यमन में राजनैतिक समाधान के लिए उम्मीदें नज़र आईं

22 नवंबर 2019

यमन में जारी संकट का राजनैतिक समाधान निकालने के लिए प्रयासों ने गति पकड़ी है और संघर्षरत पक्षों के बीच अनेक मुद्दों पर समझौते होने के आसार नज़र आ रहे हैं. यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद को ताज़ा हालात की जानकारी देते हुए ये बात कही है. 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा, "हमने विभिन्न पक्षों को एक साथ काम करते हुए देखा है." संबंधित पक्ष गवर्नरेट्स में स्थिति में सुधार लाने के साथ-साथ संघर्ष व आर्थिक संकट को दूर करने पर विचार कर रहे हैं. लगभग चार वर्षों से जारी गृह युद्ध ने देश को बुरी तरह प्रभावित किया है.

याद रहे कि यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों को परास्त करने के लिए सऊदी अरब यमन की सरकार को समर्थन दे रहा है. 

उन्होंने दलील दी कि "ये कोई छोटे मुद्दे नहीं हैं और इन पर किसी तरह का समझौता होना बहुत बड़ी उपलब्धि होगी."

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स का कहना था कि यमन को अब ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत होगी जो देश में शांति स्थापना कर सके, एक ऐसा नेतृत्व जो सभी को साथ लेकर चलने की कला में माहिर है जिसके लिए कुछ रियायतें भी देनी होंगी, ऐसा नेतृत्व जो पात्रता के बजाय दरियादिली और सहनशीलता को बढ़ावा दे. 

वर्ष 2011 में उस समय के नेतृत्व के ख़िलाफ़ हुई शुरुआती बग़ावत के बाद से ही संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने यमन में शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया के लिए देश के राजनैतिक नेताओं और सिविल सोसायटी के साथ संपर्क बनाए रखा है.

उत्साहित घटनाक्रम

यमन के लिए विशेष दूत का कहना था कि 5 नवंबर को यमन सरकार और दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद के बीच  हुए रियाद समझौते जैसे कुछ सकारात्मक घटनाक्रम हुए हैं जिनसे शांति प्रयासों में तेज़ी देखी गई है.

हिंसा में कमी आई है और 48 घंटे का ऐसा वक़्फ़ा देखा गया है जिसमें कोई हवाई हमले नहीं हुए. ये संघर्ष शुरू होने के बाद से ऐसा पहली बार देखने को मिला है. 

साथ ही, स्टॉकहोम समझौते पर अमल किया जा रहा है जिसके तहत हुदायदाह के बंदरगाह तक ईंधन पहुँचाने वाले जहाज़ पहुँच पा रहे हैं. इससे वहाँ भयावह मानवीय संकट टालने में मदद मिल रही है.

हालाँकि मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने हुदायदाह समझौते को समर्थन देने वाले संयुक्त राष्ट्र के मिशन के प्रतिनिधियों के आवाजाही पर बढ़ते प्रतिबंधों पर चिंता भी जताई. इन प्रतिबंधों की वजह से ना सिर्फ़ मिशन के रोज़मर्रा के अभियान चलाने में मुश्किलें नज़र आती हैं, बल्कि मिशन का प्रावधान ही जोखिम में पड़ता है.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स का कहना था, "मुझे उम्मीद है कि संबंधित प्रशासन यूएन मिशन के कर्मचारियों व प्रतिनिधियों की आवाजाही मुक्त बनाने के लिए हर संभव क़दम उठाएंगे ताकि उसका मैंडेट पूरा किया जा सका."

महिला नेत्रीगण

संयुक्त राष्ट्र दूत ने देश भर की दो दिन की यात्रा के दौरान 20 महिला नेत्रियों से मुलाक़ातों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन मुलाक़ातों के दौरान ऐसे मुद्दों पर बातचीत की गई किसी भी तरह का राजनैतिक समाधान निकालते समय महिलाओं की आवाज़ को भी वज़न मिले. 

इन मुलाक़ातों में ये भी उभरकर सामने आया कि यमन के महिला समूहों ने संघर्ष के समय में किस तरह से अपने-अपने इलाक़ों में हालात को बेहतर बनाने के असाधारण प्रयास किए हैं.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा, "हम जानते-समझते हैं कि शांति प्रक्रिया में महिलाओं और पुरुषों दोनों का नज़रिया और राय शामिल करना कितना महत्वपूर्ण है."

अपने भाषण के अंत में उन्होंने दोहराते हुए कहा कि यमन में उम्मीदों के संकेतों ने नतीजे दिखाने शुरू कर दिए हैं.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि यमन के नेताओं को अब ख़ुद से ही ये पूछना चाहिए कि देश में शांति का क्या रूप होना चाहिए.

इसके बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि यमन के युद्धरत पक्षों  को लड़ाई ख़त्म करने के लिए राजनैतिक व सुरक्षा प्रबंधों के बारे में सहमति बनानी होगी, समाज और अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना होगा, और जटिल राजनैतिक चुनौतियों का सामना यथार्थपूर्ण ढंग से करना होगा.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि "इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए काम अभी से शुरू करना होगा", और "मैं समझता हूँ कि वो इस काम के लिए तैयार हैं".

 

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