टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए और धन की ज़रूरत

15 अप्रैल 2019

असमान वृद्धि, बढ़ता कर्ज़, वित्तीय बाज़ारों में उतार-चढ़ाव, और वैश्विक व्यापार पर कायम तनाव जैसी वैश्विक चुनौतियां, टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पाने के रास्ते में बाधाएं खड़ी कर रही हैं. 2030 एजेंडा लागू करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने पर न्यूयॉर्क में बैठक हो रही है जिसे संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए और धन की आवश्यकता होगी.

मंत्री, वरिष्ठ यूएन अधिकारी, उच्चस्तरीय वित्त अधिकारी, नागरिक समाज, व्यापार जगत के प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन के नुमाइंदे न्यूयॉर्क में 'फ़ाइनेन्सिंग फ़ॉर डवेलेपमेंट फॉरम' में हिस्सा ले रहे हैं.  

वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि नई तकनीक से श्रम बाज़ार प्रभावित हो रहे हैं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी प्रणालियों पर भार बढ़ रहा है. ग़रीब और अमीर के बीच की दूरी बढ़ रही है और लैंगिक समानता की खाई भी गहरी हो रही है. 

"इन रुझानों को पलट देने के लिए तत्काल वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता है और उन्हीं प्रयासों में समन्वयन के लिए हम आज यहां एकत्र हुए हैं. आसान शब्दों में कहा जाए तो हमें टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए और धन की आवश्यकता है."

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नई रिपोर्ट बताती है कि विकासशील देशों को स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी और साफ-सफ़ाई के क्षेत्र में निवेश करने के लिए हर साल औसतन 2.6 ट्रिलियन डॉलर की कमी झेलनी पड़ती है.  महासचिव गुटेरेश ने कहा कि इसका सीधा अर्थ है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए और धन चाहिए. 

"टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए जो वैश्विक साझेदारियां चाहिए उसका ब्लू प्रिंट आदिस अबाबा एक्शन एजेंडा है."

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि विकास कार्यों के लिए सहायता ज़रूरी है - ख़ासकर निर्धनतम देशों के लिए - लेकिन घरेलू स्तर पर संसाधनों को जुटाने के के महत्व को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. 

"इसे संभव बनाने के लिए टैक्स राजस्व को बढ़ाना होगा. साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा टैक्स  चोरी , काले धन को सफ़ेद बनाने और ग़ैरक़ानूनी वित्तीय लेनदेन पर लगाम कसने को भी अहम करार दिया गया है. "इन्हीं कदमों के सहारे सार्वजनिक सेवाओं के लिए धन जुटाया जा सकता है जिससे कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं में एसडीजी को हासिल करने में मदद मिलेगी."

चुनौतियों के समाधान का रास्ता

यूएन प्रमुख ने कहा कि दुनिया के पास ग़रीबी, असमानता, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय दबावों का सामना करने के साधन मौजूद हैं: 2015 टिकाऊ विकास एजेंडा, आदिस अबाबा एजेंडा फ़ॉर एक्शन, और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता. 

"2030 एजेंडा एक फ़्रेमवर्क से कहीं बढ़कर है; यह नीतियों की एक ऐसी ठोस योजना है जिससे लाख़ों-करोड़ों महिलाओं, लड़कियों, पुरुषों और लड़कों के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है."

यूएन प्रमुख ने कहा कि पेरिस समझौते और टिकाऊ विकास लक्ष्यों के नज़रिए से 2019 एक बेहद अहम साल है लेकिन फ़िलहाल ज़रूरी गति से काम नहीं हो रहा है.

"हम रफ़्तार कायम नहीं रख पा रहे हैं. हमारे सामने गंभीर चुनौतियां और उभरते जोखिम हैं. असमान वृद्धि, बढ़ते कर्ज़, वित्तीय बाज़ारों में उतार-चढ़ाव, और वैश्विक व्यापार पर तनाव, टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लागू होने को जटिल बना रहा है. जलवायु परिवर्तन कहर ढा रहा है, विशेषकर नाज़ुक और संवेदनशील देशों में, और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का स्तर फिर बढ़ रहा है."

पिछले साल यूएन प्रमुख ने एक नई रणनीति को पेश किया जो दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में बुनियादी बदलाव को संयुक्त राष्ट्र कैसे समर्थन दे सकता है. वैश्विक आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रणालियों को 2030 एजेंडा के अनुरूप बनाने के लिए यह आवश्यक है.  इस दिशा में प्रगति के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं.

अपने संबोधन में महासचिव गुटेरेश ने एक नए समूह - ग्लोबल इन्वेस्टर्स फ़ॉर सस्टेनेबल डवेलपमेंट एलायंस  - के गठन की घोषणा की जिसमें दुनिया की बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं.  

एसडीजी लक्ष्यों के लिए डिजीटल साधनों से वित्तीय मदद जुटाने के लिए एक टास्क फ़ोर्स पहले से ही काम कर रही है जिसे अपनी अंतरिम रिपोर्ट इस साल सिंतबर में देनी है. 

क्षेत्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है ताकि जलवायु कार्रवाई के लिए धन उपलब्ध कराने और सबसे कम विकसित देशों को मदद देना संभव हो. अपनी विकास प्रणाली में सुधार के तहत, संयुक्त राष्ट्र निजी और सार्वजनिक फंडिंग के लिए नए स्रोतों को तलाशने और सरकारी अधिकारियों को घरेलू संसाधन जुटाने की क्षमता भी विकसित कर रहा है. 

 

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