‘पाकिस्तान में जलवायु तबाही कल्पना से परे’, महासभा में सहायता प्रयासों के लिये पुकार

पाकिस्तान के नौशेरा ज़िले के एक गाँव में कुछ अफ़ग़ान शरणार्थी बच्चे खेल रहे हैं.
© UNHCR/Qaiser Khan Afridi
पाकिस्तान के नौशेरा ज़िले के एक गाँव में कुछ अफ़ग़ान शरणार्थी बच्चे खेल रहे हैं.

‘पाकिस्तान में जलवायु तबाही कल्पना से परे’, महासभा में सहायता प्रयासों के लिये पुकार

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सचेत किया है कि पाकिस्तान की जनता, जलवायु अन्याय के एक गम्भीर समीकरण की पीड़ित है, और मानव-जनित जलवायु परिवर्तन की एक विशाल क़ीमत चुका रही है. पाकिस्तान में विनाशकारी बाढ़ से हुई बर्बादी और मानवीय सहायता उपायों पर, शुक्रवार को यूएन महासभा की एक बैठक आयोजित की गई.

 

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान, वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की की केवल एक प्रतिशत से भी कम मात्रा के लिये ज़िम्मेदार है, मगर देश "मानव जनित जलवायु परिवर्तन के लिये विशाल क़ीमत चुका रहा है".

यूएन प्रमुख ने यूएन महासभा में आयोजित संकल्प सम्मेलन के दौरान, पुनर्वास व पुनर्निर्माण प्रयासों के लिये दानदाता देशों, अन्तरराष्ट्रीय संगठनों, निजी क्षेत्र व नागरिक समाज से योगदान का आहवान किया है.

यूएन प्रमुख ने सितम्बर महीने में पाकिस्तान यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जलवायु संहार के जिस स्तर का अनुभव किया, वो कल्पना से परे था.

देश में आई भीषण बाढ़ के कारण जितना इलाक़ा जलमग्न है, वो यूएन प्रमुख के देश पुर्तगाल के आकार से तीन गुना है.

बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में घर, मवेशी, फ़सलें और स्थानीय समुदायों के भविष्य पर असर पड़ा है.   

हालात बिगड़ने की आशंका

बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में बाढ़ का पानी घटना शुरू हो गया है, मगर दक्षिण मे स्थित अनेक इलाक़े अब भी डूबे हुए हैं, और इसलिये शीत ऋतु से पहले, हालात बद से बदतर होने का जोखिम है.

यूएन प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा के कगार पर है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने देश में हैज़ा, मलेरिया और डेंगू के प्रकोप की आशंका जताई है, जिससे बाढ़ की तुलना में कहीं अधिक लोगों की जान जा सकती है.

पाकिस्तान में डेढ़ हज़ार स्वास्थ्य केन्द्र तबाह हो गए हैं, 20 लाख घर क्षतिग्रस्त या ध्वस्त हो गए हैं, और 20 लाख लोग अपनी सम्पत्तियों के बिना जीवन गुज़ार रहे हैं.

“सर्दियों के मौसम से पहले अनेक लोगों के पास शरण नहीं है.”

सिलसिलेवार आपदाएं

बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में विशाल स्तर पर फ़सलें व मवेशियों की बर्बादी से खाद्य संकट जैसे हालात पनप रहे हैं और रोपाई पर असर पड़ने की भी आशंका है.

यूएन प्रमुख ने कहा, “गम्भीर भूख स्थिति बढ़ रही है. गर्भवती व स्तनपान करा रही महिलाओं और बच्चों में कुपोषण उभार पर है. स्कूल से बाहर बच्चों की संख्या बढ़ रही है.”

पाकिस्तान में बाढ़ के पानी से गुज़रती एक युवती.
UNICEF/Asad Zaidi
पाकिस्तान में बाढ़ के पानी से गुज़रती एक युवती.

उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट से महिलाएँ व लड़कियाँ सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं और डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों पर निर्धनता का शिकार होने का जोखिम है.

महासचिव ने आगाह किया कि इस बाढ़ का असर आने वाले दिनों या महीनों तक नहीं, बल्कि वर्षों तक महसूस किया जाता रहेगा.

विशाल समर्थन की दरकार

यूएन प्रमुख ने पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर पुनर्वास व पुनर्निर्माण प्रयासों के लिये एक संकल्प सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने दानदाता देशों, अन्तरराष्ट्रीय संगठनों, निजी सैक्टर व नागरिक समाज से सहायता प्रयासों को मज़बूत करने की पुकार लगाई.

संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान बाढ़ राहत योजना के ज़रिये 81 करोड़ 60 लाख डॉलर की सहायता अपील जारी की है, जोकि शुरुआती अपील से क़रीब 65 करोड़ डॉलर अधिक है.

इस धनराशि के ज़रिये, अगले वर्ष मई महीने तक तात्कालिक ज़रूरतों से निपटे जाने का लक्ष्य रखा गया है.

जी20 की ‘नैतिक ज़िम्मेदारी’

यूएन प्रमुख ने, मिस्र में नवम्बर में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप27) के मद्देनज़र ध्यान दिलाया कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के मामले में दुनिया पीछे क़दम बढ़ा रही है, जबकि जलवायु आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं.

महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि कॉप27 को एक ऐसा आयोजन बनाना होगा, जहाँ इन रुझानों की दिशा को पलटा जा सके, जलवायु हानि व क्षति के विषय में गम्भीर क़दम उठाया जाए और अनुकूलन व सहनक्षमता निर्माण के लिये वित्त पोषण का प्रबन्ध किया जाए.

यूएन प्रमुख के अनुसार जी20 समूह के अग्रणी औद्योगिक देश जलवायु को हानि पहुँचाने वाले 80 प्रतिशत उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार हैं.

पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में बाढ़ प्रभावित इलाक़े का एक दृश्य.
© UNICEF/Asad Zaidi
पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में बाढ़ प्रभावित इलाक़े का एक दृश्य.

इसलिये, उनकी ये नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वे इस संकट से उबरने, अनूकूलन प्रयासों और आपदा सहनक्षमता निर्माण में पाकिस्तान को मदद प्रदान करें.   

उन्होंने चिन्ता जताई कि फ़िलहाल पाकिस्तान इस संकट से प्रभावित है, मगर कल कोई अन्य देश या समुदाय भी इसकी ज़द में आ सकता है.

एकजुटता की परीक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष कसाबा कोरोसी ने कहा कि ये सदस्य देशों के समक्ष एकुजटता की परीक्षा की घड़ी है कि वे पाकिस्तान की व्यथा पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं.  

उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक विकराल त्रासदी है, जिससे निपटने के लिये तत्काल उपायों की आवश्यकता होगी, ताकि स्थाई आपात स्थिति को टाला जा सके.

यूएन महासभा प्रमुख ने सूखा पड़ने और मूसलाधार बारिश से बेहतर तैयारी किये जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि अन्तरराष्ट्रीय राहत प्रयासों को कायापलट कर देने वाले साधनों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा.  

उन्होंने आग्रह किया कि संकट प्रबन्धन क्षमताओं को मज़बूत करने के लिये विज्ञान व एकजुटता का उपयोग करना होगा.

सहायता की अपील

इस बीच, शरणार्थी मामलों के लिये संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित साढ़े छह लाख से अधिक शरणार्थियों व उनके मेज़बान समुदाय के सदस्यों की सहायता के लिये अपील की है.

यूएन एजेंसी के प्रवक्ता मैथ्यू साल्टमार्श ने जिनीवा में शुक्रवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि जलवायु आपदा से निपटना, पाकिस्तान के लिये एक विशाल चुनौती है.

जलमग्न सड़क को पार करने की कोशिश कर रहे कुछ लोग.
© UNICEF/Loulou d'Aki
जलमग्न सड़क को पार करने की कोशिश कर रहे कुछ लोग.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और स्थानीय जनता ने पिछले चार दशकों से अफ़ग़ान शरणार्थियों की उदारता से मेज़बानी की है और अब उन्हें सहायता की दरकार है.

भीषण बारिश व बाढ़ से अब तक एक हज़ार 700 लोगों की मौत हो चुकी है, 12 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं, जिनमें चार हज़ार से अधिक बच्चे हैं. 79 लाख लोग विस्थापन का शिकार हुए हैं और क़रीब छह लाख लोग, राहत केन्द्रों पर रह रहे हैं.

यूएन शरणार्थी एजेंसी ने शुरुआती पुनर्बहाली प्रक्रिया में तात्कालिक ज़रूरतों व सहायता को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त धनराशि मुहैया कराए जाने का आग्रह किया है.