हथियारों की बेरोक-टोक आपूर्ति और उपलब्धता से होती हैं लाखों मौतें

5 फ़रवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण प्रमुख इज़ूमी नाकामीत्सू ने कहा है कि दुनिया भर में साल 2010 से 2015 के बीच हिंसक कारणों से जितनी मौतें हुईं उनमें से लगतभग 50 फ़ीसदी मौतों के लिए छोटे हथियारों का इस्तेमाल हुआ. नाकामीत्सू ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि दुनिया भर में हर साल दो लाख से भी ज़्यादा लोगों की मौत हिंसक कारणों से हो जाती है.

एक अरब छोटे हथियार

अवर महासचिव और निरस्त्रीकरण मामलों के लिए उच्च प्रतिनिधि इज़ूमी नाकामीत्सू ने बताया कि दुनिया भर में इस समय एक अरब से भी ज़्यादा छोटे हथियार प्रचलन में हैं.

UN Photo/Eskinder Debebe
निरस्त्रीकरण मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव व उच्च प्रतिनिधि - इज़ूमी नाकामीत्सू (फ़ाइल)

और इन हथियारों का प्रमुख इस्तेमाल गंभीर हिंसक गतिविधियों के लिए अमेरिका से लेकर अफ्रीका और दक्षिणी योरोप तक प्रचलित है.

“सुरक्षा परिषद ने अतीत या वर्तमान के जिन संकटों को सुलझाने की कोशिश की है, वो सभी मुद्दे छोटे और हल्के हथियारों और उनकी जानलेवा गोलियों की आसान उपलब्धता और अनियंत्रित आपूर्ति के कारण और भी ज़्यादा गंभीर बने.”

छोटे हथियार यूएन शांतिरक्षा अभियानों व राजनैतिक मिशनों के लिए भी चुनौती पैदा करते हैं.

नौ मिशनों को परंपरागत हथियारों से निपटने का भी मैंडेट दिया गया है जिनमें छोटे और हल्के हथियारों पर नियंत्रण करना भी शामिल है.

निरस्त्रीकरण प्रमुख ने चेतावनी के अंदाज़ में कहा कि छोटे शस्त्रों की अवैध उपलब्धता के कारण भी बहुत गंभीर परिणाम हो रहे हैं.

इन गंभीर परिणामों का ख़ामियाज़ा अफ्रीकी सहेल क्षेत्र और मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्सों में हिंसक चरमपंथ के रूप में सामने है.

युद्धग्रस्त लीबिया और दक्षिण सूडान में भी छोटे हथियारों की आसान उपलब्धता गंभीर चिंता का मुद्दा है. इन दोनों ही देशों में हथियारों और गोली-बारूद की अबाधित आपूर्ति हो रही है.

नकारात्मक प्रभाव

निरस्त्रीकरण प्रमुख इज़ूमी नाकामीत्सू का कहना था कि अवैध छोटे व हल्के हथियारों का संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के बुनियादी स्तंभों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

इनमें सुरक्षा सुनिश्चित करने और संघर्षों की रोकथाम से लेकर मानवाधिकारों की रक्षा, टिकाऊ विकास और लिंग समानता जैसे मुद्दे शामिल हैं.

मानवाधिकारों के उल्लंघन के बहुत बड़े दायरे के लिए छोटे व हल्के हथियारों का इस्तेमाल ही ज़िम्मेदार है. इनमें बच्चों की हत्याएँ और उनका विकलांग बनना, बलात्कार और यौन व लिंग आधारित अन्य तरह की हिंसक गतिविधियाँ शामिल हैं.

लोगों को विस्थापन व खाद्य असुरक्षा जैसी परिस्थितियों के लिए भी मजबूर करने में छोटे हथियारों की एक बड़ी भूमिका होती है.

इनमें दुनिया का सबसे गंभीर मानवीय संकट यमन भी इसी का एक उदाहरण है. यमन में 2019 के अंत तक क़रीब 40 लाख लोग देश के भीतर ही विस्थापित थे.

UNMISS/Isaac Billy
प्रथम कमेटी दुनिया भर में हथियारों से छुटकारा पाने के मुद्दे पर भी विचार करती है और निरस्त्रिकरण संधियों के लिए माहौल तैयार करती है.

इस संकट की आग को हवा देने में छोटे हथियारों की अबाधित व अनियंत्रित आपूर्ति की भी बड़ी भूमिका है.

शस्त्र आपूर्ति को रोकना होगा

यूएन की निरस्त्रीकरण प्रमुख इज़ूमी नाकामीत्सू ने बताया कि छोटे व हल्के हथियारों पर नियंत्रण करने के प्रयासों में मदद देने के लिए वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर अनेक उपाय किए जा रहे हैं.

ख़ासतौर से, सीमा पार से इन हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए क्षेत्रीय प्रयास बहुत अहम हैं.

अफ्रीका को संघर्ष मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र अफ्रीकी यूनियन की मदद कर रहा है. इन प्रयासों के तहत ‘अफ्रीका एमनेस्टी महीना’ जैसी पहल शुरू की गई है.

इस पहल के तहत प्रस्ताव किया गया है अवैध रूप से इकट्ठा किए गए हथियारों के समर्पण, एकत्रिकरण व उन्हें नष्ट करने का काम किया जाएगा. ऐसी ही एक पहल सितंबर 2020 में होनी है.

इज़ूमी नाकामीत्सू ने कहा कि सुरक्षा परिषद जिन मुद्दों पर काम करती है, उन सभी में छोटे व हल्के हथियारों का इस्तेमाल भी प्रमुख है जबकि ये हथियार आसानी से और हर जगह उपलब्ध हो जाते हैं.

उन्होंने कहा कि इसी कारण से इस समस्या को उच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए और हथियारों की अवैध आपूर्ति की जड़ पर चोट करने के लिए तात्कालिकता के साथ कार्रवाई होनी चाहिए.  

 

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