'तुवालु को बचा लिया तो समझिए दुनिया को बचा लिया'

30 मई 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए प्रयास न करने का विकल्प अब नहीं बचा है. एक अख़बार के लिए लिखे अपने लेख में उन्होंने व्यवसाय, बिजली उत्पादन, खाद्य उत्पादन और शहरों का निर्माण करने के तरीक़ों में त्वरित और गहरे बदलाव लाने की अपील भी की है. जलवायु परिवर्तन का संकट झेल रहे तुवालु जैसे लघु द्वीपीय देशों को बचाने को उन्होंने दुनिया बचाने से जोड़ा है.

उन्होंने लिखा है कि अगर दुनिया को जलवायु परिवर्तन के विरूद्ध लड़ाई जीतनी है तो “हमें कायापलट कर देने वाले कदम उठाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति को तलाशना होगा.”

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि “सितंबर में होने वाली यूएन शिखर वार्ता में हिस्सा लेने के लिए नेताओं को भाषण के साथ साथ समाधानों को भी साथ लाना होगा.”

इस शिखर वार्ता का लक्ष्य विश्व में राजनीतिक नेतृत्व को जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वाकांक्षा बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है ताकि पेरिस समझौते के अनुरूप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती, जलवायु अनुकूलन के प्रयास करने और वित्तीय संसाधनों को जुटा है.

पैसेफ़िक देशों की यात्रा का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार उन्होंने यह पुकार सुनी: तुवालु बचाइए, दुनिया बचाइए. समुद्री जलस्तर बढ़ने से निचले तटीय देश तुवालु के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है.

“जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को झेल रहे समुदायों के प्रति एकजुटता दिखाने और क्षेत्र में जलवायु कार्रवाई के तहत अमल में लाए जा रहे अभिनव तरीक़ों पर ध्यान आकृष्ट करने के इरादे से मैं वहां गया था.” पैसिफ़िक देशों में समुद्री जलस्तर में वृद्धि वैश्विक औसत की तुलना में चार गुना अधिक है जो अन्य कई द्वीपीय देशों के लिए बड़ा ख़तरा है.

“मूंगा चट्टानों को क्षति पहुंचने, जैवविविधता घटने और प्लास्टिक प्रदूषण फैलने से महासागरों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. चरम मौसम वाली घटनाएं बढ़ रही हैं जिससे लोगों की ज़िंदगियां और आजीविका के साधन ख़तरे में आ गए हैं.”

UN Photo/Mark Garten
तुवालु की यात्रा के दौरान उन्होंने तत्काल जलवायु कार्रवाई की अपील की है.

यूएन प्रमुख ने लिखा है कि लघुद्वीपीय देश तुवालु में जलवायु परिवर्तन के दिल तोड़ देने वाले दुष्प्रभावों को नज़दीक से देखा है. तुवालु में सबसे ऊंचा स्थान भी समुद्र के स्तर से सिर्फ़ पांच मीटर ऊपर है. उन्होंने उस परिवार की व्यथा को भी याद किया जिसे हमेशा समुद्र के बढ़ते जलस्तर से चिंता बनी रहती है.

दांव पर लगी है दुनिया

“किसी ग़लतफ़हमी में मत रहिए: यह सिर्फ़ तुवालू, छोटे द्वीपों या पैसिफ़िक के दांव पर लगने की बात नहीं है. यह पूरी पृथ्वी की बात है.”

इन देशों में जो हो रहा है यह इस बात का संकेत है कि बाक़ी दुनिया के साथ क्या हो सकता है. “विश्व भर में लोगों ने जलवायु इमरमेंजसी के प्रभावों को महसूस करना शुरू कर दिया है और स्थिति और बिगड़ेगी ही.”

महासचिव गुटेरेश ने युवाओं और बच्चों का ज़िक्र किया जो भविष्य के प्रति चिंतित हैं और उसे सुरक्षित बनाने की गुहार लगा रहे हैं.

Lauren Day/World Bank
किरीबाती के तरावा में तटरेखा पर समुद्री दीवार का निर्माण.

यूएन महासचिव के तौर पर मैं कई लड़ाईयां लड़ रहा हूं. लेकिन एक दादा के तौर पर जलवायु परिवर्तन के विरूद्ध लड़ाई मेरे जीवन की लड़ाई बन गई है.”

यूएन प्रमुख ने माना कि अभी दुनिया नहीं जीत रही है और स्थिति को बदलने के लिए कायापलट कर देने वाले कदम उठाए जाने की आवश्यकता है.

“पैसिफ़िक देशों के नैतिक बल को हमें मानना होगा, जलवायु इमरेंजसी के ख़िलाफ़ दौड़ में वही सबसे आगे हैं...और हमें टिकाऊ समाधानों को ढूंढना होगा, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करना होगा और सहनशीलता और अनुकूलन बढ़ाना होगा.”

जलवायु परिवर्तन के विरूद्ध कार्रवाई का खाका खींचते हुए उन्होंने सरकारों को यह संदेश दिया है: वेतन के बजाए कार्बन पर टैक्स लगाया जाए, जीवाश्म ईंधनों पर दी जाने वाली सब्सिडी को रोका जाए, और नए कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों को निर्माण न हो.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जलवायु संकट से निपटने के ज़रिए मौजूद हैं लेकिन तत्काल जलवायु कार्रवाई समय की मांग है. “तत्काल जलवायु कार्रवाई को हमें ज़रूर चुनना होगा. जैसे तुवालु के लोग भलीभांति जानते हैं: उन्हें बचाना हम सबको बचाना है.”

 

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