साहेल क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा सबका 'साझा दायित्व'

16 मई 2019

अफ़्रीका के साहेल क्षेत्र में स्थिरता लाने के उद्देश्य से गठित सुरक्षा बल के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक है कि उसे और सहायता प्रदान की जाए. संयुक्त राष्ट्र में शांतिरक्षा अभियानों से जुड़ी वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि साहेल क्षेत्र जिन चुनौतियों से जूझ रहा है उनके निपटारे के लिए राजनीतिक और आर्थिक समाधानों को तलाशना अहम है. 

अफ़्रीकी संघ के सुझाव और सुरक्षा परिषद से समर्थन के बाद पांच साल पहले संयुक्त बल का गठन हुआ जिसे जी5-साहेल नाम दिया गया. इसमें हिस्सा लेने वाले देशों में बुर्किना फ़ासो, माली, मॉरिटेनिया, नाइजर और चाड शामिल हैं.

जी5-साहेल के ज़रिए क्षेत्र में हथियारबंद गुटों से मुक़ाबले में समन्वयन बेहतर करने और आर्थिक विकास और सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाना है. 

अफ़्रीका के लिए संयुक्त राष्ट्र सहायक महासचिव बिन्टु केटा ने सुरक्षा परिषद को बताया कि “जून में मुख्यालय पर भीषण आतंकी हमले के बाद से जी5-साहेल ने संयुक्त बल के संचालन के लिए और कदम उठाए हैं.“

उन्होंने ध्यान दिलाया कि साहेल के लिए हमारा साझा दायित्व बनता है और अपने वादों को पूरा करना होगा ताकि साहेल क्षेत्र में लोगों को ज़रूरी राहत प्रदान की जा सके.

जी5-साहेल ज्वाइंट फ़ोर्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र जी5-साहेल संयुक्त बल को संचालन के लिए समर्थन देना जारी रखे हुए है. “संयुक्त बल के समर्थन ने माली में संयुक्त राष्ट्र मिशन (MINUSMA) ने जो प्रयास किए हैं मैं उनकी सराहना करती हूं.”

हालांकि उनका कहना था कि कई वजहों से संयुक्त बल सीमित होकर रह गया है. पहले तो संयुक्त बल के पूरी तरह संचालित होने में जनवरी तक व्यवधान रहा और प्रस्ताव 2391 के चलते भी असर पड़ा है. माली में यूएन मिशन से मिलने वाले समर्थन पर भौगोलिक पाबंदियां हैं जिसकी वजह से माली से बाहर तैनात संयुक्त बल की पांच बटालियन को समर्थन नहीं मिल पा रहा है. 

सहायक महासचिव ने अपील की है कि माली में संयुक्त राष्ट्र मिशन की ओर से जी5-साहेल संयुक्त बल को मिलने वाली मदद से भौगोलिक पाबंदियां हटा ली जानी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश भी ऐसी अपील जारी कर चुके हैं. 

संयुक्त बल को समर्थन देने के लिए उन्होंने दानदाताओं का धन्यवाद अदा किया और ज़ोर देकर कहा कि साहेल क्षेत्र के लिए सभी का साझा दायित्व बनता है. सहायक महासचिव केटा ने ध्यान दिलाया कि माली और विस्तृत साहेल क्षेत्र में हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं.

“जलवायु परिवर्तन से लेकर सूखा, बढ़ती असुरक्षा, हिंसक चरमपंथ, अवैथ मानव तस्करी, हथियार और नशीली दवाएं सहित क्षेत्र को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. सीमाओं से परे आतंकवादी गुटों का फैलाव जारी है और वे बुर्किना फ़ासो, नाइजर, बेनिन, आइवरी कोस्ट, घाना और टोगो में सक्रिय हैं."

इस परिप्रेक्ष्य में जी5-साहेल का प्रभावी रूप से अभियान चला पाना अहम है जिससे आतंकवादी संगठनों को कड़ा संदेश मिल सकेगा. 

संयुक्त बल पर मानवाधिकार हनन के आरोप भी लगे हैं और ऐसे मामलों से निपटने के लिए पिछले एक साल में बड़े प्रयास किए गए हैं. उम्मीद जताई गई है कि इसके परिणामस्वरूप स्थानीय समुदायों के साथ आपसी विश्वास कायम करने और रिश्ते सुधारने में मदद मिल सकेगी. साथ ही क्षेत्र में क़ानून के राज को स्थापित किए जाने में यह अहम भूमिका निभा सकता है. 

 

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