कोविड-19: टिकाऊ पुनर्बहाली के लिए निडर व सृजनशील समाधानों की ज़रूरत

1 जुलाई 2020

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सचेत किया है कि अगर दुनिया ने विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ असरदार कार्रवाई अभी नहीं की तो फिर इस बीमारी और उससे उपजने वाली मन्दी अनेक वर्षों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था के बढ़ने की रफ़्तार में व्यवधान का सबब बन जाएगी. कोरोनावायरस संकट से बेहतर ढँग से निपटने  और पुनर्बहाली के रास्तों की तलाश करने के लिए बुधवार को गोलमेज़ चर्चा शुरू हुई है जिसके पहले सत्र में महासचिव ने विश्व को उबारने के लिए साहसिक और सृजनात्मक समाधानों की अहमियत को रेखांकित किया है.

यूएन प्रमुख ने महिला अर्थशास्त्रियों के साथ बातचीत में मौजूदा हालत की एक निराशाजनक तस्वीर पेश करते हुए कहा कि चरम ग़रीबी और भुखमरी में व्यापक बढ़ोत्तरी की आशंका है.

“अनेक स्वास्थ्य प्रणालियाँ ध्वस्त होने के कगार पर हैं और बच्चों की एक पूरी पीढ़ी शिक्षा से वंचित है.”

उन्होंने आगाह किया कि यह महामारी ना सिर्फ़ टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा पर प्रगति को रोकती है बल्कि पहले से हुई प्रगति की दिशा के उलटने का भी ख़तरा है.

यूएन महासचिव ने हाल ही में सरकारों से एक राहत पैकेज का आहवान किया था जिसका आकार उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था का कम से कम 10 फ़ीसदी सुझाया था. 

इस पृष्ठभूमि में उन्होंने बताया कि उनकी जमाइका और कैनेडा के प्रधानमन्त्रियों से मुलाक़ात हुई है जो टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय संसाधनों पर गठित समूह (Group of Friends of Financing Sustainable Development) का नेतृत्व करते हैं.

उनका प्रयास इस संकट से उबरने के लिए वित्तीय संसाधनों का इन्तेज़ाम करना और पुनर्बहाली के लिए रास्ता तैयार करना है.

50 से ज़्यादा राष्ट्राध्यक्ष और सरकारें आगे बढ़कर एक साझा प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं जिनमें यूएन एजेंसियाँ, वित्तीय संस्थान, निजी क्षेत्र में उदारता और अन्य पक्षकार शामिल हैं ताकि वैश्विक नक़दी, क़र्ज़ चुनौतियों, ग़ैरक़ानूनी वित्तीय लेनदेन जैसी समस्याओं से निपटा जा सके. 

उन्होंने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों में सार्वजनिक व्यय की माँग एक ऐसे समय में बढ़ रही है जब टैक्स, निर्यात, धन-प्रेषण से प्राप्त होने वाले राजस्व मे गिरावट दर्ज की जा रही है. 

UN Photo/Eskinder Debebe
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश वर्चुअल राउंडटेबल मीटिंग को सम्बोधित करते हुए.

क़र्ज़ संकट

महासचिव ने आगाह किया है कि दुनिया एक व्यापक क़र्ज़ संकट के मुहाने पर खड़ी है और अनेक देश एक बेहद मुश्किल स्थिति का सामना कर रहे हैं – क़र्ज़ की क़िस्तें चुकाएँ या फिर महामारी से लड़ें और निर्बल समुदायों की रक्षा करें. 

उन्होंने बताया कि क़र्ज़ की अदायगी ना होने के विनाशकारी सामाजिक नतीजे हो सकते हैं लेकिन अनेक देशों की वित्तीय बाज़ारों तक पहुँच नहीं है जो क़िस्तें चुकाने में  उनकी मदद कर सकें. 

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विकसित देश भी कोरोनावायरस संकट का सामना कर रहे हैं और इस वजह से उनकी ओर से अन्य देशों को दी जाने वाली विकास सहायता पर भी दबाव बढ़ रहा है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महामारी से उबरने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए क़र्ज़ का एक स्थाई समाधान ढूँढना होगा ताकि निवेश के लिए जगह बनाई जा सके.

उन्होंने सचेत किया कि अनिश्चितता, संरक्षणवाद और अन्तर्मुखी नीतियों से बाहर से प्राप्त होने वाले वित्तीय संसाधनों में गिरावट दर्ज होने का दौर लम्बा खिंच सकता है. 

साथ ही महामारी के कारण सप्लाई चेन व व्यापार भी बाधित हुए हैं और यह भी आशंका है कि विनिर्माण सम्बन्धी रोज़गारों को वापिस विकसित देशों में लाया जा सकता है. इससे विकासशील देशों के संसाधनों पर असर पड़ेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकृत होने के उनके प्रयासों को झटका लगेगा.  

“इन सवालों के लिए निडर और सृजनशील जवाबों की आवश्यकता है.”

उन्होंने कहा कि इसके लिए विशिष्ट और नवप्रवर्तनशील महिला अर्थशास्त्रियों की अन्तदृष्टि और परिप्रेक्ष्य की ज़रूरत होगी ताकि समावेशी, सुदृढ़ और लैंगिक रूप से समान समाजों का निर्माण किया जा सके. इससे जलवायु संकट और अन्य वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी.

 

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