'हिंसा के विरूद्ध व्यापक सहमति को प्रोत्साहन मिले'

23 जनवरी 2019

संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि कार्लोस रूइत्ज़ मासिये ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि कोलंबिया के लोगों ने देश को फिर संघर्ष की आग में न झोंकने के लिए व्यापक तौर पर सहमति बना ली है. उन्होंने इस भावना को और मज़बूत बनाने की ज़रूरत पर बल देते हुए वहां स्थिरता लाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर जानकारी दी.

ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर के दो साल बाद कोलंबिया में हाल के दिनों में हिंसक घटनाओं में तेज़ी आई है. कुछ ही दिन पहले राजधानी बोगोटा में राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के बाहर कार बम धमाके में 31 लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों घायल हुए. हमले की ज़िम्मेदारी लेने का दावा राष्ट्रीय मुक्ति सेना समूह ने किया जो कोलंबिया में अब भी हथियारबंद संघर्ष कर रहा है. 

कोलंबिया में गुरिल्ला आंदोलन की क्रांतिकारी हथियारबंद सेना (एफ़एआरसी) सहित कई हथियारबंद विपक्षी गुटों और सरकारी सुरक्षा बलों में 1964 से चले आ रहे संघर्ष में अब दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन शांति समझौते के बाद पूर्व विद्रोही अब देश की राजनीति का हिस्सा बन रहे हैं.

रूइत्ज़ मासिये ने सुरक्षा परिषद को बताया कि हाल के हमलों के बावजूद कोलंबिया की जनता अपना मन बना चुकी है. "कोलंबिया में सभी राजनीतिक पक्षों ने हमले को तत्काल ख़ारिज कर दिया. पिछले रविवार से देश भर में मार्च निकाले गए हैं जिसमें कोलंबिया के लोगों ने हिंसा को ख़ारिज करने पर व्यापक एकजुटता दिखाई है. इस आम सहमति को और पुष्ट किए जाने की आवश्यकता है."

शांति प्रक्रिया की 'उपलब्धियां'

कोलंबिया में यूएन मिशन के प्रमुख तौर पर कार्लोस रूइत्ज़ मासिये की नियुक्ति इस साल 7 जनवरी को हुई. मिशन के पास नवंबर 2016 में हुए शांति समझौते के अमलीकरण की प्रक्रिया को जांचने-परखने की ज़िम्मेदारी है. 

शांति प्रक्रिया से जुड़ी हाल की कुछ उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए रूइत्ज़ मासिये ने बताया कि लैंगिक मुद्दों के लिए सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय पैनल की पहली बैठक 16 जनवरी को हुई. साथ ही मई 2018 में 'सत्य आयोग' द्वारा काम शुरू किया जाना एक मील के पत्थर के रूप में देखा जाएगा.

यह आयोग अतीत में मानवाधिकार हनन के मामलों और यौन हिंसा से जुड़े मामलों की जांच करेगा ताकि अगले तीन साल में समाज में समन्वय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके.

रूइत्ज ने ज़ोर देकर कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत हथियारबंद संघर्ष के दौरान हुए अपराधों की जांच के लिए कार्रवाई एक साल से चल रही है. हिंसा में 32 हज़ार से ज़्यादा लोगों को प्रभावित करने वाले पांच मामलों को जांचा जा रहा है. 

"विशेष न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और स्वायत्ता  को बनाए रखा जाना और उसके सुचारू कामकाज के लिए ज़रूरी समर्थन जुटाना बेहद अहम होगा. 

सुरक्षा और समेकन: दो बड़ी चुनौतियां 

रूइत्ज़ मासिये ने दो लघुकालीन चुनौतियों को ज़िक्र करते हुए बताया कि पुराने लड़ाकों फिर से समाज में एकीकृत किया जाना एक बड़ा मुद्दा है. इनमें एफ़एआरसी लड़ाके भी शामिल हैं. अब तक हुई बैठकों से यह स्पष्ट है कि पूर्व विद्रोही कामकाज और समाज में अपना स्थान ढूंढना चाहते हैं. आर्थिक भविष्य और क़ानूनी सुरक्षा से जुड़ी अनिश्चितिताएं उन्हें परेशान करती हैं. 

राजनीतिक एकीकरण के तहत एफ़एआरसी पार्टी पहली बार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए क्षेत्रीय और स्थानीय चुनावों में हिस्सा लेगी. सभी राजनीतिक दलों की सुरक्षा और सलामती को सुनिश्चिचत करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. 

कोलंबिया में सुरक्षा हालात अब भी नाज़ुक बने हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के अनुसार, 2016 में शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद से 163 सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हत्याओं को प्रमाणित किया जा चुका है जबकि कुल मिलाकर 454 मौतें हुई हैं. 

जनवरी 2019 के पहले हफ़्ते में ही 30 से ज़्यादा हमले हो चुके हैं और सात नेता मारे जा चुके हैं. पूर्व गुरिल्ला संगठनों के लड़ाकों पर भी हमले हुए हैं जिससे राष्ट्रीय मेलमिलाप के प्रयासों को धक्का पहुंचा है. 

 

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