ग्रेटा थनबर्ग का नाव काफ़िला न्यूयॉर्क पहुँचा, जलवायु मुद्दे को मिली नई ऊर्जा

29 अगस्त 2019

 एक पखवाड़े की समुद्री यात्रा के बाद किशोरी क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग का नाव काफ़िला बुधवार को न्यूयॉर्क शहर पहुँचा जिसने जलवायु मुद्दे में कुछ और जान फूँक दी. ग्रेटा थनबर्ग संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सितंबर में होने वाले दो जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए यहाँ पहुँची हैं.

ग्रेटा थनबर्ग ने जलवायु परिवर्तन के संकट के बारे में जागरूकता बढ़ाने के इरादे से दो सप्ताह के अपने इस सफ़र के लिए हवाई जहाज़ से यात्रा करने के बजाय ऐसा रास्ता चुना जिसमें कोई भी कार्बन उत्सर्जन शामिल नहीं था. स्वभाविक है कि हवाई जहाज़ में ईंधन इस्तेमाल होने से भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है जबकि ग्रेटा की नौका यात्रा में शून्य कार्बन उत्सर्जन था.

ग्रेटा ने चुनौतियों से भरी ये जल यात्रा अपने पिता, चालक दल के दो सदस्यों और एक कैमरा पर्सन के साथ पूरी की. 60 फुट लंबी जिस नाव - मलीज़िया 2 में उन्होंने ये यात्रा की, उसमें सोलर पैनल लगे थे और नीचे पानी के भीतर लगी टर्बाइन ने बिजली पैदा की. 

16 वर्षीय किशोरी के इस जलवायु जागरूकता मिशन के लिए सराहना और समर्थन दिखाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने भी ग्रेटा थनबर्ग के 17 नावों वाले काफ़िले का न्यूयॉर्क पहुँचने पर स्वागत किया.

ग्रेटा थनबर्ग विश्व को 2030 तक एक बेहतर जगह बनाने के मिशन को सहयोग दे रही हैं.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने 2015 में 2030 टिकाऊ विकास एजेंडा को स्वीकार किया था जिसमें 17 टिकाऊ विकास लक्ष्य भी शामिल हैं.

इनमें टिकाऊ विकास लक्ष्य 13 जलवायु परिवर्तन चुनौती के बारे में है. बाक़ी 16 लक्ष्य इस दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने के प्रयासों के बारे में हैं.

ग्रेटा थनबर्ग ने न्यूयॉर्क पहुँचने पर कहा, "संयुक्त राष्ट्र ने हर एक टिकाऊ विकास लक्ष्य को प्रदर्शित करने के लिए 17 नावें हमारे स्वागत के लिए भेजीं, शुक्रिया."

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता स्टीफ़ान दुजारिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से कहा, "हम सुश्री थनबर्ग का स्वागत करते हैं और एक लंबी और थकाऊ यात्रा के बाद उनके आरामदेह ठहरने की कामना करते हैं."

कायापलट करने वाली ऊर्जावान किशोरी

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना मोहम्मद का कहना है, "दुनिया भर में युवा लोग अपने नेताओं से जलवायु परिवर्तन के संकट पर तुरंत ठोस कार्रवाई करने की माँग कर रहे हैं."

"वो कायापलट कर देने वाला ऐसा बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं जो कार्बन उत्सर्जन तेज़ी से और बड़े पैमाने पर कम करने के लिए बहुत ज़रूरी है, इससे ही हमारे गृह - पृथ्वी की रक्षा की जा सकेगी और लोगों की भी."

उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने आगाह करते हुए कहा कि समय हाथ से फिसलता जा रहा है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सैकड़ों युवा कार्यकर्ताओं और उनके नेताओं की मेज़बानी करने में गौर्वान्वित महसूस करता है, इनमें ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल हैं.

"ये युवा लोग यूथ क्लाइमेट सम्मेलन और जलवायु कार्रवाई सम्मेलन में कारगर समाधान लाने की महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की पुकार सुनकर कार्रवाई कर रहे हैं."

आमिना मोहम्मद ने कहा, "हमारी निजी और सामूहिक रूप में की गई कार्रवाइयों और गतिविधियों से दुनिया में अहम बदलाव आएगा, ज़िंदगियाँ बचेंगी और सभी के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित होगा."

जलवायु सम्मेलन का लक्ष्य टिकाऊ विकास के लिए 2030 के एजेंडा और जलवायु संकट पर कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए सर्वोच्च स्तर पर राजनैतिक व आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को सक्रिय मंच मुहैया कराना है.  

एक किशोरी का क्लाइमेट एक्शन मिशन

दो सप्ताह की जल यात्रा के बाद ज़मीन पर क़दम रखते हुए ग्रेटा थनबर्ग ने प्रेस के साथ बातचीत में कहा, "मैं चाहूँगी कि मुझे ये सब ना करना पड़े और मैं स्कूल जाकर शिक्षा हासिल करना चाहती हूँ, लेकिन... मैं कुछ ख़ास करना चाहती हूँ."

जलवायु संकट पैदा करने के लिए पुरानी पीढ़ी की तरफ़ इशारा करते हुए ग्रेटा थनबर्ग का कहना था उन्हें हमसे ये नहीं कहना चाहिए कि हम एक सामान्य बच्चे की तरह अपनी ज़िंदगी जिएँ क्योंकि हम उनकी छोड़ी हुई समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं.

युवा पर्यावरण वादी कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने दुनिया भर में इस मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने अगस्त 2018 में जलवायु कार्रवाई मुद्दे पर अकेले ही अपने स्कूल में हड़ताल की थी. 

उस समय 15 वर्षीय ग्रेटा थनबर्ग ने स्वीडन की संसद के सामने भी अकेले ही प्रदर्शन किया था जिसमें उन्होंने जलवाउ संकट पर साहसिक कार्रवाई करने की माँग करने वाली तख़्ती पकड़ी थी.

जैसे-जैसे ग्रेटा थनबर्ग को जैसे-जैसे मीडिया का ध्यान मिला तो अन्य छात्रों ने भी उनका समर्थन करना शुरू कर दिया. उनसे प्रेरणा लेकर बहुत से छात्रों ने अपने-अपने स्थानों व समुदायों में इसी तरह के प्रदर्शन करने शुरू कर दिए.

 

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