यूएन शान्तिरक्षा साझेदारियों के, शान्ति व विकास को बढ़ावा देने के 5 उपाय

29 मई 2022

संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक हर दिन, दुनिया भर में, बेहद नाज़ुक राजनैतिक सन्दर्भों में, लगातार ख़तरनाक बने हुए स्थानों पर, करोड़ों लोगों की सुरक्षा के लिये अथक काम करते हैं.

युद्धग्रस्त क्षेत्रों में आम लोगों की सुरक्षा व संरक्षण और सामाजिक समरसता से लेकर, मानवीय सहायता की सुरक्षित उपलब्धता, बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण, और तकलीफ़ों में जीने वाले समुदायों के आजीविका अर्जन में कौशल विकास करने तक, शान्तिरक्षक, स्थानीय व अन्तरराष्ट्रीय साझीदारों के साथ मिलकर, राजनैतिक समाधानों व टिकाऊ विकास के लिये अनुकूल हालात बनाने के प्रयास करते हैं.

अन्तरराष्ट्रीय शान्तिरक्षक दिवस (29 मई) पर, इस वर्ष की थीम है – लोग, शान्ति, प्रगति: साझीदारियों की शक्ति. इस सन्दर्भ में यहाँ प्रस्तुत हैं ऐसे पाँच रास्ते, जिनके माध्यम से, शान्तिरक्षक साझेदारियाँ, बदलाव सम्भव बनाती हैं. 

1. जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाना

जलवायु परिवर्तन, संघर्ष के जोखिम को बढ़ाता है और पुनर्बहाली को ज़्यादा कठिन बनाता है. बढ़ता सूखा, मरुस्थलीकरण, बाढ़, खाद्य असुरक्षा, और दुनिया के अनेक इलाक़ों में पानी व ऊर्जा की क़िल्लत, संघर्ष प्रभावित इलाक़ों में रहने वाले समुदायों के लिये, उनकी ज़िन्दगियों को फिर से बेहतर बनाने के प्रयास और भी ज़्यादा मुश्किल बनाते हैं. यूएन शान्तिरक्षा मिशन, इन जटिल संकटों के अग्रिम मोर्चों पर काम करते हैं.

दिसम्बर 2021 में, दक्षिण सूडान के यूनिटी क्षेत्र में पिछले 60 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ आने के बाद, क्षेत्र का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी में डूब गया था.

दक्षिण सूडान में यूएन मिशन (UNMISS- अनमिस) ने मानवीय सहायता कर्मियों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर तत्काल कार्रवाई की, जिसमें पाकिस्तान के इंजीनियर शान्तिरक्षकों द्वारा क़स्बे की हिफ़ाज़त के लिये 70 किलोमीटर लम्बा पुश्ता बनाने से लेकर, विस्थापित परिवारों के लिये शिविरों की स्थापना तक शामिल थे. उनके साथ ही, हवाई अड्डे और सड़कों ने मानवीय सहायता की आपूर्ति और व्यापार के लिये अति महत्वपूर्ण सहारा दिया.

दक्षिण सूडान के यूनिटी क्षेत्र में, दिसम्बर 2021 में, पिछले 60 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ आई थी.
UNMISS
दक्षिण सूडान के यूनिटी क्षेत्र में, दिसम्बर 2021 में, पिछले 60 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ आई थी.

अनमिस और उसके साझीदारों ने 4 जनवरी 2022 को बढ़ते पानी का लगातार मुक़ाबला करने के प्रयासों का, 100 दिन का पड़ाव पूरा किया. इस एक वाक़ई वास्तविक सामुदायिक प्रयास के तहत, विस्थापित परिवारों ने हदबन्दियों की निगरानी की और मिट्टी के पुश्तों में आई किसी भी दरार पर कड़ी नज़र रखी.

बेन्तियू इलाक़े में अनमिस के कार्यालय के मुखिया हिराको हिराहारा, इन प्रयासों में शामिल तमाम साझीदारों के प्रयासों के बारे में बताते हैं, “मैं जो गर्व के साथ कह सकता हूँ वो ये है कि सभी ने एक साथ मिलकर काम किया. मेरा मतलब है, बेन्तियू में ये लोगों की ख़ूबी है कि हम यहाँ, वहाँ, हर जगह दलीलें देते रहते हैं, मगर जब कोई कठिन स्थिति उत्पन्न होती है तो सभी एकजुट हो जाते हैं. हम सभी एकजुटता के साथ काम कर रहे हैं. मेरा ख़याल है कि हम आगे बढ़ रहे हैं.”

2. कोविड-19 महामारी के अग्रिम मोर्चों पर

कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से ही, शान्तिरक्षकों ने आम लोगों को हिंसा से बचाने और शान्ति क़ायम करने के लिये प्रयास जारी रखे, साथ ही, महामारी का मुक़ाबला करने के राष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग भी किया.

