होलोकॉस्ट स्मरण दिवस पर सार्वभौमिक मूल्यों की रक्षा की पुकार

28 जनवरी 2019

'ख़तरनाक ढंग से उभरते' यहूदीवाद विरोध से उपजती चिंताओं के बीच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मरण दिवस पर कार्यक्रम आयोजित हुए जिनमें दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सामूहिक नरसंहार में मारे गए साठ लाख यहूदियों को सम्मान के साथ याद किया गया. उन अन्य पीड़ितों को भी जो 'अभूतपूर्व, सुनियोजित क्रूरता और भयावहता' का शिकार हुए.

यहूदियों के सामूहिक नरसंहार के पीड़ितों की स्मृति में अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस पर यूएन महासभा में अपने संदेश में महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि अमेरिका में एक सिनेगॉग (यहूदी उपासना स्थल) पर घातक हमले से लेकर यूरोप में यहूदियों की कब्रगाहों में तोड़ फोड़ हुई हैं. शताब्दियों से चली आ रही नफ़रत अब भी न सिर्फ़ बनी हुई है बल्कि स्थिति बदतर होती जा रही है. 

"हम नवनात्सी समूहों को फैलते हुए, इतिहास को फिर लिखे जाने और होलोकॉस्ट से जुड़े तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किए जाने की कोशिशें देखते हैं."

जैसे जैसे द्वितीय विश्व युद्ध की याद धुंधली पड़ती है और होलोकॉस्ट में बच गए यहूदियों की संख्या कम होती है, सतर्क बने रहने की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है. 

इस साल की थीम "होलोकॉस्ट का स्मरण: अपने मानवाधिकार मांगिए और उनकी रक्षा कीजिए" है. इसके तहत युवाओं को होलोकॉस्ट से सबक लेने और ज़रूरी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है. एक ऐसे समय में जब नवनात्सी और नफ़रत फैलाने वाले समूह उभार पर हैं, यह थीम मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और जातीय नरसंहार के अपराध की रोकथाम और सज़ा पर संधि को भी रेखांकित करती है.

गुटेरेश ने कहा, "हम देखते हैं कट्टरता बेहद तेज़ी से इंटरनेट पर फैल रही है और जैसा ब्रिटेन के प्रमुख यहूदी रब्बाई जोनाथन सैक्स ने यादगार शब्दों में कहा था: जो नफ़रत यहूदियों से शुरू होती है वह यहूदियों के साथ कभी ख़त्म नहीं होती.”

"आइए, सार्वभौमिक मूल्यों के लिए और सभी के लिए समान दुनिया बनाने की इस लड़ाई में हम पहले से कहीं अधिक एकजुटता कायम करें."

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशलेट ने अपने संदेश में ध्यान दिलाया कि नाज़ी यातना शिविरों में लाखों यहूदियों के साथ-साथ हज़ारों रोमा और सिन्टी समुदाय के लोग, विकलांग, समलैंगिक, युद्धबंदी, राजनीतिक कार्यकर्ता और विरोध आंदोलनों के नेता भी मारे गए.

"इन भयावह अपराधों के बाद मानवता फिर पहले जैसे नहीं हो सकती. नफ़रत को सामान्य बनाने की इस कोशिश के ख़िलाफ़ हम सबको खड़ा होना चाहिए. यहूदीवाद के विरोध में धीरे धीरे उफ़ान लेती लहरों को रोकने की आवश्यकता है ताकि लोगों को उनके मानवाधिकारों और अधिकारों से वंचित न किया जा सके."

पीड़ितों की स्मृति में कार्यक्रम

स्मरण दिवस पर यूएन महासभा हॉल में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें पीड़ितों ने अनुभवों को साझा किया और नरसंहार के शिकार लोगों की याद में प्रार्थना भी हुई. अमेरिका में होलोकॉस्ट की याद में बने संग्रहालय की निदेशक सारा ब्लूमफ़ील्ड ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और होलोकॉस्ट के प्रति जागरूकता फैलाने और उससे सबक सीखने की ज़रूरत पर अपने अनुभव साझा किए.

यूएन महासचिव ने "अमेरिका के इतिहास में हुए सबसे निर्मम यहूदीवाद विरोध हमले" का ज़िक्र करते हुए  कहा कि यहूदीवाद विरोध बढ़ रहा है और उसके ख़िलाफ़ हमें खड़ा होना पड़ेगा. पिट्सबर्ग में एक यहूदी उपासना स्थल पर एक बंदूकधारी ने हमला कर 11 लोगों को मार दिया था. 

"बहुपक्षीय कार्रवाई और सहयोग के ज़रिए ही हम सभी लोगों के लिए सुरक्षित और गरिमापूर्ण विश्व सुनिश्चित कर सकते हैं."

इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसमें उन राजनयिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया जिन्होंने नात्सी क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में काम करते हुए यहूदियों को पासपोर्ट, वीज़ा और यात्रा के लिए अन्य ज़रूरी कागज़ात दिए ताकि उनकी जान बच सके. 

यहूदी शरणार्थियों के नात्सी जर्मनी से बचकर भारत में शरण लेने पर एक कार्यक्रम का आयोजन भी हो रहा है. यूरोप से बचकर भारत पहुंचे यहूदियों के बारे में आमतौर पर चर्चा कम ही होती है.

 

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