यमन: युद्ध में तेज़ी को रोकना होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए

28 जनवरी 2020

यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद के एक आपात सत्र में कहा कि देश में सरकार समर्थक सेनाओं और विद्रोहियों समर्थित लड़ाकों के बीच हिंसा में हाल के समय में आई तेज़ी को रोकना होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए. दोनों पक्षों के बीच बीते कुछ सप्ताहों के दौरान कुछ शांति बनी हुई थी.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने यमन की ताज़ा स्थिति के बारे में सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के राजदूतों को गोपनीय सत्र में जानकारी दी. लेकिन उनके आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से प्रकाशित संदेश में उन्होंने यमन में सैन्य भड़काव में हाल के समय में आई तेज़ी को रोकने की अहमियत फिर दोहराई.

उन्होंने आगाह करते हुए ये भी कहा कि  हाल के दिनों में हिंसा में आई तेज़ी उस प्रगति को बेकार कर सकती है जो संबंधित पक्षों ने हिंसा में कमी लाने और आपसी विश्वास बढ़ाने के प्रयासों  में हासिल की है.

यमन में सरकार और हूथी विद्रोहियों के बीच युद्ध चल रहा है. यमन की मौजूदा सरकार को सऊदी अरब का और हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल बताया जाता है.

हूथी विद्रोहियों को पहले अंसार अल्लाह भी कहा जाता था. 

दोनों पक्षों की इस लड़ाई में हाल के समय में राजधानी समान के पूर्वोत्तर इलाक़े में हवाई हमलों में तेज़ी आई है. ख़बरों के अनुसार इस भीषण लड़ाई में अनेक लोग हताहत हुए हैं.

ख़बरों में कहा गया है कि सरकार के प्रभाव वाले इलाक़े में विद्रोहियों ने हमले किए हैं जिसमें मोर्टार हमला भी शामिल है जो तायज़ शहर के एक बाज़ार में गिरा. 

समाचारों के अनुसार ताज़ा लड़ाई ख़ासतौर से तीन इलाक़ों में भड़की है - नेहम जो राजधानी सना के निकट, उत्तर में पर्वतीय ज़िला जाऔफ़ और मारिब प्रांत में.

मारिब में मध्य जनवरी में सरकारी सेनाओं के एक ठिकाने पर हमला किया गया था जिसलमें 100 से भी ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने सोमवार को ब्रिटेन के एक अख़बार द गार्डियन को बताया था कि हाल की हिंसा जिस पक्ष की तरफ़ से भी भड़काई गई है, इससे ये स्पष्ट है कि आपसी विश्वास कम हुआ है और ज़मीनी इलाक़ों पर क़ब्ज़ा करने की होड़ में जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है.

बेहतर जीवन संभव है

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने ये भी कहा है कि यमन में लगभग पाँच वर्ष से जारी युद्ध के नतीजों पर से ध्यान नहीं हटना चाहिए जिसमें आम लोगों को भारी नुक़सान और तकलीफ़ें उठानी पड़ी हैं, "यमन के लोग लगातार जारी रहने वाली युद्ध स्थिति के बजाय एक बेहतर ज़िन्दगी के हक़दार हैं." 

खाड़ी क्षेत्र में 3 जनवरी 2020 को अमरीका द्वारा एक ड्रोन हमले में ईरान के एक शीर्ष सैन्य कमांडर को मार दिए जाने के बाद भड़के माहौल में  मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने  सुरक्षा परिषद को बताया था कि यमन पर उस संकट का ज़्यादा असर नहीं हुआ था. उसके कुछ ही दिन बाद यमन में हिंसा में तेज़ी आ गई थी. 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा, "सैन्य भड़काव की कोई प्रमुख घटना नहीं  हुई थी, बीता सप्ताह यमन में युद्ध शुरू होने के बाद से काफ़ी शांत रहा, उस दौरान सिर्फ़ एक हवाई हमला हुआ, बहुत सीमित सैन्य गतिविधियाँ हुईं और पड़ोसी देशों पर भी कोई ड्रोन या मिसाइल हमला नहीं हुआ."

बच्चों की रिहाई का स्वागत

इस बीच संयुक्त राष्ट्र बाल कोष - यूनीसेफ़ के यमन में प्रतिनिधि ने राजधानी सना में अंसार अल्लाह द्वारा 64 बच्चों की रिहाई का स्वागत किया है.

इन बच्चों को कथित रूप से सैन्य अभियानों के दौरान पकड़ लिया गया था.

यूनीसेफ़ ने उम्मीद जताई है कि इन बच्चों की रिहाई के इस क़दम से अंसार अल्लाह संगठन के लोगों के लिए यमन के युद्ध में बच्चों की भर्ती और उनका इस्तेमाल बंद करने के वास्ते बनाई गई कार्य योजना पर दस्तख़त करने का रास्ता भी निकलेगा.

 

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