कोविड-19 के संक्रमण, रोकथाम, उपचार और आदर्श आदतों व व्यवहार के बारे में सटीक व समय पर जानकारी फैलाने में रेडियो एक महत्वपूर्ण चैनल साबित हुआ है, विशेष रूप से स्थानीय समुदायों में. ऐसे समय जब कोविड-19 के फैलाव के कारण बहुत से लोग दूरस्थ स्थानों से काम कर रहे थे, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में यून मिशन - MONUSCO के रेडियो मेज़बान कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता जोडी न्कासहामा, स्टूडियो में मौजूद रहकर, श्रोताओं को जागरूक बनाकर, संक्रमण फैलाव पर लगाम कसने में मदद कर रहे थे.

जोडी न्कासहामा कहते हैं, “हम क़रीब दो करोड़ 40 लाख श्रोताओं को महामारी के बारे में विश्वसनीय जानकारी मुहैया कराने में कुछ घबरा भी रहे थे, क्योंकि महामारी ने जीवन के नुक़सान के साथ-साथ बहुत सी अफ़वाहों को भी जन्म दे दिया था, जिनका राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव हुआ था.”

रेडियो ओपाकी ने, इस वायरस के बारे में जीवनरक्षक जानकारी मुहैया कराकर और ख़तरनाक झूठी जानकारी का मुक़ाबला करके, युवा छात्रों के लिये एक महत्वपूर्ण शैक्षिक भूमिक निभाई. वो भी ऐसे समय में जब लाखों छात्र, घरों पर रहने वाले आदेशों के कारण स्कूल जाने में अक्षम थे, रेडियो ओपाकी ने इस खाई को पाटने के लिये अपने क़दम आगे बढ़ाए.

रेडियो ओपाकी, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में यूएन मिशन चलाता है.

रेडियो ओपाकी के कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता जोडी न्कासहामा
MONUSCO
रेडियो ओपाकी के कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता जोडी न्कासहामा

3. स्थानीय आजीविकाओं को सहारा

शान्ति की स्थिरता के लिये, संघर्ष प्रभावित समुदायों को, आजीविकाओं के पुनर्निर्माण में सहयोग देना बहुत ज़रूरी है. यूएन शान्तिरक्षक व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण कार्यशालाएँ आयोजित करते हैं और उन्हें धन की मदद भी देते हैं, साथ ही स्थानीय समुदायों को अपने परिवारों के आय अर्जन में मदद करते हैं.

दक्षिण सूडान में, स्वस्थ मवेशियों का काफ़िला ना केवल सामाजिक हैसियत का प्रतीक है, मगर बहुत से परिवारों के लिये जीवन रेखा है, जिससे उन्हें अपने लिये भोजन का प्रबन्ध करने, आपनी पोषण ज़रूरतें पूरी करने और अपने बच्चों को शिक्षित करने में मदद मिलती है.

दक्षिण सूडान के मलाकल में, मवेशियों की स्वास्थ्य देखभाल के लिये हर सप्ताह क्लीनिक आयोजित करने की परम्परा है, जिसमें दक्षिण सूडान में यूएन शान्ति मिशन में तैनात भारतीय शान्तिरक्षकों का उल्लेखनीय योगदान है. भारतीय शान्तिरक्षक, वर्ष 2006 से लेकर 2015 तक और बीच में कुछ समय के व्यवधान के बाद, वर्ष 2018 में, मुफ़्त पशु चिकित्सा सेवाएँ देते रहे हैं, साथ ही स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण भी देते रहे हैं ताकि वो अपने मवेशियों का स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकें.

चूँकि मलाकल में कोई अन्य मवेशी स्वास्थ्य सेवाएँ नहीं हैं, तो अनमिस की पशु स्वास्थ्य सेवाओं की बदौलत बहुत सी ज़िन्दगियों और आजीविकाओं की सुरक्षा हुई.

लैफ़्टिनैण्ट कर्नल फ़िलिप वर्गीज़ कहते हैं, “लोगों की आजीविकाएँ बनाए रखने में मदद करने से, इस पूरे युवा देश में शान्तिनिर्माण प्रयासों में काफ़ी बड़ा योगदान मिलता है.”

4. शान्ति व सुरक्षा क़ायम रखने में राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण

शान्तिरक्षा मिशन सुरक्षा, क़ानून और व्यवस्था, और प्रभावशाली पुलिस व न्याय प्रणालियाँ क़ायम रखने में राष्ट्रीय क्षमताओं के निर्माण और बेहतरी में, मेज़बान सरकारों के साथ मिलकर काम करते हैं.

मध्य अफ़्रीका गणराज्य में यूएन मिशन – MINUSCA ने मार्च 2022 में, देश के पश्चिमोत्तर हिस्से में “Zia siriri ni Akomandé” नामक अभियान शुरू किया था जिसका मतलब होता है – शान्ति क़ायम रहने दें.

