'नींद से जगाने वाली' घंटी है जलवायु परिवर्तन पर नई यूएन रिपोर्ट

28 मार्च 2019

जलवायु परिवर्तन से संबंधित ख़तरों और प्राकृतिक आपदाओं की लगातार बढ़ती संख्या दुनिया के लिए एक चेतावनी भरी घंटी है. संयुक्त राष्ट्र के मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की 'स्टेट ऑफ़ द ग्लोबल क्लाइमेट' या 'वैश्विक जलवायु की स्थिति' रिपोर्ट को जारी करते हुए यूएन महासचिव ने जलवायु कार्रवाई की महत्वाकांक्षा बढ़ाने और टिकाऊ समाधानों को तलाशने की अपील की है.

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि जलवायु परिवर्तन की गति तेज़ हो रही है. "रिपोर्ट का निष्कर्ष दर्शाता है जो हम कहते आ रहे हैं: जलवायु परिवर्तन की रफ़्तार उससे निपटने के हमारे प्रयासों से कहीं ज़्यादा तेज़ है."

न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यही कारण है कि इस साल 23 सितंबर को उन्होंने जलवायु कार्रवाई पर एक बैठक का आयोजन किया है.

"मैं चाहता हूं कि यह बैठक दर्शाए कि जलवायु कार्रवाई के लाभ क्या हैं और उनसे हर कोई कैसे लाभान्वित हो सकता है. ऐसी सरकारों, शहरों और व्यवसायों की संख्या बढ़ रही है... जो समझते हैं कि जलवायु समाधान से अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूती, वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य की बेहतरी और पर्यावरण का संरक्षण हो सकता है."

इसके लिए पेरिस समझौते में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जिन राष्ट्रीय संकल्पों को शामिल किया गया है उन्हें 2020 तक बढ़ाने की आवश्यकता है.

'भाषण नहीं. योजना के साथ आइए'

जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बैठक में यूएन महासचिव ने सभी राष्ट्राध्यक्षों से सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से आने की अपील की है. “आप भाषण के साथ न आएं, एक योजना को साथ लाएं. विज्ञान बतलाता है कि यह आवश्यक है. दुनिया भर में युवा इसी की मांग कर रहे हैं."

इस संबंध में होने वाली पहल ऊर्जा, टिकाऊ कृषि, जंगल, महासागर, जलवायु सहनशीलता सहित कई अन्य क्षेत्रों में की जा सकती है. उन्होंने बताया कि जीवाश्म ईंधन से मिलने वाली ऊर्जा की तुलना में नवीकरणीय तकनीकें अब सस्ती ऊर्जा प्रदान कर रही हैं. हालांकि उन्होंने आगाह किया कि प्रगति के बावजूद और कदम लिए जाने चाहिए.

"इसका अर्थ है कि जीवाश्म ईंधन के लिए सब्सिडी ख़त्म करने और कार्बन उत्सर्जित करने वाले कृषि के तरीक़ों को छोड़ना होगा और जलवायु के लिए अच्छी तकनीकों, नवीकरणीय ऊर्जा, और बिजली से चलने वाले वाहनों को अपनाना होगा." 

साथ ही कार्बन उत्सर्जन की सही क़ीमत परिलक्षित करने के लिए 'कार्बन प्राइसिंग' के अलावा कोयले से चलने वाले संयंत्रों को बंद करने, नए संयंत्रों की योजना पर रोक लगाने और उनमें कार्यरत लोगों के लिए नई नौकरियों का सृजन करना होगा ताकि यह रूपान्तरण न्यायोचित, समावेशी और लाभकारी हो सके.

Peter Buschmann for Forest Service, USDA
कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में आग (फ़ाइल).

संयुक्त राष्ट्र् महासभा अध्यक्ष मारिया फ़र्नान्डा एस्पिनोसा ने कहा कि चरम मौसम की घटनाओं के दुनिया भर के देशों में सामाजिक और आर्थिक नतीजों की व्यापक ढंग से समझ विकसित होनी चाहिए. इस दृष्टि से यह रिपोर्ट एक बेहद अहम मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है.

महासभा अध्यक्ष ने कहा कि यह अच्छी ख़बर नहीं है कि कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोत्तरी की गति 2017 में 1.6 प्रतिशत से 2018 में 2.7 प्रतिशत हो गई है. "हमें कदम उठाने होंगे और अभी लेने होंगे. आंकडे और डाटा बेहद चिंताजनक है. हम सक्षम हैं, हमारे पास विज्ञान है, हमारे पास ज्ञान है, हमारे पास वैश्विक तापमान से निपटने के ज़रिए भी मौजूद हैं."

ठोस कार्रवाई के लिए समय कम

यूएन मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव पेटेरी टालास ने कहा कि "पेरिस समझौते के तहत जो संकल्प लिए गए थे उन्हें हासिल करने के लिए समय निकला जा रहा है."

नई रिपोर्ट की मुख्य बातों का ज़िक्र करते हुए प्रोफ़ेसर टालास ने सचेत किया कि पिछले साल ग्रीनहाउस गैसों की रिकॉर्ड सघनता दर्ज की गई जिससे वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी ख़तरनाक स्तर तक पहुंच रही है.

रिपोर्ट के अनुसार 1994 में वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा का स्तर 354 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) था जो 2017 में बढ़कर 405.5 पीपीएम हो गया है. उन्होंने 2015 से 2018 तक तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी, समुद्री जलस्तर के बढ़ने और उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ़ पिघलने का भी उल्लेख किया.

2019 में चरम मौसम संबंधी घटनाओं के जारी रहने से होने वाले नुक़सान पर भी चिंता जताई गई है. अफ़्रीका के तीन देशों - मोज़ाम्बिक, मलावी और ज़िम्बाब्वे - से चक्रवाती तूफ़ान 'इडाई' और बाढ़ से भारी जान माल की हानि हुई है. प्रोफ़ेसर टालास ने कहा कि इन घटनाओं के पीड़ितों की स्थिति दर्शाती है कि हमें टिकाऊ विकास, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए वैश्विक एजेंडा की ज़रूरत क्यों है.

गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास पर एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन हुआ जिसमें ठोस कार्रवाई के लिए दोनों एजेंडा को साथ लाने पर चर्चा हुई.

 

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