वैश्विक भूख संकट टालने के लिये, समन्वित कार्रवाई की पुकार

पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित इलाक़े में कुपोषण का शिकार एक बच्चे को उसकी माँ खाना खिला रही है.
© UNICEF/Shehzad Noorani
पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित इलाक़े में कुपोषण का शिकार एक बच्चे को उसकी माँ खाना खिला रही है.

वैश्विक भूख संकट टालने के लिये, समन्वित कार्रवाई की पुकार

मानवीय सहायता

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी जारी की है कि दुनिया में भूख की मार झेल रहे लोगों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने का जोखिम उभर रहा है. वैश्विक खाद्य संकट के कारण बड़ी संख्या में लोगों के लिये खाद्य असुरक्षा हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, जिसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसी ने 16 अक्टूबर को 'विश्व खाद्य दिवस' से ठीक पहले, मौजूदा संकट की बुनियादी वजहों से निपटने की पुकार लगाई है.

जलवायु व्यवधान, हिंसक टकराव और आर्थिक दबाव समेत अनेक विकराल चुनौतियों की पृष्ठभूमि में वैश्विक खाद्य संकट पनप रहा है.

इन संकटों की वजह से, विश्व भर में भूख की मार झेल रहे लोगों की संख्या, वर्ष 2022 के शुरुआती महीनों में 23 करोड़ 20 लाख से बढ़कर, 34 करोड़ 50 लाख तक पहुँच गई.

2023 में हालात और भी ख़राब होने की आशंका है.

यूएन एजेंसी ने वर्ष 2022 में 15 करोड़ 30 लाख लोगों तक खाद्य सहायता पहुँचाने के लिये अपने लक्ष्यों का दायरा व स्तर बढ़ाया है.

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इस साल के मध्य तक 11 करोड़ 12 लाख लोगों को सहायता वितरित की जा चुकी है.

संगठन के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली ने कहा, “हम एक अभूतपूर्व वैश्विक खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं, और सभी संकेत दर्शाते हैं कि अभी हालात और भी ज़्यादा ख़राब हो सकते हैं.”

“पिछले तीन वर्षों में भूख [पीड़ितों] की संख्या बार-बार नए ऊँचे स्तर तक पहुँची है.”

संगठन प्रमुख ने कहा कि इस संकट के बुनियादी कारणों से निपटने के लिये विशाल स्तर पर समन्वित कार्रवाई के अभाव में परिस्थितियाँ बद से बदतर हो जाने की आशंका है.

“हम रिकॉर्ड स्तर पर भूख का एक और साल नहीं झेल सकते हैं.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम और उसके साझीदार संगठन पाँच देशों में अकाल की रोकथाम के लिये प्रयासों में जुटे हैं: अफ़ग़ानिस्तान, इथियोपिया, सोमालिया, दक्षिण सूडान और यमन.  

विनाशकारी स्तर पर भूख से पीड़ितों के लिये अक्सर हिंसक संघर्ष व टकराव वजह होते हैं. इन हालात में संचार माध्यमों में व्यवधान आता है, मानवीय राहत पहुँचाने के मार्ग सीमित हो जाते हैं और समुदाय विस्थापन का शिकार होते हैं.

बुनियादी वजह

यूक्रेन में हिंसक संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार में व्यवधान आया है, जिससे परिवहन क़ीमतों में उछाल आया, और कृषि कार्यों के लिये किसान ज़रूरी सामग्री का प्रबन्ध नहीं कर पाए.

इसके असर की गूंज अगले वर्ष फ़सलों की पैदावार के स्तर में नज़र आने की आशंका है.

जलवायु व्यवधानों की गहनता व आवृत्ति भी बढ़ रही है, जिसके कारण प्रभावितों के लिये आपदाओं के बीच में मिलने वाले समय में उबरने का अवसर नहीं है.

हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में अभूतपूर्व सूखा, बड़ी संख्या में लोगों को चिन्ताजनक स्तर पर खाद्य असुरक्षा की ओर धकेल रहा है, और सोमालिया में अकाल की आशंका है.

बाढ़ के कारण अनेक देशों में घर व कृषि योग्य भूमि बर्बाद हुई है, और पाकिस्तान में हुई तबाही इसकी एक बानगी है.

मगर, प्रभावित देशों की सरकारों द्वारा जवाबी कार्रवाई किये जाने की क्षमता पर, आर्थिक चुनौतियों के कारण असर पड़ा है.

इसकी वजह मुद्रा का लुड़कना, मुद्रास्फीति, क़र्ज़ का दबाव समेत अन्य मुश्किलें बताई गई हैं, और वैश्विक मन्दी की आशंका भी बढ़ रही है.

इन हालात में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका है, जिनके लिये अपने भोजन का प्रबन्ध कर पाना सम्भव नहीं होगा, और उनकी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये मानवीय राहत की ज़रूरत होगी.

WFP द्वारा सहायता प्रयास

यूएन खाद्य कार्यक्रम ने 2022 के लिये अपनी योजना को महत्वाकांक्षी बताया है, जिसमें भूख के कारण होने वाली मौतों की रोकथाम के लिये कारगर कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई है.

इसके समानान्तर, राष्ट्रीय खाद्य प्रणालियों व आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता लानी होगी और जहाँ तक सम्भव हो सके, इन्हें सहनसक्षम बनाना होगा.

इस वर्ष अब तक, यूएन एजेंसी ने आर्थिक संकट से पीड़ित श्रीलंका में अपने सहायता प्रयासों में छह गुना वृद्धि की है, और सोमालिया में अकाल की आशंका के बीच अपने अभियान का स्तर बढ़ाया है.

दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में कुछ बच्चे भोजन कर रहे हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा यहाँ खाद्य असुरक्षा झेल रहे लोगों को राशन प्रदान किया जाता है.
WFP
दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में कुछ बच्चे भोजन कर रहे हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा यहाँ खाद्य असुरक्षा झेल रहे लोगों को राशन प्रदान किया जाता है.

यूएन खाद्य सहायता एजेंसी, अफ़ग़ानिस्तान में हर पाँच में से दो अफ़ग़ान नागरिकों को सहायता पहुँचा रही है.

WFP ने यूक्रेन में एक आपात अभियान भी शुरू किया है और हिंसक टकराव से जान बचाकर मोलदोवा में शरण लेने वाले लोगों के लिये एक नया कार्यालय खोला है.  

यूएन एजेंसी को वर्ष 2022 में 15 करोड़ 30 लाख लोगों तक सहायता पहुँचाने के लिये, 24 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी.

मगर, विश्व अर्थव्यवस्था अभी कोविड-19 महामारी समेत अन्य वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है, और आवश्यकता व उपलब्धता के बीच की खाई बढ़ी है.

संगठन के अनुसार विश्व भर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये शान्ति व आर्थिक स्थिरता बनाए रखने व मानवीय राहत समर्थन जारी रखने के लक्ष्य से समन्वित प्रयास किये जाने होंगे.