स्वच्छ, कुशल ऊर्जा में भारत की अहम भूमिका

कोयले पर दक्षिण अफ्रीका की निर्भरता साफ़ नज़र आती है. कोयला खदान प्रक्रिया के कारण पानी सिंचाई, उद्योग और पीने के योग्य नहीं बचता. पानी केवल गन्दा नहीं, बल्कि ज़हरीला हो गया है.
UN Photo/Gill Fickling
कोयले पर दक्षिण अफ्रीका की निर्भरता साफ़ नज़र आती है. कोयला खदान प्रक्रिया के कारण पानी सिंचाई, उद्योग और पीने के योग्य नहीं बचता. पानी केवल गन्दा नहीं, बल्कि ज़हरीला हो गया है.

स्वच्छ, कुशल ऊर्जा में भारत की अहम भूमिका

जलवायु और पर्यावरण

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को 19वें दरबारी सेठ स्मारक व्याख्यान को सम्बोधित किया. ये व्याख्यान ऊर्जा व शोधन संस्थान (टैरी) भारत, ने अपने संस्थापक और जलवायु कार्रवाई के प्रणेता, दरबारी सेठ के सम्मान में आयोजित किया था. इस व्याख्यान में महासचिव ने कोविड-19 पुनर्बहाली में जलवायु कार्रवाई को प्रमुखता देते हुए ज़ोर देकर कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाकर अपनी दो शीर्ष प्राथमिकताएँ प्राप्त कर सकता है - ग़रीबी उन्मूलन और ऊर्जा की सार्वभौमिक पहुँच की गारण्टी. उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन की बजाय अक्षय ऊर्जा में निवेश करने से तीन गुना अधिक रोज़गार उत्पन्न हो सकते हैं.