रोहिंज्या शरणार्थी संकट

म्याँमार में यंगून शहर का एक दृश्य.
Unsplash/Alexander Schimmeck

म्याँमार: नागरिकों की जबरन वापसी पर रोक की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने म्याँमार में मौजूदा हालात के मद्देनज़र, शरणार्थियों और प्रवासियों को जबरन वहाँ वापिस भेजे जाने पर स्वैच्छिक रोक लगाए जाने का आहवान किया है.

यौन हिंसा से बची रोहिंग्या शरणार्थी महिलाएं उन 800,000 से अधिक रोहिंग्याओं में सबसे अधिक हाशिए पर हैं, जिन्हें अगस्त के बाद से म्यांमार से बांग्लादेश भेज दिया गया था.
यूनिसेफ/ब्रायन सोकोली

रोहिंज्या संकट के पाँच साल: अन्तराष्ट्रीय समुदाय से पीड़ितों के लिये एकजुटता से काम जारी रखने की अपील

संघर्षों की स्थितियों में यौन हिंसा पर यूएन प्रमुख की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने रोहिंज्या संकट के पाँच वर्ष पूरे होने के अवसर पर अन्तराष्ट्रीय समुदाय से रोहिंज्या लोगों के साथ एकजुटता जारी रखने का आहवान किया है. उन्होंने साथ ही यौन हिंसा के पीड़ितों के लिये न्याय व जवाबदेही से सम्बन्धित प्रयासों का दायरा बढ़ाने का आग्रह भी किया है.

म्याँमार के लिये, यूएन प्रमुख की विशेष दूत नोएलीन हेयज़ेर, बांग्लादेश के एक शरणार्थी शिविर में, एक शिक्षा केन्द्र का दौरा करते हुए.
Office of the Special Envoy on Myanmar

'रोहिंज्या संकट को भुलाकर नहीं छोड़ा जा सकता'

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नोएलीन हेयज़ेर ने, रोहिंज्या लोगों के दर्दनाक पलायन के पाँच वर्ष होने के मौक़े पर उनकी तकलीफ़ों की तरफ़ ध्यान आकर्षित करने के लिये, बांग्लादेश की अपनी चार दिन की यात्रा के दौरान कहा है कि, “हम इसे एक भुला दिया गया संकट बनकर नहीं रहने दे सकते हैं.”

रोहिंज्या शरणार्थी बांग्लादेश के कॉक्सेज़ बाज़ार शरणार्थी शिविर की तरफ़ जाते हुए. (फ़ाइल फ़ोटो)
UNOCHA/David Dare Parker

यूएन मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट - बांग्लादेश की यात्रा पर

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय OHCHR ने शुक्रवार को बताया है कि मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट, सप्ताहान्त पर बांग्लादेश की यात्रा करेंगी.

मिनहर बेगम और शाह आलम पिछले दो वर्षों से कुटुपलोंग शिविर के एक शिक्षण केन्द्र में, शिक्षण सहायक के रूप में एक साथ काम कर रहे हैं.
यूएनएचसीआर

बांग्लादेश: शरणार्थियों की शिक्षा बाधाओं से निपटने के लिये, रोहिंज्या और बांग्लादेशी शिक्षक एकजुट

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - UNHCR के बांग्लादेश में एक कार्यक्रम के तहत, रोहिंज्या शरणार्थी बच्चों की औपचारिक शिक्षा तक पहुँच बनाने के लिये, रोहिंज़्या शिक्षकों को मेज़बान समुदाय के शिक्षकों के साथ जोड़ा जा रहा है. इससे दोनों समुदायों के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने में मदद मिल रही है और बच्चों के लिये औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के रास्ते खुल रहे हैं.

बांग्लादेश ने, म्याँमार में हिंसा और उत्पीड़न के पाँच अलग-अलग दौर के बाद वहाँ से भागे रोहिंज्या शरणार्थियों को अपने यहाँ शरण मुहैया कराई है.
© UNICEF/Siegfried Modola

'म्याँमार का बहुकोणीय संकट नाटकीय रूप में गहराया और फैला है'

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नोएलीन हेयज़र ने सोमवार को यूएन महासभा में बताया है कि देश में फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट के बाद शुरू हुए राजनैतिक संकट ने, ऐसे अनेक मोर्चे खोल दिये हैं जहाँ लम्बे समय से शान्ति क़ायम थी, और देश में चुनौतियाँ ज़्यादा गहरी होने के साथ-साथ, उनका दायरा भी नाटकीय तरीक़े से फैला है.

शरणार्थी मामलों के लिये यूएन उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी, बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार ज़िले में, कुटुपलोंग शिविर में, रोहिंज्या शरणार्थियों के साथ मुलाक़ात करते हुए..
© UNHCR/Kamrul Hasan

रोहिंज्या ज़िन्दगियों की सलामती की ख़ातिर, बांग्लादेश को अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों के उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी ने बांग्लादेश की अपनी पाँच दिन की यात्रा पूरी करने के बाद बुधवार को, रोहिंज्या शरणार्थियों और उनके मेज़बान समुदायों के लिये टिकाऊ और प्रत्याशित समर्थन की अपील की है.

समुद्री यात्रा मार्ग पर नाव में सवार लोगों को अक्सर लम्बे समय तक फँसा रहना पड़ता है और उन्हें जल व भोजन भी नहीं मिल पाता है. (फ़ाइल)
© UNHCR/Christophe Archambault

नाव हादसे में 17 रोहिंज्या लोगों की मौत की आशंका, यूएन ने जताया शोक

शरणार्थी मामलों के लिये संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने म्यांमार के तट के नज़दीक समुद्री क्षेत्र में, बच्चों समेत कम से कम 17 रोहिंज्या लोगों की मौत होने के समाचार पर स्तब्धता जताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है. 

 

माली के बामाको में महिलाएँ अपने बच्चों का टीकाकरण करा रही हैं.
World Bank

कोविड-19: एक लड़की की नज़र में भविष्य

दुनिया भर की लड़कियाँ एक ऐसे भविष्य की कल्पना करती हैं जो समावेशी और निष्पक्ष हो. माली में 15 साल की मकदीदिया कहती हैं, "मैं सभी बच्चों के अभिभावकों से कहना चाहता हूँ कि वो यह समझें कि हम कुछ कहना चाहते हैं, और हमारे विचार मायने रखते हैं, क्योंकि हम दुनिया का भविष्य हैं." 

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में, कैमरे में समेटे हैं... (वीडियो सौजन्य: यूनीसेफ़)