कॉप-25: वार्ताओं में प्रगति, जलवायु महत्वाकांक्षाओं पर निराशा

15 दिसम्बर 2019

कॉप-25 में चल रही वार्ताएं अंततः रविवार को समाप्त हो गईं. इनमें निजी क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय सरकारों के स्तर पर ख़ासी प्रगति हुई है. अलबत्ता, जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वाकाँक्षाएँ बढ़ाने के मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं हो सकी जिस पर बड़े पैमाने पर निराशा का माहौल भी देखा गया.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अपनी भावनाएँ ट्विटर के ज़रिए अभियक्त कीं जिनमें उन्होंने भी कुछ निराशा व्यक्त की मगर उन्होंने पूरे सम्मेलन को एक नाकामी मानने से भी इनकार किया है.

ट्विटर पर अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि वो 2020 को एक ऐसे वर्ष के रूप में देखने के लिए पहले से भी ज़्यादा संकल्पबद्ध हैं जब तमाम देश विज्ञान की बात मानकर ज़रूरी कार्रवाई करने के लिए तैयार होंगे. 

“...इनमें वर्ष 2050 में कार्बन शून्यता की स्थिति यानी कार्बन न्यूट्रैलिटी का मुक़ाम हासिल करना और तापमान वृद्धि को 1.5 डग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य शामिल होंगे.” 

स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हुआ ये सम्मेलन कॉप-25 शुक्रवार को समाप्त होना था और तब तक वार्ताकारों ने अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर कुछ समझौते हो गए थे.

इनमें क्षमता निर्माण, लिंग आधारित कार्यक्रम और प्रोद्योगिकी जैसे मुद्दे शामिल थे. मगर मानव द्वारा पैदा की गई जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुक़सान और उनसे निपटने के उपायों के लिए धन की व्यवस्था करने जैसे विवादास्पद मुद्दों के बारे में व्यापक नज़रिए पर कोई सहमति नहीं हो पाई थी.

बहरहाल, कॉप-25 के अध्यक्ष के अनुरोध पर शुक्रवार रात को भी थकावट भरी वार्ताएँ जारी रहीं, लेकिन वार्ताओं के नतीजों का एक ड्राफ़्ट शनिवार सुबह जारी किया गया.

मगर उस ड्राफ़्ट पर तमाम वार्ताकारों, ग़ैर-सरकारी संगठनों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने कोई गर्मजोशी नहीं दिखाई. उस मसौदे को अस्वीकार्य क़रार देते हुए उनका ये भी कहना था कि ये ड्राफ़्ट 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के तहत किए गए संकल्पों के साथ भी धोखा है.

शनिवार को स्थानीय समय के अनुसार अपराहन 3 बजे कॉप-25 के आयोजकों ने एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित किया जिसमें बताया गया कि वार्ताएँ उस समय भी जारी थीं और दुनिया को ये दिखाने की कोशिश की जा रही थी कि बहुपक्षवाद असरदार है और अब भी नतीजे दिए जा सकते हैं.

लेकिन शनिवार शाम तक समझौते के कोई आसार नज़र नहीं आए, जिसके बाद 16 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने ये तक घोषणा कर डाली कि ऐसा नज़र आ रहा है कि मैड्रिड में कॉप-25 बिखर रहा है. “विज्ञान तो स्पष्ट है मगर विज्ञान की अनदेखी की जा रही है.”

हर स्तर पर बेहतर संकल्प

निष्कर्ष दस्तावेज़ की सामग्री पर कुछ निराशाएँ जताए जाने के बावजूद दो दिन तक चले इस सम्मेलन में अनेक घोषणाएँ भी हुईं जिनसे प्रगति नज़र आती है. उदाहरण स्वपूर यूरोपीय संघ ने वर्ष 2050 तक कार्बन शून्यता की स्थिति लाने के लिए संकल्प व्यक्त किया.  

73 अन्य देशों ने ऐलान किया कि वो जलवायु कार्रवाई के लिए बेहतर योजना पेश करेंगे. इन्हें Nationally Determined Contributions यानी राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए गए योगदान भी कहा जाता है.

स्वच्छ अर्थव्यवस्था के लिए भी क्षेत्रीय और स्थानीय स्तरों पर काफ़ी उत्साह नज़र आया. 14 क्षेत्र, 398 शहर, 786 व्यवसाय और 16 निवेशक वर्ष 2050 तक कार्बन उत्सर्जन में नैट ज़ीरो स्थिति हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं.

कॉप-25 में हुए विचार विमर्श में जलवायु संकट के पीछे के विज्ञान को समझने व तात्कालिकता की अनिवार्यता को उजागर करने पर केंद्रित थे. यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट, जो निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करता है, उसने बताया है कि दुनिया भर की 177 कंपनियों ने अब विज्ञान पर आधारित जलवायु लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सहमति दे दी है.

इनमें तापमान वृद्धि को 2050 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना भी शामिल है. ये संख्या जलवायु कार्रवाई सम्मेलन में ये संकल्प व्यक्त करने वाली कंपनियों से लगभग दो गुना ज़्यादा है.

शुक्रवार को मैड्रिड में स्कॉटिश बैगपाइप्स की धुन ने भी कॉप-25 को कुछ संगीतमय करने का मौहाल बनाया क्योंकि अगला जलवायु सम्मेलन कॉप-26 स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में दिंसंबर में होगा.   

उस सम्मेलन को पहले से ही जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ संघर्ष में बहुत महत्वपूर्ण पड़ाव कहा जा रहा है क्योंकि देशों से अपेक्षा की जा रही है कि वो बेहतर राष्ट्रीय कार्रवाई योजनाएँ पेश करेंगे. इन योजनाओं के 2015 में हुए पेरिस जलवायु सम्मेलन में किए गए संकल्पों से ज़्यादा महत्वाकांक्षी होने की उम्मीद की जा रही है.

 

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