कोविड-19: सर्वाधिक ज़रूरत के समय में ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित

5 अक्टूबर 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 ने उन 73 प्रतिशत देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान पैदा कर दिया है जिनका सर्वे किया गया है. संगठन ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर कोविड-19 महामारी के विनाशकारी प्रभाव की ओर ध्यान दिलाते हुए इन सेवाओं के लिये जल्द से जल्द धन मुहैया कराने की तात्कालिकता पर भी ज़ोर दिया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सर्वे के नतीजे सोमवार को जारी करते हुए यह भी कहा कि महामारी ने बुनियादी सेवाओं के लिये धन की ज़रूरत और ज़्यादा बढ़ा दी है.

संगठन के महानिदेशक  टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, "कोविड-19 ने दुनिया भर में मानसिक सेवाओं में ऐसे समय में व्यवाधान पैदा कर दिया है, जब इन सेवाओं की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है."

उन्होंने विश्व नेताओं का आहवान करते हुए कहा कि "महामारी के दौरान और उसके बाद के समय में, जीवनरक्षक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में और ज़्यादा संसाधन निवेश करने के लिये निर्णायक व त्वरित कार्रवाई करनी होगी."

महानिदेशक ने कहा, "अच्छा मानसिक स्वास्थ्य लोगों के पूर्ण स्वास्थ्य व अच्छे रहन-सहन के लिये बहुत ज़रूरी है."

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शोक दशा, बिछड़ाव, आमदनी का ख़त्म होना और भय के कारण मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी परिस्थितियाँ पैदा हो रही हैं, और मौजूदा परिस्थितियाँ और ज़्यादा ख़राब हो रही हैं. बहुत से लोगों को शायद शराब और मादक पदार्थों के बढ़े सेवन का सामना करना पड़ रहा हो, और उनमें अनिद्रा व चिन्ता जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ भी शामिल हों.

WHO
2019 के विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर दुनिया भर में आत्महत्याओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है, साथ ही इस पर भी कि हम सब आत्महत्याओं को रोकने के लिए क्या कर सकते हैं.

कोविड-19 के कारण भी स्नायुतन्त्र और मानसिक जटिताएँ पैदा हो सकती हैं जिनमें उन्माद, आक्रामकता, और आघात शामिल हैं.

पहले से ही मानसिक, स्नायुविक और चिकित्सा पदार्थ सेवन की स्थितियों वाले लोगों में सार्स-कॉव-2 का संक्रमण होने की ज़्यादा सम्भावनाएँ हैं और उनमें गम्भीर परिणाम वाली परिस्थितियाँ पैदा होने की सम्भावना प्रबल हैं, जिनमें मौत होना भी शामिल है.

सर्वे के नतीजे

130 देशों में जून से अगस्त के दौरान किये गए सर्वे में, ये आकलन किया गया कि मानसिक, स्नायुविक और  चिकित्सा पदार्थ सेवन वाली सेवाएँ कोविड-19 के कारण किस तरह बदल गई हैं, किन सेवाओं में व्यवाधान पैदा हुआ है और देश इस  स्थिति का किस तरह सामना कर रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कराए गए सर्वे में दिखाया गया है कि ज़्यादातर देशों (70 प्रतिशत) ने आमने-सामने मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं में व्यवधान पैदा होने के कारण टैलीमेडिसिन और टैलीथैरेपी का सहारा लिया है, हालाँकि उन सेवाओं की उपलब्धता में भी काफ़ी असमानता है.

उच्च आय वाले 80 से ज़्यादा देशों में स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद खाई को पाटने के लिये ये उपाय अपनाए गए, जबकि ऐसे क़दम निम्न आय वाले 50 प्रतिशत से भी कम देशों में अपनाए गए.

सर्वे के ये नतीजे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर 10 अक्टूबर को आयोजित होने वाले एक व्यापक कार्यक्रम के मौक़े पर जारी किये गए हैं. ये एक वैश्विक ऑनलाइन कार्यक्रम होगा जिसमें कोविड-19 के मद्देनज़र मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में और ज़्यादा संसाधन निवेश करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा.

ज़रूरी सेवाओं के लिये संसाधन निवेश

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ बरक़रार रखने के बारे में जारी उसके दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए देशों से आग्रह किया कि वो महामारी से उबरने और पुनर्बहाली कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिये संसाधन आवण्टन को अभिन्न हिस्सा बनाएँ.

सर्वे के नतीजों के अनुसार 89 प्रतिशत देशों ने बताया कि उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता, कोविड-19 से उबरने के उनके राष्ट्रीय कार्यक्रमों का हिस्सा है. सर्वे किये गए देशों में से केवल 17 प्रतिशत देशों ने बताया कि उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिये अलग से पूर्ण संसाधन आवण्टित किये हैं.

WHO/P. Virot
दिल्ली में मानव व्यवहार और अलायड साइंसेज़ संस्थान में बैठे कुछ मरीज़. फ़ोटो: WHO/P. Virot

संगठन का कहना है, "इस परिदृश्य से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में और ज़्यादा धन निवेश की ज़रूरत स्पष्ट नज़रआती है." चूँकि कोविड-19 महामारी अभी जारी है,  राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर अभी और ज़्यादा माँगें बढ़ेंगी जिन्होंने अनेक वर्षों से वित्तीय संसाधनों के अभाव का सामना किया है.

महामारी शुरू होने से पहले, ज़्यादातर देश मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर अपने कुल राष्ट्रीय स्वास्थ्य बजट का केवल 2 प्रतिशत धन ख़र्च कर रहे थे, इस कम बजट में ये देश अपनी आबादी की ज़रूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिये और ज़्यादा संसाधन आवण्टन का आहवान किया है. इनमें अन्तरराष्ट्रीय साझीदारों से आहवान भी शामिल है क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय सहायता राशि में स्वास्थ्य के लिये आबण्टित धनराशि में केवल 1 प्रतिशत हिस्सा  मानसिक स्वास्थ्यों के लिये चिन्हित किया जाता है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड