कॉप-25: महत्वाकांक्षा भरा संदेश देने की पुकार

13 दिसम्बर 2019

स्पेन के मैड्रिड शहर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) के अंतिम दिन शुक्रवार को देशों के प्रतिनिधिमंडल देर रात तक पारस्परिक सहमति को अंतिम रूप देने के प्रयासों मे जुटे थे. यूएन प्रमुख ने अपने संदेश में सभी देशों से ज़्यादा महत्वाकांक्षी होने और विज्ञान पर आधारित मज़बूत कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है.

”मैड्रिड में कॉप-25 बैठक का आज आख़िरी दिन है और मैं सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से अपील करता हूं कि वो दुनिया को महत्वाकांक्षा का संदेश दें.”

उन्होंने कहा कि जलवायु लक्ष्यों को विज्ञान के अनुरूप बनाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा ना हो.

यूएन प्रमुख ने स्पष्टता से कहा कि वर्ष 2015 में हुए पेरिस समझौते के तहत नियमों को लागू करने के लिए समझौते की भावना ज़रूरी है.

इस समझौते का लक्ष्य गर्माती दुनिया को जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से बचाना है और इस पर अब तक 193 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं.

योरोपीय संघ ने शुक्रवार को वर्ष 2050 तक नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य करने का संकल्प लिया है जिसके लिए महासचिव गुटेरेश ने बधाई देते हुए कहा कि अब जलवायु कार्रवाई के इस उदाहरण का अनुसरण बाक़ी दुनिया में भी किया जाना चाहिए.

28 सदस्य देशों वाले ब्लॉक में सिर्फ़ पोलैंड ही ऐसा देश है जिसने इस संकल्प पर सहमति नहीं दी है.

यूएन प्रमुख के प्रवक्ता के अनुसार जलवायु सम्मेलन में महासचिव निरंतर विभिन्न पक्षों से बातचीत कर रहे हैं. सहमति बनाने की कोशिशें शुक्रवार रात को भी चल रही थीं और यह शनिवार तक भी जारी रह सकती हैं.

'हम पर टिकी हैं सबकी निग़ाहें'

सम्मेलन के समाप्त होने से पहले 193 सदस्य देशों में आम सहमति का होना ज़रूरी है.

कॉप-25 सम्मेलन की अध्यक्षता चिली के पास है और इसके संयोजन की ज़िम्मेदारी संभाल रहे आंद्रेस लान्देरैचे ने बताया कि “लोगों की नज़रें हम पर टिकी हैं.”

उन्होंने माना कि वार्ता हमेशा मुश्किलों से भरी होती है और कहा कि “हमारी प्राथमिकता हमेशा महत्वाकांक्षा, कार्बन उत्सर्जन घटाने के प्रयास और अनुकूलन है.”

ऐसी ख़बरें मिली हैं कि  शुक्रवार देर रात तक वार्ता वित्तीय संसाधन जुटाने के मुद्दे पर अटकी हुई थी.

कुछ समूहों ने जलवायु कार्रवाई योजनाओं पर आगे बढ़ने के लिए वित्तीय संसाधनों की मांग की है. इनमें तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के लिए मदद शामिल हैं.

आंद्रेस लान्देरैचे ने ज़ोर देकर कहा कि फ़्रेमवर्क तैयार करने में सरकारों की भूमिका है लेकिन सांस्कृतिक बदलाव भी लाना होगा जिसमें हर कोई यह बुनियादी सवाल पूछे: अपना कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए मैं क्या कर रहा हूं? क्योंकि हर किसी को इस मुहिम में शामिल होना होगा.

उन्होंने पत्रकारों को बताया कि बातचीत के इस दौर में माहौल सामान्य आशावाद का है और अंतिम मसौदे पर हुई प्रगति पर ख़ुशी हैं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि इसकी परिणति एक अच्छे परिणाम के रूप में सामने आ सकती है.

अब तक 73 राष्ट्रों ने अपने जलवायु कार्रवाई संकल्पों को और ज़्यादा मज़बूत बनाने की मंशा ज़ाहिर की है.

साथ ही 14 क्षेत्रों, 398 शहरों, 786 व्यवसायों और 16 निवेशकों ने कहा है कि वे वर्ष 2050 तक नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

यह स्पष्टता से दर्शाता है कि सरकारी और ग़ैरसरकारी स्तरों पर जलवायु आपात स्थिति से निपटने की अहमियत और सख़्त ज़रूरत को पहचाना जा रहा है.

177 कंपनियों ने कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने का संकल्प लिया है ताकि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचा सके.

सितंबर 2019 में यूएन मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में संकल्प लेने वाली कंपनियों की तुलना में यह संख्या अब दोगुनी हो गई है.  

 

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