जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबले में ‘विज्ञान, एकजुटता और समाधानों’ की दरकार

9 सितम्बर 2020

वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसों की सघनता अपने रिकॉर्ड स्तर पर है, कोविड-19 के कारण कार्बन उत्सर्जनों में दर्ज की गई क्षणिक गिरावट के बाद अब उत्सर्जन की मात्रा फिर बढ़ रही है और वैश्विक तापमान में वृद्धि नई ऊँचाइयों को छू रही है. संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को जलवायु परिवर्तन पर एक नई रिपोर्ट पेश की है जिसमें ये तथ्य उभर कर सामने आये हैं. 

‘United in Science 2020’ रिपोर्ट को बुधवार को जारी किया गया जिसमें कोविड-19 की पृष्ठभूमि में जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियरों, महासागरों, प्रकृति, अर्थव्यवस्थाओं और मानवजाति के जीवन पर होने वाले असर पर जानकारी दी गई है. 

इन प्रभावों को अक्सर गर्म हवाएँ चलने, जंगलों में आग लगने, सूखा पड़ने और बाढ़ आने की घटनाओं से महसूस किया जाता है. 

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रिपोर्ट को पेश करने के लिये आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर दुनिया जलवायु परिवर्तन के इन विनाशकारी प्रभावों को पलटना और तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना चाहती है तो फिर देर करने के लिये अब समय नहीं है. 

“चाहे हम महामारी से निपट रहे हों या फिर जलवायु संकट से, यह स्पष्ट है कि हमें विज्ञान, एकजुटता और निर्णायक समाधानों की ज़रूरत है.”

“हमें एक बात चुननी है: पहले की तरह कामकाज जारी रखना, जिससे आपदाएँ और बढ़ेंगी, या फिर हम कोविड-19 से पुनर्बहाली का इस्तेमाल दुनिया को एक टिकाऊ मार्ग पर लाने के वास्तविक अवसर के रूप में कर सकते हैं.”

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जलवायु सम्बन्धी कार्रवाई में कार्रवाई के छह मुख्य बिन्दुओं को पेश किया है जिनका उपयोग कोविड-19 संकट से उबरने की कार्रवाई को आकार दिये जाने में करना होगा. 

उन्होंने कहा कि इससे भावी पीढ़ियों के लिये एक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. 

- स्वच्छ, हरित अर्थव्यवस्थाओं के ज़रिये रोज़गारों और व्यवसायों को सुनिश्चित करना

- सार्वजनिक सहायता को हरित रोज़गारों और टिकाऊ प्रगति पर आधारित बनाना

- कोयला आधारित अर्थव्यवस्था से हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना, समाजों और लोगों को सुदृढ़ बनाना

- सार्वजनिक कोष का उपयोग टिकाऊ सैक्टरों में निवेश और पर्यावरण व जलवायु परियोजनाओं में करना

- सार्वजनिक नीतिनिर्माण, वित्तीय व्यवस्थाओं और बुनियादी ढाँचों में जलवायु जोखिमों और अवसरों को समाहित करना

- अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के तौर पर एक साथ मिलकर काम करना जलवायु परिवर्तन 

जलवायु परिवर्तन: निर्बाध रूप से जारी

रिपोर्ट दर्शाती है कि वायुमण्डल में कार्बन डाय ऑक्साइड (CO2) की सघनता अपने उच्चतम स्तर पर अभी नहीं पहुँची है और लगातार बढ़ने के रिकॉर्ड बना रही है.  

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के ‘Global Atmosphere Watch’ नैटवर्क के मुताबिक वर्ष 2020 के पहले छह महीनों में कार्बन डाय ऑक्साइड की सघनता 410 पार्ट्स प्रति मिलियन से ज़्यादा मापी गई.

जुलाई 2020 में अमेरिका में हवाई के मॉना लोआ और ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया के केप ग्रिम में यह क्रमश: 414.38 पार्ट्स प्रति मिलियन और 410.04 पार्ट्स प्रति मिलियन थी.  

जबकि इन दोनों स्थानों पर सघनता का आँकड़ा पिछले वर्ष क्रमश: 411.74 और 407.83 था.

यूएन मौसम विज्ञान एजेंसी के महासचिव पेटेरी टालस ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में लिखा है कि ग्रीनहाउस गैसों की सघनता 30 लाख वर्षों के इतिहास में अपने सबसे उच्चतम स्तर पर है और लगातार बढ़ रही है. 

वर्ष 2020 की पहली छमाही में साइबेरिया के विस्तृत इलाक़ों में लम्बी अवधि से गर्म हवाओं का अनुभव किया गया है और वर्ष 2016 से 2020 तक सबसे गर्म पाँच सालों के रूप में मापे गये हैं.

यूएन एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि इस वर्ष जीवन के अनेक आयामों में व्यवधान आया है लेकिन जलवायु परिवर्तन बदस्तूर जारी है.  

रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 के कारण हुई तालाबंदी और अन्य पाबंदियों की वजह से कार्बन उत्सर्जन में चार से सात फ़ीसदी की गिरावट होने का अनुमान है. 

अप्रैल 2020 में जब कोविड-19 की वजह से पाबंदियाँ अपने चरम पर थीं तब पिछले वर्ष की तुलना में CO2 उत्सर्जन में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. लेकिन जून महीने में यह घटकर पाँच फ़ीसदी के स्तर पर रह गई.

रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा गया है कि सभी देशों द्वारा अर्थव्यवस्था के विभिन्न सैक्टरों में तत्काल और समन्वित प्रयासों के ज़रिये जलवायु परिवर्तन की दिशा को बदला जा सकता है. 

‘United in Science 2020’ रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान संस्था (WMO) ने ‘ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट’, जलवायु परिवर्तन पर अन्तर-सरकारी पैनल (IPCC), यूनेस्को, यूएन पर्यावरण संस्था और ब्रिटेन के मौसम विभाग की मदद से तैयार किया है.

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