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सूनामी जागरूकता दिवस: आपदा जोखिम रोकथाम के लिये नवाचारी उपायों पर ज़ोर

इण्डोनेशिया में सुनामी लहरों से बर्बाद हुए एक घर के बाहर खड़ी एक लड़की.
© UNICEF/Arimacs Wilander
इण्डोनेशिया में सुनामी लहरों से बर्बाद हुए एक घर के बाहर खड़ी एक लड़की.

सूनामी जागरूकता दिवस: आपदा जोखिम रोकथाम के लिये नवाचारी उपायों पर ज़ोर

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार, 5 नवम्बर, ‘विश्व सूनामी जागरूकता दिवस’ पर घातक सूनामी लहरों के जोखिमों में कमी लाने के लिये नवाचारी समाधान अपनाए जाने पर बल दिया है.  

वर्ष 2030 तक, विश्व की क़रीब आधी आबादी के बाढ़, तूफ़ान और सूनामी के जोखिमों से प्रभावित तटीय इलाक़ों में रहने की सम्भावना है. 

इसके मद्देनज़र, इस वर्ष विश्व दिवस की थीम, आपदा जोखिम की रोकथाम के लिये विकासशील देशों के लिये अन्तरारष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना है.

यूएन महासचिव ने इस अवसर पर जारी अपने सन्देश में, सभी देशों, अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं और नागरिक समाज से सूनामी के घातक ख़तरे के प्रति समझ बढ़ाने और जोखिम घटाने के लिये, नवाचारी तौर-तरीक़े साझा करने का आग्रह किया है.  

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“हम अब तक दर्ज प्रगति को और ज़्यादा मज़बूत बना सकते हैं – विश्व भर में सूनामी का जोखिम झेल रहे समुदायों के साथ बेहतर सम्पर्क स्थापित करने से लेकर, टिकाऊ विकास के लिये महासागर विज्ञान के यूएन दशक में, सुनामी कार्यक्रम के समावेशन तक.”

महासचिव गुटेरेश ने आगाह किया कि सूनामी से व्यापक जोखिम अभी बरक़रार हैं.

उनके मुताबिक़ जलवायु आपात स्थिति के कारण समुद्री जलस्तर बढ़ने से, सूनामी की विनाशकारी क्षमता में और अधिक वृद्धि होगी. 

“हमें वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को, पूर्व-औद्योगिक काल के औसत से 1.5 डिग्री अधिक तक सीमित रखना होगा, और तटीय समुदायों की सहनक्षमता में निवेश बढ़ाना होगा.”

तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और सूनामी की दृष्टि से सम्वेदनशील क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियाँ बढ़ने से भी ज़्यादा संख्या में लोगों के लिये जोखिम पैदा हो रहा है. 

साझा प्रयास

यूएन प्रमुख के अनुसार, समुदायों व आमजन की रक्षा के लिये हरसम्भव प्रयासों के केन्द्र में, विज्ञान, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग, तैयारी और जल्द कार्रवाई को रखा जाना होगा.

“विकासशील देशों के लिये समर्थन बढ़ाना, जल्द पता लगाना और समय पूर्व चेतावनी जारी करना बेहद अहम है.”

“हमें बढ़ते जटिल वैश्विक संकटों को ध्यान में रखते हुए, बेहतर ढंग से तैयारी करने की आवश्यकता है.”

वर्ष 2021 में, ‘विश्व सूनामी जागरूकता दिवस’ के ज़रिये, "Sendai Seven Campaign, को बढ़ावा दिया जा रहा है. विशेष रूप से उन लक्ष्यों पर, जिनकी मदद से विकासशील देशों के लिये अन्तरराष्ट्रीय सहयोग मज़बूत किया जाता है.

महासचिव गुटेरेश ने सेण्डाई फ़्रेमवर्क में किये गए वादों को पूरा करने और सभी त्रासदियों के विरुद्ध सहनक्षमता निर्माण के लिये साथ मिलकर प्रयास करने पर ज़ोर दिया है. 

दुर्लभ, मगर घातक

सूनामी की घटनाएँ कभी-कभार ही होती हैं, मगर ये बेहद घातक साबित हो सकती हैं. 

पिछले 100 वर्षों में, ऐसी 58 घटनाओं में दो लाख 60 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई है – यानि प्रति त्रासदी क़रीब चार हज़ार 600 मौतें, जो किसी अन्य प्राकृतिक जोखिम से कहीं ज़्यादा है.  

सबसे अधिक संख्या में मौतें, हिन्द महासागर में दिसम्बर 2004 में आई सूनामी के दौरान हुई थीं, जब 14 देशों में सवा दो लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी.

सर्वाधिक प्रभावित देशों में भारत, इण्डोनेशिया, श्रीलंका और थाईलैण्ड थे. 

समाधान प्रयास

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने, इस त्रासदी के तीन सप्ताह बाद, जापान के कोबे शहर में एक साथ आकर, दस वर्षीय (ह्योगो फ़्रेमवर्क) ‘Hyogo Framework for Action’ पारित किया था, जोकि आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर पहला व्यापक वैश्विक समझौता है. 

इसके साथ ही, हिन्द महासागर में सूनामी की पूर्व चेतावनी व जोखिम को कम करने के लिये, हिन्द महासागार सूनामी चेतावनी और जोखिम न्यूनीकरण प्रणाली (Indian Ocean Tsunami Warning and Mitigation System), स्थापित की गई.

इसका उद्देश्य, भूकम्प विज्ञान (seismographic) और समुद्री स्तर पर निगरानी स्टेशनों की मदद से, राष्ट्रीय सूनामी सूचना केन्द्रों को सतर्कता सन्देश भेजना है.

वर्ष 2014 में ह्योगो फ़्रेमवर्क की अवधि समाप्त होने के बाद, दुनिया ने ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये सेण्डाई फ़्रेमवर्क (2015-2030)’ पारित किया, जिसमें सात स्पष्ट लक्ष्यों और चार प्राथमिकताओं का ख़ाका पेश किया गया है. 

इसके ज़रिये आपदा जोखिम की रोकथाम और ख़तरों को कम करने के लिये कार्रवाई को आकार देना है.