ग़ाज़ा में टकराव बढ़ने के 'गंभीर नतीजे' होंगे

केंद्रीय ग़ाज़ा शहर में रिमाल इलाक़े की इमारतों से उठता धुंआ.
Mohammed Mahmoud Awad
केंद्रीय ग़ाज़ा शहर में रिमाल इलाक़े की इमारतों से उठता धुंआ.

ग़ाज़ा में टकराव बढ़ने के 'गंभीर नतीजे' होंगे

शांति और सुरक्षा

मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के लिए विशेष संयुक्त राष्ट्र समन्वयक निकोलाय म्लादेनोफ़ ने ग़ाज़ा में फिर से ख़तरनाक ढंग से हिंसा भड़कने और लोगों की जान जाने पर चिंता जताई है. न्यूज़ रिपोर्टों के मुताबिक़ शनिवार को क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़ों से 200 से ज़्यादा रॉकेट इसराइल की ओर दागे गए जिसके जवाब में इसराइल ने हवाई हमले और टैंकों से गोलाबारी की है.  

विशेष समन्वयक म्लादेनोफ़ ने कहा, “मेरी संवेदनाएं और प्रार्थना मारे गए लोगों के परिजनों और मित्रों के साथ हैं और मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं.”

हिंसा के फिर भड़कने के कुछ ही घंटों बाद जारी बयान में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मिस्र और अन्य पक्षों के साथ स्थिति को शांत करने के प्रयास कर रहा है. इस संबंध में सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और हाल के महीनों में बनी समझ के अनुरूप कदम उठाने के लिए कहा गया है.  

उन्होंने ध्यान दिलाया कि जो लोग आपसी समझ को ख़त्म करना चाहते हैं वे एक ऐसे संघर्ष के लिए ज़िम्मेदार होंगे जिसके सभी के लिए दुष्परिणाम होंगे. समझ से उनका इशारा हाल ही में मिस्र की मध्यस्थता में और संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से हुए नाज़ुक संघर्ष विराम पर हुई सहमति से था. 

म्लादेनोफ़ ने बताया कि अगर इसी तरह से तनाव भड़कता रहा तो अब तक हुई प्रगति खटाई में पड़ जाएगी और संकट के दीर्घकालीन समाधान तलाशने के अवसरों को झटका लगेगा. मौजूदा हिंसा से ग़ाज़ा के लोग मुश्किल में हैं और उन्हें इससे उबारने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाने चाहिए. “हिंसा के इस चक्र को समाप्त होना होगा और ग़ाज़ा में संकट का राजनीतिक समाधान तलाशे जाने के प्रयास किए जाने चाहिए.”

ग़ाज़ा में रोज़मर्रा की वस्तुओं और ज़रूरी सेवाओं की भारी किल्लत है जिसकी मुख्य वजह पिछले एक दशक से सड़क, वायु और जल मार्ग की इसराइल द्वारा की गई नाक़ेबंदी है. इसके विरोध में फ़लस्तीनी जनता प्रदर्शन करती रही है. हिंसा के चलते पिछले एक साल में 200 फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है और 1,300 से ज़्यादा घायल हुए हैं.