यमन में छीना जा रहा है 'बच्चों के मुंह से निवाला'

17 जून 2019

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के प्रमुख डेविड बीज़ली ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि यमन में हुती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में भूखे बच्चों के मुंह से निवाला छीना जा रहा है. सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर समझौतों का सम्मान नहीं हुआ तो कुछ ही दिनों में भोजन सामग्री की सहायता को रोक दिया जाएगा.

सोमवार को विश्व खाद्य संगठन प्रमुख डेविड बीज़ली और मानवीय राहत प्रमुख मार्क लोकॉक ने सुरक्षा परिषद को यमन में मानवीय हालात पर जानकारी दी. वहीं यमन के लिए विशेष यूएन प्रतिनिधि मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने देश में चार साल से सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त सरकारी सुरक्षा बलों और हुती विद्रोहियों के बीच हो रही हिंसा को रोकने के लिए राजनीतिक प्रयासों के बारे में बताया.

“हम लोगों को ज़िंदा रखने का अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं लेकिन इस काम में हमें ज़बरदस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है.” यूएन एजेंसी प्रमुख ने बताया कि एजेंसी को 18 महीने पहले पहली बार पता चला था कि कुछ खाद्य सामग्री ग़लत हाथों में जा रही है.

यमन में एक करोड़ से ज़्यादा विश्व खाद्य संगठन से मिलने वाली सहायता पर निर्भर हैं. सुरक्षा परिषद सदस्य देशों को उन्होंने बताया कि वह “इस बात को निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि भोजन सामग्री उन तक पहुंच रही है जिन्हें उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.”

सना शहर में प्रशासन के साथ कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं लेकिन नए अवरोध भी खड़े हो गए हैं. “जिन समझौतों पर आपने हस्ताक्षर किए हैं उनका सम्मान कीजिए. अगर हमें भरोसा नहीं मिलता है तो चरणबद्ध ढंग से भोजन सहायता को रोक देंगे.” संभावना जताई गई है कि इस सप्ताह के आख़िर तक इसे रोका जा सकता है.

WFP/Annabel Symington
यमन में बड़ी संख्या में लोग यूएन एजेंसी से मदद पर निर्भर हैं.

 “मुझे स्पष्ट रूप से कहने दीजिए; इस वजह से बच्चों की मौत हो रही है.”

कुपोषण का शिकार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं की मदद के लिए यूएन एजेंसी पोषण संबंधी कार्यक्रमों का संचालन जारी रखेगी.

बताया गया है कि कुछ हुती नेता सही कदम उठाना चाहते हैं लेकिन जल्दी से मुनाफ़ा कमाने वाले लोग इस काम में रोड़ा बने हुए हैं.

“मैं आप सभी संबंधित पक्षों से विनती करता हूं कि आपसे जो हो सके करिए और हमें अपना काम करते रहने दीजिए...ज़िंदगी बचाने का काम.”

हिंसा का घातक चक्र

यमन में दो करोड़ 40 लाख लोगों को सहायता और संरक्षण की ज़रूरत है. 80 फ़ीसदी से ज़्यादा आबादी पीड़ा, युद्ध और बीमारी के घातक चक्रम में फंसी हुई है. आपात राहत मामलों के प्रमुख मार्क लोकॉक ने इसे दुनिया की सबसे ख़राब त्रासदी करार दिया है.

हाल ही में किए गए एक अध्ययन का कहन है कि अगर 2022 तक लड़ाई खिंचती है तो करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाने की आशंका है. इनमें तीन लाख मौतें भूख, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और संबंधित कारणों से होंगी.

ऐसा न होने देने के लिए एक व्यापक राहत अभियान की ज़रूरत पर बल दिया गया है. मानवीय राहत प्रमुख मार्क लोकॉक ने बताया कि “अगर लड़ाई नहीं रूकती है तो आज की ज़रूरतें आने वाले सालों में लोगों को ज़िंदा रखने के लिए ज़रूरतों का आंशिक हिस्सा होंगी.”

उन्होंने अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता शांति की ओर अर्थपूर्ण प्रगति को बताया है. और अगर बदलाव नहीं हुआ तो फिर और लड़ाई होगी जिससे बड़े पैमाने पर मौतें और नुकसान होगा, और भुखमरी और बीमारियां फैलेंगी.

यमन में यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि मार्टिन ग्रिफ़िथ्स का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि सुरक्षा परिषद के सहयोग से समझौते पर पहुंचा जा सकता है.

यमन में पिछले साल शांति प्रयासों को तब मज़बूती मिली जब दिसंबर में महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर हुदायदाह और उसके आसपास के इलाक़ों में संघर्षविराम के लिए सहमति बन गई. उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद लोगों के मारे जाने में 68 फ़ीसदी की गिरावट आई है. लेकिन फिर भी उन्होंने हिंसा के ख़तरे और उसका ख़ामियाज़ा आम लोगों द्वारा भुगते जाने की आशंका पर चिंता जताई है.

 

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