भ्रष्टाचार विरोधी आयोग बंद करने के निर्णय को यूएन ने ख़ारिज किया

8 जनवरी 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ग्वाटेमाला सरकार के उस निर्णय को ज़ोरदार तरीक़े से अस्वीकार कर दिया है जिसमें दंड मुक्ति के ख़िलाफ बने अंतरराष्ट्रीय आयोग (CICIG) को एकतरफ़ा रूप से ख़त्म करने की घोषणा की गई थी. इस स्वतंत्र आयोग का गठन संयुक्त राष्ट्र और ग्वाटेमाला सरकार ने मिलकर किया था जिसका काम अवैध ढंग से बने सुरक्षा गुटों और उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार की जांच करना है.

इससे पहले सोमवार को ग्वाटेमाला की विदेश मंत्री सांद्रा योवेल ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय को सरकार के इस निर्णय की जानकारी देने वाला पत्र दिया.

ख़त में लिखा है कि ग्वाटेमाला सरकार ने आयोग को गठित करने वाले समझौते को 24 घंटों के भीतर समाप्त करने का फ़ैसला लिया है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि महासचिव गुटेरेश ने पत्र में लिखी गई बातों को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है.  उनका कहना है कि आयोग गठन के लिए हुए समझौते के तहत पिछले 16 महीनों में यूएन ग्वाटेमाला सरकार के साथ विभिन्न स्तरों पर रचनात्मक रूप से काम कर रहा है. 

आयोग का कार्यकाल 3 सितंबर 2019 को पूरा हो रहा है और संयुक्त राष्ट्र ने आशा व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार समझौते की सभी क़ानूनी बाध्यताओं का पालन करेगी और आयोग के कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.

सितंबर 2018 में आयोग के आयुक्त आइवन वेलासक्वेज़ को ग्वाटेमाला में प्रवेश देने से मना कर दिया गया था जिसके बाद महासचिव गुटेरेश ने समाधान निकलने तक उनसे ग्वाटेमाला के बाहर रह कर ही आयोग का काम काज देखने के लिए कहा था.

यूएन महासचिव ने दंड मुक्ति के ख़िलाफ़ लड़ाई में आयोग की अहम भूमिका की तरफ़ ध्यान दिलाया.

यह आयोग सरकार की पहल के बाद 2006 में गठित किया गया था और क़ानून के शासन को मज़बूती देने की दृष्टि से इसे एक नई पहल के रूप में देखा गया था.

ऐसी धारणा है कि आपराधिक गुटों ने सरकारी संस्थानों में अपनी पैंठ बना ली है और वे बिना क़ानून या सज़ा के डर के काम कर रहे हैं.

1990 के दशक में हुए गृह युद्ध से उबर रहे ग्वाटेमाला में लोकतांत्रिक विकास इससे ख़तरे में पड़ गया है.  

 

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