मध्य अफ्रीकी गणराज्य पर लगा शस्त्र प्रतिबंध जुलाई तक बढ़ा

31 जनवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को मध्य अफ्रीकी गणराज्य के विरुद्ध शस्त्र प्रतिबंधों की अवधि बढ़ा दी है, साथ ही इस देश के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को लागू करने में मदद करने वाले विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल भी बढ़ा दिया गया है.

सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 ने इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया. चीन और रूस मतदान से अनुपस्थित रहे.

ये प्रस्ताव मध्य अफ्रीकी गणराज्य को हथियारों व गोलाबारूद और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति, बिक्री या स्थानान्तरण पर पाबंदी लगाता है. इस पाबंदी में सैन्य श्रेणी के वाहन भी शामिल हैं.

मध्य अफ्रीकी गणराज्य में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा मिशन – MINUSCA और ट्रेनिंग मिशन पर तैनात योरोपीय व फ्रेंच बल इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर हैं.

फ़रवरी 2019 में मध्य अफ्रीकी गणराज्य की सरकार व 14 सशस्त्र गुटों के बीच शांति समझौते पर दस्तख़त किए गए थे, इसके बावजूद वहाँ हिंसा व असुरक्षा के हालात भी ख़त्म नहीं हुए हैं.

सुरक्षा परिषद में ये प्रस्ताव फ्रांस ने पेश किया था और इसके पारित हो जाने के बाद अब इस देश पर शस्त्र प्रतिबंध जुलाई 2020 तक लागू बढ़ गया है. इस प्रतिबंध को लागू करने में मदद करने वाली विशेषज्ञ समिति का कार्यकाल भी अगस्त 2020 तक बढ़ा दिया गया है.

फ्रांस की राजदूत ऐन गेग्याँ ने पश्चिमी अफ्रीकी देश को समर्थन पर ज़ोर देते हुए कहा, “अस्थिर सुरक्षा हालात के मद्देनज़र हमारे लिए एक ज़िम्मेदार रुख़ अपनाना बहुत महत्वपूर्ण है. साथ ही हम सुरक्षा क्षेत्र में सुधार और निरस्त्रीकरण की दिशा में मध्य अफ्रीकी गणराज्य की मदद सुनिश्चित करें.”  

उन्होंने कहा कि सशस्त्र गुटों पूर्व सदस्यों को निरस्त्र करने, उन्हें सशस्त्र गतिविधियों से मुक्त करने और उनका पुनर्वास करने के मामले में भी मध्य अफ्रीकी गणराज्य की मदद की जाए. साथ ही हथियारों और गोला-बारूद का प्रबंधन करने में भी सहायता की जाए.

“देश में टिकाऊ शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ये बिन्दु बहुत अहम हैं.”

चीन ने मतदान से बाहर रहने के अपने निर्णय के बारे में बताते हुए कहा कि ये प्रस्ताव मध्य अफ्रीकी गणराज्य की सरकार की इच्छाओं का पूरी तरह सम्मान नहीं करता.

चीन के उप राजदूत वू हाइताओ ने देश में राजनैतिक व सुरक्षा हालात में आई बेहतरी का ज़िक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद को हथियारों पर लगे प्रतिबंध हटा लेने चाहिए ताकि वहाँ की सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा व हालात बेहतर करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने का मौक़ा मिले.

“ऐसा होने से मध्य अफ्रीकी गणराज्य के मुद्दे का एक राजनैतिक समाधान निकालने में मदद मिलेगी.”

रूस के उप राजदूत दिमित्री पोलयैंस्की ने कहा कि रूस ने इस आधार पर इस प्रस्ताव पर हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया कि इसके मसौदे में सभी तर्कों पर विचार नहीं किया गया.

उन्होंने मध्य अफ्रीकी गणराज्य पर लगे हथियार प्रतिबंधों को देश की राष्ट्रीय सेनाओं को फिर से सशस्त्र बनाने में बहुत बड़ी बाधा है, जबकि सशस्त्र गुटों के सामने इस तरह की कोई बाधा मौजूद नहीं हैं और अगर वो चाहें तो तस्करी के ज़रिए हथियार प्राप्त कर सकते हैं.

उप राजदूत ने हथियारबंद गुटों को शांति प्रक्रिया में बाधक भी क़रार दिया.

 

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