हिंसा की रोकथाम के लिए 'हरसंभव प्रयास' करेंगे

18 मार्च 2019

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष  प्रतिनिधि लैला ज़ेरूगी ने कहा है कि पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति चुनावों के शांतिपूर्ण ढंग से निपट जाने के बावजूद देश के पूर्वी हिस्से में हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं. इन इलाक़ों में हथियारबंद गुटों की गतिविधियां बरक़रार हैं. 

सोमवार को सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए हुए यूएन मिशन प्रमुख लैला ज़ेरूगी ने बताया कि उत्तर कीवू के ग्रैन्ड नोर्ड क्षेत्र में में घातक ईबोला वायरस व्यापक पैमाने पर फैला हुआ है. हथियारबंद गुट स्थानीय लोगों, ईबोला से निपटने के प्रयासों का हिस्सा बनी राहत टीमों और सुरक्षा बलों पर हमले कर रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए (MONUSCO) कोई कसर नहीं छोड़ रहा है और राष्ट्रीय पुलिस बलों को भी सहायता प्रदान की जा रही है. बुतेम्बो और काटवा में ईबोला स्वास्थ्य केंद्रों पर हमलों के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. 

जे़रूगी ने कहा कि मार्च के अंत में होने वाले राष्ट्रीय और प्रांतीय चुनावों के लिए तैयारी चल रही है और हिंसा की रोकथाम के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. "हिंसा की आशंका से निपटने के लिए हम पुरज़ोर प्रयास करेंगे, ख़ासकर राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील समय में."

दक्षिण कीवू का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि समुदाय-आधारित गुटों में झडपें बढ़ गई हैं जिससे बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और स्थिति के और बिगड़ने की आशंका है. 

इससे निपटने के लिए यूएन मिशन के सैनिकों और समुदायों में मध्यस्थता के हो रहे प्रयासों के अलावा ज़्यादा संख्या में सरकार एजेंसियों की उपस्थिति को बढ़ाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने जल्द कदम उठाने की इच्छा दर्शाई है लेकिन साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा बलों को और मज़बूत बनाए जाने की आवश्यकता है. 

"उत्तर और दक्षिण कीवू में संरचनात्मक हिंसा पूरी तरह से रची-बसी है, और पहचान, ज़मीन, संसाधनों और क्षेत्रीय मुद्दों पर संघर्ष के कारण मौजूद हैं जो रोज़मर्रा के जीवन में गहराई तक बैठ गए हैं." इसका टिकाऊ समाधान तलाशने के लिए आने वाले समय में सभी समुदायों में मेलजोल बढ़ा कर प्रयास करने पर बल दिया गया है.

पश्चिमी हिस्से में पिछले साल दिसंबर में दो समुदायों के बीच हुई हिंसा पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर संकेत था कि कितनी जल्दी हिंसा उग्र रूप धारण कर सकती है. यूम्बी के आस-पास के इलाक़ों मेंं हुई हिंसा में 535 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, 111 लोग घायल हुए जबकि 19 हज़ार से अधिक लोगों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.

हिंसक संघर्ष के मूलभूत कारणों को सुलटाने के लिए सरकार को प्रोत्साहित किए जाने की ज़रूरत को रेखांकित किया गया है. 

लोकतंत्र की दिशा में निर्णायक कदम 

30 दिसंबर को राष्ट्रपति चुनाव के बाद हार का सामना करने वाले कुछ राजनीतिक दलों ने  विरोध प्रदर्शन किए थे लेकिन ज़ेरूगी ने बताया कि स्वाधीनता के बाद यह पहला अवसर था जब शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का हस्तांतरण किया गया. "अधिकतर नागरिकों ने राष्ट्रपति त्शिसेकेदी के चुने जाने का स्वागत किया."

देश में लोकतंत्र की जड़े मज़बूत करने और क़ानून का राज स्थापित करने की दिशा में इसे एक निर्णायक कदम बताया गया है. "राष्ट्रपति फ़ेलिक्स त्शिसेकेदी ने क़ानून व्यवस्था, शांति स्थापित करने, लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए संकल्प लिया था और ठोस कदम उठा कर वह इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, विशेषकर तनाव को कम करने के लिए."

राजनीतिक बंदियों की रिहाई हुई है और अन्य राजनीतिक दलों के नेता बिना अवरोध के लोगों से मिल रहे हैं और राजनीतिक निर्वासन झेल रहे लोगों की वापसी भी हो सकती है. 

हालांकि मिशन प्रमुख ने माना कि हाल के दिनो में कुछ स्थानीय चुनावों के नतीजों पर विरोध प्रदर्शन नाज़ुक राजनीतिक प्रक्रिया का संकेत देते हैं. 

ज़ेरूगी ने सुरक्षा  परिषद से आग्रह किया कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की जनता की उम्मीदों का सम्मान में सरकार द्वारा उठाए जा रहे प्रयासों का समर्थन किया जाना चाहिए. साथ ही राजनीतिक संवाद और सहयोग को बढ़ाने और कुछ इलाक़ों में हथियारबंद गुटों की गतिविधियों पर टिकाऊ ढंग से लगाम लगाने के अवसर का लाभ उठाया जाना चाहिए. 

 

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