‘शांति बहाली की उम्मीद क़ायम रखना साझा ज़िम्मेदारी’

20 अक्टूबर 2018

इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों पूर्वी येरुशलम और पश्चिमी तट में हिंसा बढ़ रही है और इसराइली अधिकारी अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करते हुए लगातार फ़लस्तीनी घरों और संपत्ति को ध्वस्त करने के साथ-साथ ज़ब्त भी कर रहे हैं, और ऐसा इसराइली अधिकारी अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करते हुए कर रहे हैं. मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत निकोलय म्लादेनॉफ़ ने बृहस्पतिवार को सुरक्षा परिषद को ये जानकारी दी.

म्लादेनॉफ़ ने इसराइल से फ़लस्तीनी लोगों की सम्पत्तियों के ध्वंस को रोकने की अपील करते हुए कहा कि समस्या के समाधान से सम्बन्धित अन्तिम स्थिति के मुद्दों के बारे में कोई प्रस्ताव बातचीत के ज़रिए ही तैयार किया जा सकता है. इस स्थिति को इसराइली और फ़लस्तीनी इस प्रकार परिभाषित करते हैं…

‘यह हमारी साझा ज़िम्मेदारी है कि हम उन सम्भावनाओं को क़ायम रखें जिनके तहत बातचीत संभव हो, कमज़ोर पक्ष को मदद दी जा सके, कट्टरपंथियों और चरमपंथियों को शांति प्रक्रिया से दूर रखा जा सके और सार्थक परिणाम निकाले जा सकें.’

विशेष समन्वयक म्लादेनॉफ़ ने वीडियो लिंक के माध्यम से बातचीत करते हुए सभी प्रकार के हमलों की भी निंदा की. उन्होंने कहा कि वह सात अक्टूबर को पश्चिमी तट के औद्योगिक क्षेत्र में फ़लस्तीनी हमलावर द्वारा एक इसराइल पुरुष और महिला की हत्या की भर्त्सना करते हैं. साथ ही उन्होंने 12 अक्टूबर को नेबलूस की सीमा चौकी पर इसराइली हमलावरों द्वारा एक महिला की पत्थर मारकर हत्या करने की भी घोर निंदा की.

उन्होंने कहा, ‘मैं शोक संतप्त परिवार के साथ गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. ऐसे मामलों की कठोर निंदा की जानी चाहिए और मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वो हिंसा के ख़िलाफ़ अपनी आवा बुलंद करें और आतंकवाद की निंदा करें.’

ग़ाज़ा फटने वाला है… यह सच्चाई है

म्लादेनॉफ़ ने कहा कि मार्च में ग़ाज़ा की सीमा पर शुरू हुए प्रदर्शन काफ़ी बढ़ गए हैं और अब रातों को भी प्रदर्शन होते हैं. दूसरी ओर ग़ाज़ा में सरकार चलाने वाले संगठन हमास और अन्य चरमपंथी सीमा पार इसराइली इलाक़े में आग की पतंगें और गुब्बारे भेज रहे हैं जिनसे इसराइल में जगह-जगह आग भड़कती है और इसके जवाब में इसराइली सैन्य बल गोला बारूद का इस्तेमाल करते हैं.

उन्होंने कहा, पू”रे क्षेत्र में मानवीय और आर्थिक स्थिति ख़तरनाक बनी हुई है. बेरोज़गारी और ग़रीबी की दर बहुत ज़्यादा हो गई है. ग़ाज़ा में रहने वाला हर दूसरा व्यक्ति ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन जीने को मजबूर है.

“हम एक और विस्फोटक संघर्ष के कगार पर हैं. सभी यह दावा करते हैं कि वे इस संघर्ष को नहीं देखना चाहते मगर इसे रोकने के लिए सिर्फ़ जुमलेबाजी से काम नहीं चलेगा.”

वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से कहा कि ‘वे सभी पक्षों से एक क़दम पीछे हटने’ और 2014 के युद्धविराम समझौते का पालन करने का आग्रह करें.

उन्होंने कहा कि “हमास और दूसरे चरमपंथी समूहों को भड़काने वाली गतिविधियाँ तुरंत और प्रभावी ढंग से रोक देनी चाहिए. इसराइल को भी ग़ाज़ा में ज़रूरी सामान की आपूर्ति और उपलब्धता को बहाल करना चाहिए और लोगों के आवागमन एवं वस्तुओं की पहुंच में सुधार करना चाहिए. इसके अतिरिक्त गोला बारूद के प्रयोग को कम से कम करना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी अधिकारियों को ग़ाज़ा से हटना नहीं चाहिए और वहां अपने लोगों की तकलीफ़ों को ख़त्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना जारी रखना चाहिए.

निकोलय म्लादेनॉफ़ ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में सितंबर में उच्च स्तरीय चर्चा के समय ही फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं निर्माण कार्य एजेंसी (UNRWA) की मंत्रिस्तरीय बैठक हुई थी. इस बैठक में 12 करोड़ 20 लाख डॉलर जुटाए गए. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद सहायता राशि में ‘बड़ी’ कमी बनी हुई है.

इस अवसर पर इसराइल के ग़ैर सरकारी संगठन बतसेलम के हगाई अल-अद को भी सुरक्षा परिषद में अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया गया था. उन्होंने फ़लस्तीनियों की तकलीफ़ों को रेखांकित किया. यह ग़ैर सरकारी संगठन इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों में इसराइली मानवाधिकार सूचना केंद्र के तौर पर जाना जाता है और वह क़ब्ज़े को ख़त्म करने की दिशा में काम कर रहा है.

हगाई अल-अद ने कहा, ‘इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए क्षेत्रों में फ़लस्तीनियों को तकलीफों का अन्दाज़ा लगाना और उन्हें शब्दों में बयान करना आसान नहीं है.’

उन्होंने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से फ़लस्तीनियों की इन तकलीफों को कम करने के लिए काम करने की अपील भी की.

 

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