़' करना अदूरदर्शिता

23 सितम्बर 2020

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को यूएन महासभा के 75वें सत्र में वार्षिक जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से गम्भीर मुद्दों पर सहयोग मज़बूत करने का आहवान किया. साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संगठन ने चार्टर का पालन करते हुए, युद्ध के बाद शान्ति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है. 

उन्होंने यूएन चार्टर के अमूर्त सिद्धान्तों पर चिन्तन-मनन करने का आहवान किया: राष्ट्रों की सम्प्रभु समानता, उनके आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, आमजन का अपना भविष्य निर्धारित करने का अधिकार, बल उपयोग या ताक़त दिखाने से परहेज़, और विवादों का शान्तिपूर्ण समाधान.

रूस के राष्ट्रपति ने पिछले 75 वर्षों की एक समीक्षा पेश करने के अन्दाज़ में कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने सभी कठिनाइयों और भू-राजनैतिक परिवर्तनों के बावजूद शान्ति की रक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देने का "अपना मिशन पूरा किया है."

उन्होंने "संयुक्त राष्ट्र की इस विशाल क्षमता और विशेषज्ञता" को आगे बढ़ाए जाने का एक ठोस आधार माना. साथ ही, उन्होंने कहा कि संगठन को "अपरिवर्तनशील" नहीं होना चाहिये व 21वीं सदी की गतिशीलता के अनुसार विकसित होते रहना चाहिये और इस आधुनिक दुनिया की वास्तविकता के अनुरूप ढलना चाहिये  जो तेज़ी से जटिल, बहुध्रुवीय और बहुआयामी होती जा रही है.

सुरक्षा परिषद वैश्विक शासन की आधारशिला है

व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया कि वैश्विक मामलों की वर्तमान स्थिति से "संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख अंग, सुरक्षा परिषद" प्रभावित हो रहा है. रूस के मुताबिक, परिषद को सभी देशों के हितों के साथ-साथ उनके पदों की विविधता को लेकर भी अधिक समावेशी होना चाहिये,और उसे अपने कार्य में व्यापक तौर पर आम सहमति के सिद्धान्त को शामिल करना चाहिये.

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, इसे वैश्विक शासन की आधारशिला भी बने रहना चाहिये और यह लक्ष्य केवल तभी हासिल किया जा सकता है जब इसके स्थायी सदस्य अपनी वीटो शक्ति बनाए रखें. व्लादिमीर पुतिन के मुताबिक द्वितीय विश्व युद्ध की विजेता पाँच परमाणु शक्तियों का क़ानून ही, "आज तक सैन्य और राजनीतिक सन्तुलन का सूचक रहा है."

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के ज़रिये "उस एकतरफ़ा कार्रवाई को रोकने में मदद मिलती है, जो देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई का कारण बन सकती है." इससे समझौतों के अवसर मिलते हैं या कम से कम उन समाधानों से बचाव होता है, जो अन्य के लिये पूरी तरह से अस्वीकार्य हों. और मनमानी व अवैधता की बजाय "अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के ढाँचे के अन्दर रहकर” काम करने में मदद मिलती है.

उन्होंने कहा कि जिस तरह द्वितीय विश्व युद्ध के कारणों, रास्ते व नतीजों की मनमानी व्याख्या करके, सम्बद्ध राष्ट्रों के सम्मेलन और नूरेमबर्ग ट्राइब्यूनल के फ़ैसले पलटने की कोशिश की गई, ऐसे में इतिहास से मिले सबक भूल जाना "बेहद गैर-ज़िम्मेदाराना रवैया" था.

"ऐसे हालात युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था की नींव के लिये एक सीधा, विनाशकारी झटका है, जो विशेष रूप से उन स्थितियों के लिये बेहद ख़तरनाक है, जहाँ वैश्विक स्थिरता गम्भीर परीक्षणों से गुज़र रही हो और आतंकवाद,संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे ख़तरे बढ़ रहे हों."

कोविड-19 पर रूसी वैक्सीन पर जानकारी

व्लादिमीर पुतिन ने कोविड-19 महामारी के बारे में कहा कि हालाँकि विशेषज्ञों ने अभी तक सामाजिक और आर्थिक आघात का पूरी तरह से आकलन नहीं किया है, यह स्पष्ट है कि विश्व अर्थव्यवस्था की पुनर्बहाली में अभी काफ़ी समय लगेगा. रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "हमें नए अभिनव समाधानों की आवश्यकता होगी,"  और उनके मुताबिक ऐसे समाधान विकसित करने का एकमात्र तरीक़ा है, साथ मिलकर काम करना.

रूसी नेता ने आगे कहा कि महामारी से नैतिक, तकनीकी और मानवीय समस्याओं की एक श्रृँखला उजागर हुई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि संयुक्त राष्ट्र सायबर सुरक्षा और उन्नत डिजिटल तकनीकों के उपयोग के मुद्दों पर बहुत गम्भीरता से चर्चा करेगा. 

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के साथ-साथ, "हमें अब साझेदारी की बाधाओं को भी दूर करना चाहिये," और कोविड-19 से लड़ने के वैश्विक प्रयासों में रूसी संघ "विश्व स्वास्थ्य संगठन की केन्द्रीय समन्वय भूमिका" को ध्यान में रखते हुए सक्रिय योगदान दे रहा था. 

उन्होंने कहा, "रूस आश्वस्त है कि अब वैश्विक औषधि निर्माण उद्योग की सभी क्षमताओं का उपयोग करना बहुत ज़रूरी है ताकि भविष्य में सभी देशों के नागरिकों को टीकाकरण तक पहुँच हासिल हो सके." 

व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि "दुनिया का पहला टीका, “स्पुतनिक-वी” विश्वसनीय, सुरक्षित और प्रभावी साबित हुआ है और रूस इसे अन्य देशों को उपलब्ध कराने के लिये तैयार है."

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों और सभी कार्यालयों को "अपना टीका मुफ़्त देने की भी पेशकश की."

 

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