इस अभियान का मक़सद अवैध हथियारबन्द गुटों के प्रभाव और गश्त व हवाई निगरानी मिशनों की मौजूदगी बढ़ाकर विस्फोटक उपकरणों के प्रभाव को कम करना है.

शान्तिरक्षक, स्थानीय समुदायों और राष्ट्रीय सेना के साथ निकटता से काम करके, सुरक्षा स्थिति की जानकारी हासिल करने के लिये गश्त लगाते हैं और स्थानीय समुदायों की चिन्ताओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं. हाल के समय में गश्तों के दौरान, समुदायों ने चिकित्सा सामग्री के अभाव और स्कूली शिक्षा के अभाव को रेखांकित किया.

शान्तिरक्षकों ने, समाधान के रूप में दैनिक स्तर पर पीने का स्वच्छ पानी, स्कूली शिक्षा की सामग्री और खेलकूद सामग्री मुहैया कराई है. साथ ही मुफ़्त चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई है और लाभान्वितों में महिलाएँ व बच्चे भी हैं. लोगों का रहन-सहन बेहतर बनाने व सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिये, सड़कों की भी मरम्मत की गई है.

लैफ़्टिनैण्ट कर्नल अब्दुल अज़ीज़ कुएड्राओगो के अनुसार, “इस इलाक़े में पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान अप्रिय घटनाओं और हमलों की संख्या बहुत तेज़ी से कम हुई है जोकि इस बात का सबूत है कि हमारी इकाइयों की कार्रवाइयों का वास्तविकता में असर होता है.”

5. टिकाऊ विकास के निर्माण में महिलाओं व युवाओं को समर्थन देना

दक्षिण सूडान में, बहुत से परिवारों के लिये मवेशी जीवन रेखा हैं, जो उनके लिये भोजन की उपलब्धता, पोषण ज़रूरतें पूरी करने और उनके बच्चों की शिक्षा में मदद करते हैं.
UNMISS
दक्षिण सूडान में, बहुत से परिवारों के लिये मवेशी जीवन रेखा हैं, जो उनके लिये भोजन की उपलब्धता, पोषण ज़रूरतें पूरी करने और उनके बच्चों की शिक्षा में मदद करते हैं.

ऐसे समाधानों को आकार देने में महिलाओं और युवाओं का नेतृत्व अति महत्वपूर्ण है जो ज़िन्दगियों को प्रभावित करें और जिनसे शान्ति और विकास का मार्ग प्रशस्त हो. यूएन शान्तिरक्षा अभियान, महिलाओं व युवाओं की सार्थक भागीदारी के लिये समर्थन देते हैं ताकि उनकी प्राथमिकताओं का, सुरक्षा और राजनैतिक निर्णयों के लिये केन्द्रीय महत्व रहे.

दशकों के संघर्ष ने, साइप्रस में रहने वाले ग्रीक और टर्किश (Turkish) समुदायों को बाँटकर रखा हुआ है. वर्ष 2021 में, साइप्रस में यूएन मिशन की मदद से एक परियोजना शुरू की गई जिसे नैदरलैण्ड्स के दूतावास का भी समर्थन हासिल था. उस परियोजना में दोनों समुदायों की महिलाओ को, सदियों पुरानी एक परम्परा – ‘बुनाई’ के ज़रिये, एक साथ लाया गया.

‘क्लोथो महिला पहल’ नामक इस कार्यक्रम के तहत, बुनाई मशीनों पर ऐसी परियोजनाएँ सृजित की गईं जिनमें विभिन्न आयु वाली ग्रीक और टर्किश महिलाओं को, अपना बुनाई ज्ञान साझा करने का मौक़ा मिला.

साइप्रस में रहने वाली एक टर्किश महिला हाण्डे टोयकान कहती हैं, “शुरू में तो हम अजनबियों की तरह महसूस करते थे, मगर दो समुदायों के बीच इस सहयोग से, हमने समझा कि हम दरअसल एक जैसे ही हैं. एक दूसरे के साथ मिलते-जुलते रहने और एक दूसरे की ज़िन्दगी व आदतों के बारे में ज़्यादा जानने से, हम आहिस्ता-आहिस्ता शान्ति का रास्ता निकाल लेंगे.”

एक ग्रीक साइप्रस निवासी फ़्लोरा हड्जीजियोर्जीयू कहती हैं, “अभी तक तो टर्किश साइप्रस वासियों के साथ मेरा कोई सम्पर्क नहीं था. मैं किसी टर्किश साइप्रस वासी के साथ पहली बार, क्लोथो परियोजना के ज़रिये ही सम्पर्क में आई. 65 वर्ष की उम्र में.”

 

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