स्वास्थ्य मामलों पर राजनैतिक रस्साकशी से बचने का आग्रह

5 जनवरी 2021

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि कोविड-19 से ज़िंदगियों व आजीविकाओं की रक्षा और महामारी का अन्त करने के दौरान यह ध्यान रखा जाना होगा कि वैश्विक समुदाय के समक्ष अन्य बीमारियों की चुनौतियाँ भी हैं. उन्होंने वैश्विक एकजुटता की अपील करते हुए आगाह किया है कि स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीति से बचा जाना होगा. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने नये वर्ष में अपनी पहली प्रैस वार्ता को सम्बोधित करते हुए बताया कि जीवन को ख़तरे में डालने वाली अन्य बीमारियों पर जानकारी को एकत्र किया जाना और विश्लेषण करना निरन्तर जारी है. 

लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद कोविड-19 अब भी एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है. 

महानिदेशक घेबरेयेसस ने भरोसा दिलाया कि विज्ञान को तेज़ी से आगे बढ़ाने, ज़मीनी स्तर पर समाधानों को प्रदान करने और वैश्विक एकजुटता के निर्माण के लिये स्वास्थ्य संगठन दिन रात प्रयासों में जुटा है.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कामकाज आपात स्वास्थ्य हालात से निपटने के अलावा जन्म से वृद्धावास्था तक मानव स्वास्थ्य के सभी पहलुओं को बेहतर बनाना है. 

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि उनका संगठन माताओं व शिशुओं के जीवन की रक्षा करने, मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल करने और एचआईवी संक्रमण सहित अन्य बीमारियों से निपटने के लिये प्रयासरत है.

“हमने पिछले वर्ष बहुत कुछ सीखा है, यह भी कि पूर्ण विकास में स्वास्थ्य एक निवेश है, फलती-फूलती अर्थव्यवस्थाओं के लिये यह बेहद अहम है और राष्ट्रीय सुरक्षा का यह एक अहम स्तम्भ है.” 

वर्ष 2021 की शुरुआती दिनों में वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ताज़ा आँकड़ों को परखने और बेहतर पुनर्बहाली व मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों के लिये समाधानों को पेश करने में जुटे हैं. 

“मेरी एक उम्मीद यह है कि आगामी वर्ष में स्वास्थ्य के सम्बन्ध में राजनीति कम होगी.”

उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक समुदाय ने वैक्सीन को विकसित करने के लिये एक नया मानक स्थापित किया है. अब अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को उसे सुलभ बनाने के लिये एक नया मानक बनाना होगा.

“अल्प-अवधि में मुनाफ़े से पहले लोगों का ध्यान रखा जाना होगा. यह देशो के स्वहित में है कि वैक्सीन राष्ट्रवाद से बचा जाये.” 

पिछले सप्ताह यूएन एजेंसी ने Pfizer-BioNTech वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की अनुमति दे दी थी और सोमवार को ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित एस्ट्रा-जेनेका वैक्सीन दिये जाने की भी शुरुआत हो गई. 

 

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