कोलंबिया में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौतों का सिलसिला 'भयावह'

10 मई 2019

कोलंबिया में बड़ी संख्या में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मारे जाने और उन्हें प्रताड़ित किए जाने के मामले सामने आने पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने चिंता जताई है. मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि ऐसी घटनाओं को किसी तरह की सज़ा के डर के बिना अंजाम दिया जा रहा है जिससे सख़्ती से निपटा जाना होगा.

इस साल की शुरुआत से जिस ढंग से दर्जनों मौतें हुई हैं उसे मानवाधिकार कार्यालय ने ख़तरनाक रूझान बताया है जिससे स्थिति लगातार बिगड़ रही है.

प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने जिनिवा में पत्रकारों को बताया कि कोलंबिया में नागरिक संगठनों, मानवाधिकार संस्थाओं और सरकारी संस्थाओं ने जो आरोप लगाए हैं उन पर मानवाधिकार कार्यालय करीबी नज़र रखे हुए है. इस साल अब तक चार महीनों में 51 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर मारा गया है.

“यह एक बड़ी संख्या है जो नकारात्मक रूझानों को प्रदर्शित करती है जिसमें 2018 में तेज़ी आई. तब हमारे स्टाफ़ ने 115 मानवाधिकार रक्षकों की मौत के बारे में जानकारी एकत्र की थी.”

मानवाधिकार उल्लंघन होने के मामले ख़ासकर ग्रामीण इलाक़ों में सामने आए हैं जहा बुनियादी सामाजिक सेवाओं की कमी है, ग़रीबी बड़े पैमाने पर व्याप्त है और ग़ैरक़ानूनी हथियारंबद और आपराधिक गुट की भरमार है.

“सभी को समान अधिकार उपलब्ध नहीं है और इस विसंगति को तत्काल दूर करने की आवश्यकता है, विशेषकर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के मामले में और ख़ासकर उनके लिए जो ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं.”

कई प्रकार के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है जिनमें, सामुदायिक नेता, अफ़्रीकी मूल के कोलंबियाई, मूल निवासी, पर्यावरणवादी, पत्रकार, महिलाधिकार रक्षक, और स्थानीय नेता भी शामिल हैं.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि “सामुदायिक नेताओं के लिए विशेष रूप से जोखिम हैं और अब तक 70 फ़ीसदी मामलों में उनकी मौत हुई है.” उनका कहना है कि कुछ को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने 2016 के ऐतिहासिक कोलंबियाई शांति समझौते के का समर्थन किया था. इस साल अक्टूबर में चुनाव होने हैं और ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ऐसे हमले और बढ़ सकते हैं.

हाल के दिनों में मानवाधिकारों की रक्षा के प्रयासों के तहत विशेष न्यायाधीशों की नियुक्त करने की घोषणा की गई है. यूएन एजेंसी ने स्थानीय प्रशासन से नागरिक समाज के लिए स्वतंत्र और सुरक्षित माहौल तैयार करने की कोशिशों को दोगुना करने की अपील की है.

दशकों तक चले गृहयुद्ध के बाद, रेवोल्युशनरी आर्म्ड फ़ोर्सेस ऑफ़ कोलंबिया (FARC) के विद्रोहियों ने 2016 में सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. संघर्ष के समाप्त होने के बाद स्थिति की निगरानी करने और हथियारों की सुपुर्दगी के लिए संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा परिषद की अनुमति से जनवरी 2016 में एक राजनीतिक मिशन की शुरुआत की थी.

उसी साल अक्टूबर तक यूएन मिशन ने 620 किलोग्राम विस्फोटकों को नष्ट किए जाने की पुष्टि की थी. सितंबर 2017 में कोलंबिया में संयुक्त राष्ट्र सत्यापन मिशन को स्थापित किया गया ताकि सरकार और पूर्व विद्रोहियों के मुख्यधारा में शामिल होने की प्रक्रिया के दावों की पुष्टि की जा सके. साथ ही वर्षों तक हिंसाग्रस्त इलाक़ों की सुरक्षा को सुनिश्चित भी किया जाना था.

 

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