2020 में सहायता के ज़रूरतमंदों की होगी रिकॉर्ड संख्या

4 दिसम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 16 करोड़ 80 लाख लोगों को मदद की ज़रूरत होगी और ये लोग 50 से भी अधिक देशों में मौजूद होंगे. एजेंसी के प्रमुख मार्क लोकॉक ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मदद ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 29 अरब डॉलर की मानवीय सहायता रक़म जुटाने का आहवान किया है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यों की संयोजग एजेंसी (OCHA) के प्रमुख मार्क लोकॉक ने बुधवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि पिछले साल के दौरान जलवायु संबंधी हादसों  व आपदाओं, बड़े पैमाने पर संक्रामक बीमारियों के फैलने और लंबे समय तक चलने वाले लड़ाई-झगड़ों के कारण सहायता की ज़रूरत वाले लोगों की संख्या में लगभग दो करोड़ 20 लाख का इज़ाफ़ा हुआ है. 

मार्क लोकॉक ने बुधवार को वैश्विक मानवीय परिदृश्य जारी करते हुए ये बात कही. उनका कहना था, "वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 16 करोड़ 80 लाख लोगों को मानवीय सहायता व संरक्षा की ज़रूरत होगी. ये संख्या पृथ्वी पर रहने वाले हर 45 में से लगभग एक व्यक्ति के बराबर होगी. ये संख्या कई दशकों में सबसे बड़ी होगी."

उन्होंने कहा कि बहुत तकलीफ़ देने वाली बात ये है कि सशस्त्र टकरावों की वजह से भारी संख्या में बच्चे या तो मारे जा रहे हैं या भयावह तबाहियों का सामना कर रहे हैं. "वर्ष 2018 में 12 हज़ार से ज़्यादा बच्चे सशस्त्र टकरावों में हताहत हुए. साल 2019 तो उससे भी ज़्यादा भीषण रहा."

इनके अलावा महिलाएँ और लड़कियों के लिए तो और भी ज़्यादा भयावह यौन व लिंग आधारित हिंसा का ख़तरा रहा जो उससे पहले के समय से और ज़्यादा हो गया. टकरावों वाले इलाक़ों में रहने वाले हर पाँच में से कम से कम एक व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. 

यूएन की मानवीय सहायता एजेंसी के प्रमुख ने दानदाताओं का आहवान करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदेर संगठन लगभग 10 करोड़ 90 लाख ऐसे लोगों की मदद करने का इरादा रखते हैं जो बहुत ही नाज़ुक हालात का सामना कर रहे होंगे. इन साझेदार एजेंसियों में रैडक्रास और अन्य ग़ैर-सरकारी संगठन शामिल होंगे.

जलवायु परिवर्तन के अनपेक्षित ख़तरे

मार्क लोकॉक का कहना था कि इसमें कोई शक़ नहीं है कि पहले से भी ज़्यादा समुदाय टकरावों के कारण प्रभावित हुए हैं, उससे भी ज़्यादा लोग व समुदाय जलवायु संबंधी घटनाओं से प्रभावित हुए हैं और ये संख्या अनुमान से कहीं ज़्यादा थी. 

उन्होंने जल्दी-जल्दी होने वाले सूखा, बाढ़ और चक्रवाती तूफ़ानों के हालात का ज़िक्र करते हुए ज़ोर देकर कहा कि इन घटनाओं से ज़्यादातर ग़रीब और नाज़ुक हालात में जाने वाले लोगों को ही नुक़सान होता है.

"आमतौर पर लगभग 20 देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए बहुत ज़्यादा नाज़ुक स्थिति में हैं और उनमें से 13 देशों में अंतर एजेंसी अपील की गई है."

यमन फिर से सबसे भीषण

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ मानवीय सहायता अधिकारी ने कहा कि यमन में पाँच वर्षों से जारी युद्ध के कारण जो जान-माल की भारी तबाही हुई है उसकी वजह से साल 2020 में भी ये देश दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट का सामना करेगा.

"ज़रूरतमंद लोगों की संख्या लगभग 2019 के बराबर ही रहने का अनुमान है जोकि लगभग दो करोड़ 40 लाख रही, ये संख्या यमन की कुल आबादी का लगभग 80 फ़ीसदी हिस्सा है."

वैश्विक मानवीय सहायता परिदृश्य में यमन के लिए वर्ष 2020 के लिए लगभग तीन अरब 20 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने की अपील की गई है.

अन्य स्थानों पर भी चल रहे लंबे संघर्षों व युद्धों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भी भारी रक़म की ज़रूरत होगी.

अफ़ग़ानिस्तान में 94 लाख लोगों के लिए 73 करोड़ 20 लाख डॉलर, बुरूंडी में 17 लाख लोगों के लिए 10 करोड़ 40 लाख डॉलर, इराक़ में 41 लाख लोगों के लिए 52 करोड़ डॉलर, सीरिया में एक करोड़ 10 लाख लोगों के लिए तीन अरब 30 करोड़ डॉलर, और मध्य अफ्रीकी गणराज्य में 26 लाख लोगों के लिए 38 करोड़ 80 लाख डॉलर की रक़म की ज़रूरत होगी.

इनके अलावा कुछ अन्य देशों में भी प्रभावित लोगों के लिए भारी रक़म की ज़रूरत होगी.

यूनीसेफ़ अपील

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने भी अनेक देशों में लगभग 5 करोड़ 90 लाख बच्चों की मदद के लिए 4 अरब डॉलर की रक़म जुटाने की अपील की है.

बुधवार को जारी इस अपील में कहा गया है कि वर्ष 2020 में 64 देशों में लगभग 5 करोड़ 90 लाख बच्चों को जीवनदायी सहायता मुहैया कराने के लिए क़रीब चार अरब 20 करोड़ डॉलर की रक़म की ज़रूरत होगी.

दानदाताओं से ये बहुत बड़ी रक़म की अपील है जो वर्ष 2010 की तुलना में तीन गुना ज़्यादा हो गई है

टकरावों और अनेक तरह के संघर्षों का सामना कर रहे देशों की संख्या बहुत बढ़ गई ैहै और 1989 में जब से बाल अधिकारों पर संधि वजूद में आई है, इन देशों की संख्या रिकॉर्ड संख्या पर पहुँच गई है.

यूनीसेफ़ का कहना है कि बच्चों के सबसे आसान निशाना बन गए हैं जिसके परिणाम स्वरूप बच्चों की मौतें हो रही हैं, कुछ गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और बहुत से बच्चों के गहरे सदमों में जीवन जीना पड़ रहा है. 

मानवीय सहायता एजेंसियाँ भी बहुत से बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण, जल, स्वच्छता, शिक्षा और अन्य बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाती हैं.

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर का कहना था, "आज हम देख रहे हैं कि जब से हमने आँकड़े जुटाना शुरू किए हैं, तब से पूरी दुनिया में ऐसे बच्चों की संख्या उच्च स्तर पर पहुँच गई है जिन्हें आपदा सहायता की ज़रूरत है. हर 4 में से एक बच्चा ऐसे देश में रहता है जो टकराव या प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं."

""इस ऐतिहासिक संख्या में प्रभावित व बेघर होने के लिए मजबूर बच्चों को तुरंत सहायता व संरक्षा की ज़रूरत है. टकराव व संघर्ष बच्चों की इस हालत के लिए सबसे बड़ा कारण है. उसके बाद भुखमरी, संक्रामक बीमारियों और जलवायु परिवर्तन से संबंधित चरम मौसम घटनाओं की वजह से करोड़ों बच्चों को जीवदायी सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है."

 

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