संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में, महात्मा गांधी की अर्द्ध-प्रतिमा का अनावरण

यूएन मुख्यालय में महात्मा गांधी की अर्ध-प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम.
UN Photo/Mark Garten
यूएन मुख्यालय में महात्मा गांधी की अर्ध-प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में, महात्मा गांधी की अर्द्ध-प्रतिमा का अनावरण

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, यूएन महासभा के 77वें सत्र के लिये अध्यक्ष कसाबा कोरोसी और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की उपस्थिति में ​​बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र परिसर में स्थित नॉर्थ लॉन में, महात्मा गांधी की अर्द्ध-प्रतिमा का अनावरण किया गया. यूएन प्रमुख ने इस अवसर पर कहा कि यूएन मुख्यालय में स्थापित महात्मा गांधी की अर्द्ध-प्रतिमा, उन सभी मूल्यों का स्मरण कराती रहेगी, जिन्हें गांधी ने अपने जीवन में बनाए रखा और जिन मूल्यों के लिये यूएन प्रतिबद्ध है. 

 

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने आधुनिक युग की विशाल हस्ती – महात्मा गांधी, को यह श्रृद्धांजलि अर्पित करने के लिये भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन का आभार प्रकट किया है.

भारत सुरक्षा परिषद की अपनी दो वर्ष की सदस्यता के अन्तिम महीने - दिसम्बर के लिए परिषद का अध्यक्ष देश है. भारत ने संयुक्त राष्ट्र को महात्मा गांधी की यह अर्द्ध-प्रतिमा उपहार स्वरूप भेंट की है.

इस अवसर पर यूएन महासभा प्रमुख कसाबा कोरोसी, यूएन में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा काम्बोज और सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. 

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि विश्व भर में समानता, एकजुटता और सशक्तिकरण के लिये संयुक्त राष्ट्र के दैनिक कामकाज सहित, महात्मा गांधी की विरासत सर्वत्र उपस्थित है.

“गांधी केवल एक ऐतिहासिक हस्ती नहीं है. न्याय व सामाजिक रुपान्तरकारी बदलावों के लिये चिन्ता समेत उनके दूरदृष्टितापूर्ण विचारों और मूल्यों का गुँजन आज भी जारी है."

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने महात्मा गांधी की अर्द्ध-प्रतिमा को एक अरब 30 करोड़ भारतीयों की ओर से संयुक्त राष्ट्र के लिये एक उपहार बताया.

उन्होंने कहा कि “गांधी अहिंसा, सच्चाई और करुणा के प्रतीक हैं. वह शान्ति व सहिष्णुता के प्रतीक हैं. वह एक प्रतीक हैं, जो हमें भावी पीढ़ियों के लिये दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने के लिये हमारे कर्तव्यों को ध्यान दिलाते हैं.”

भारतीय विदेश मंत्री के अनुसार यूएन में महात्मा की अर्द्ध-प्रतिमा, एक शान्तिपूर्ण विश्व के सृजन के लिये उनके आदर्शों का बेहतर अनुसरण किये जाने का स्मरण कराती रहेगी, जोकि संयुक्त राष्ट्र का भी एक बुनियादी उद्देश्य है.

यूएन मूल्य और महात्मा गांधी

यूएन प्रमुख ने कहा कि इतिहास में ऐसे व्यक्ति बहुत कम ही हुए हैं, जिनका जीवन महात्मा गांधी की तरह, संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों और मूल्यों के अनुरूप रहा है.

“गांधी जी की साम्राज्यवाद-विरोधी दृष्टि संयुक्त राष्ट्र की बुनियाद में थी. जैसाकि [यूएन] चार्टर में कहा गया है, हमारा संगठन, समान अधिकार और व्यक्तियों के स्व-निर्धारण के सिद्धान्त पर बना है.”

“निसन्देह, चार्टर का मसौदा तैयार करने वाले वालों ने गाँधी के शान्ति, अहिंसा और सहिष्णुता के सन्देश से विशाल प्रेरणा ली थी.”

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के सिद्धान्त का पालन करते हुए औपनिवेशवाद के विरोध में लाखों-करोड़ों को लामबन्द किया, और इस सफलता से विश्व भर में आमजन को प्रेरणा मिली.

2019 में महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती मनाई गई. महात्मा गाँधी के जन्म दिन 2 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है.
UN Photo/Manuel Elias
2019 में महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती मनाई गई. महात्मा गाँधी के जन्म दिन 2 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है.

टिकाऊ विकास और गांधी

महासचिव गुटेरेश के अनुसार महात्मा गांधी के अनेक विचारों में टिकाऊ विकास की अवधारणा की झलक मिलती है, जिनमें उनका यह मत भी है कि निर्धनता, हिंसा का बदतरीन रूप है.

“उनका यह विश्वास कि समाजों का आकलन, सर्वाधिक निर्बलों के उत्थान में उनके रिकॉर्ड पर तय किया जाना चाहिए, आज के विश्व नेताओं के लिये एक अहम सबक़ है.”

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि “गांधी उन व्यक्तियों में थे जिन्होंने आरम्भ में ही हमारे पर्यावरण की लूटपाट और विध्वंस के ख़तरों को पहचान लिया था.”

उनका मानना था कि पृथ्वी, वायु, भूमि और जल, हमारे पूर्वजों से उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं हुए हैं, बल्कि हमारे बच्चों से मिला ऋण है.“वह खादी जैसे टिकाऊ स्थानीय उत्पादों के प्रसिद्ध समर्थक थे.”

सामाजिक न्याय

उन्होंने ‘अस्पृश्य’ समझे जाने वाले लोगों को ‘हरिजन’ (ईश्वर के बच्चे) नाम दिया, और जाति आधारित भेदभाव के विरोध में अपनी मुहिम को औपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष जितना ही महत्वपूर्ण माना.

महासचिव ने कहा, “उन्होंने राजनीति में महिलाओं का पुरज़ोर समर्थन किया और हर प्रकार की भेदभावपूर्ण प्रथाओं को ख़ारिज कर दिया.”

यूएन प्रमुख ने कहा कि महात्मा गाँधी, शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व, ग़ैर-भेदभाव, और बहुलवाद के लिये अटल पैरोकार थे.

उन्होंने पहचाना कि विविधता भारत की विशालतम पूँजी है और फिर, धर्मों, संस्कृतियों व समुदायों के बीच समरसतापूर्ण सम्बन्धों की स्थापना के लिये प्रयत्न किया.  

महासचिव ने बताया कि गांधी के जीवन का  केन्द्र बिन्दु, शान्ति की संस्कृति का सृजन करते हुए, अहिंसक प्रतिरोध के द्वारा सामाजिक व राजनैतिक सुधारों के लिये मज़बूत प्रयास करना था.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भरोसा जताया कि यूएन मुख्यालय में स्थापित महात्मा गांधी की अर्द्ध-प्रतिमा, उन सभी मूल्यों की याद दिलाती रहेगी, जिन्हें उन्होंने अपने जीवन में बनाए रखा और जिन मूल्यों के लिये यूएन प्रतिबद्ध है.