शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का आहवान

28 मई 2020

‘अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस’ के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के उन सभी शान्तिरक्षकों को सम्मान के साथ याद किया जा रहा है जिन्होंने वर्ष 1948 से विश्व शान्ति व सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है. इस वर्ष यूएन शान्तिरक्षक दिवस पर शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस अवसर पर जारी अपने सन्देश में कहा कि हम अब तक संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों के रूप में सेवाएँ प्रदान करने वाले दस लाख से ज़्यादा पुरुषों व महिलाओं और कर्तव्य की राह में अपनी जान देने वाले तीन हज़ार 900 शान्तिरक्षकों का सम्मान करते हैं ”

इस दिवस पर  2019 के दौरान अपनी ज़िन्दगी क़ुर्बान करने वाले 83 सैन्य, पुलिस और असैनिक शान्तिरक्षकों को मरणोपरान्त ‘डाग हामरशॉल्ड मेडल’ से सम्मानित किया जा रहा है.

यूएन महासचिव के सन्देश में 95 हज़ार से अधिक उन असैनिक, पुलिस और सैन्यकर्मियों का भी आभार जताया गया है जो फ़िलहाल दुनिया के अनेक देशों में तैनात हैं.

उन्होंने कहा कि वे सभी एक विकराल चुनौती का सामना कर रहे हैं: शान्ति और सुरक्षा बनाए रखने की ज़िम्मेदारी का निर्वहन करते समय कोविड-19 महामारी से निपटने में देशों की मदद करना.

इस वर्ष की थीम ‘शान्तिरक्षा में महिलाओं की भूमिका’ है और इसके ज़रिए यूएन मिशनों में उनकी केन्द्रीय भूमिका को रेखांकित किया जा रहा है.

यूएन प्रमुख ने बताया कि महिलाएँ जिन समुदायों में सेवारत होती हैं अक्सर वहाँ उनकी पहुँच ज़्यादा होती है और इससे आम लोगों की रक्षा करने, मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और मिशन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.

इसके बावजूद फ़ील्ड मिशनों के सैन्य, पुलिस, न्यायिक और सुधार कर्मियों के दलों में महिलाओं को महज़ छह फ़ीसदी प्रतिनिधित्व ही हासिल है.

वर्ष 2019 के ‘यूएन मिलिट्री जैन्डर एडवोकेट ऑफ़ द ईयर' अवॉर्ड से ब्राज़ील और भारत की दो महिला शान्तिरक्षकों को भी सम्मानित किया जा रहा है. यह पहली बार है जब ये पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया जा रहा है.

ब्राज़ील की नौसैनिक अधिकारी कमान्डर कार्ला मोन्तिएरो डे कास्त्रो अराउजो मध्य अफ़्रीका गणराज्य में यूएन मिशन (MINUSCA) में कार्यरत हैं और भारतीय सेना में मेजर सुमन गवानी दक्षिण सूडान के यूएन मिशन (UNMISS) में सैन्य पर्यवेक्षक के तौर पर ज़िम्मेदारी सम्भाल चुकी हैं.

इस पुरस्कार की शुरुआत 2016 में हुई जिसका उद्देश्य महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा मामलों पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1325 के सिद्धान्तों को बढ़ावा देने के प्रयासों को सम्मानित किया जाता है.

यूएन प्रमुख ने कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 को पारित हुए 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं और यह अवसर शान्ति व सुरक्षा से जुड़े हर क्षेत्र में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयासों की ज़रूरत पर ध्यान दिलाता है.

शान्ति अभियानों के लिए यूएन में अवर महासचिव ज्याँ-पियर लाकोआ ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पैदा हुए अवरोधों के बावजूद शान्तिरक्षक अपना ज़रूरी कार्य जारी रखे हुए हैं और इन शान्ति अभियानों और राजनैतिक प्रक्रियाओं में महिलाओं की अर्थपूर्ण, समान और पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी.

उनके मुताबिक आम नागरिकों को सुरक्षा मुहैया कराने और स्थाई शान्ति के निर्माण में उनकी अहम भूमिका है.  

“जो महिलाएँ शान्ति अभियानों में सेवाएँ प्रदान करती हैं वे समुदायों को कोविड-19 से मुक़ाबले में मदद देने में ज़रूरी भूमिका निभाती हैं. उन्हें सभी अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर जवाबी कार्रवाई का केन्द्रीय हिस्सा होना होगा.”

 

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ब्राज़ील और भारत की महिला शान्तिरक्षकों को साझा रूप से पुरस्कार

लैंगिक समानता पर उत्कृष्ट कार्य के लिए भारतीय और ब्राज़ीलियाई महिला शान्तिरक्षकों को वर्ष 2019 के लिए संयुक्त रूप से 'यूएन मिलिट्री जैन्डर एडवोकेट ऑफ़ द ईयर' अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है. ब्राज़ील की नौसैनिक अधिकारी कमान्डर कार्ला मोन्तिएरो डे कास्त्रो अराउजो मध्य अफ़्रीका गणराज्य में यूएन मिशन (MINUSCA) में कार्यरत हैं और भारतीय सेना में मेजर सुमन गवानी दक्षिण सूडान के यूएन मिशन (UNMISS) में सैन्य पर्यवेक्षक के तौर पर ज़िम्मेदारी संभाल चुकी हैं.