म्यांमार में बाढ़ से हज़ारों लोग विस्थापन को मजबूर

13 अगस्त 2019

म्यांमार में कई हफ़्तों से मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की वजह से लोगों को बड़े पैमाने पर जान-माल का नुक़सान उठाना पड़ रहा है. शुक्रवार को मोन प्रांत की पाउंग टाउनशिप में भूस्खलन होने से 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई और अनेक अब भी लापता हैं. 80 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने सुरक्षित जगहों पर शरण ली हुई है.

काचीन और राखीन सहित कुछ अन्य प्रांतों में बाढ़ का पानी घटने के बाद लोगों ने घर लौटना शुरू किया है लेकिन अब भी तेज़ बारिश हो रही है जिससे नदियां उफ़ान पर बह रही हैं.

मोन प्रांत में बाढ़ की वजह से काफ़ी नुक़सान हुआ है और 26 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं. बागो क्षेत्र में भी बाढ़ के कारण 20 हज़ार से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं.  

मौसम वैज्ञानिकों ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में और ज़्यादा बारिश हो सकती है जिससे फिर से बाढ़ होने का ख़तरा मंडरा रहा है.

म्यांमार के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार जून में बाढ़ शुरू होने के बाद से अब तक डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं.

किसी प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे पहले स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचते हैं.

कुछ लोग चावल और अन्य सामग्री साथ लाते है और बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव मदद प्रदान करते हैं.

उनके अलावा म्यांमार सरकार में कई विभाग – अग्निशमन सेवा, स्थानीय प्रशासन और सेना – चर्चों, रेड क्रॉस, मठों, नागरिक संगठनों और निजी क्षेत्र के साथ साथ मिलकर स्थिति में सुधार लाने और प्रभावितों को राहत पहुंचाने के काम में जुटे हैं.

बाढ़ प्रभावित इलाक़ों को खाली कराते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की गई है जहां उन्हें भोजन, धन, गद्दे, कंबल और अन्य ज़रूरी सामान वितरित किए जा रहे हैं.

राहत और बचाव कार्य में म्यांमार सरकार को अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता समुदाय से भी मदद मिल रही है.

बाढ़ पीड़ितों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) जल भंडारण के लिए उपकरण, पानी को पीने योग्य बनाने की किट और अन्य सामग्री उपलब्ध करा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोबाइल क्लीनिक बनाए हैं और आपात स्थिति से निपटने के लिए ज़रूरी स्वास्थ्य सामग्री का वितरण किया जा रहा है.

प्रभावितों के लिए भोजन का इंतज़ाम करने में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई जगहों से मदद मिल रही है.

इसके अलावा विश्व खाद्य संगठन (WFP) भी ऊर्जा प्रदान करने वाली सामग्री बांट रहा है, विशेषकर उन स्थानों पर जहां खाना बनाने के लिए ज़रूरी बर्तनों का अभाव है.

 

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