कोविड-19: महामारी का अन्त अभी दूर, मगर आशावान होने की वजह भी

बांग्लादेश के कॉक्सेज़ बाज़ार में, स्वास्थ्यकर्मी रोहिंज्या शरणार्थियों को समुचित सहायता मुहैया कराने के लिये दिन-रात सक्रिय हैं.
IOM/Nate Webb
बांग्लादेश के कॉक्सेज़ बाज़ार में, स्वास्थ्यकर्मी रोहिंज्या शरणार्थियों को समुचित सहायता मुहैया कराने के लिये दिन-रात सक्रिय हैं.

कोविड-19: महामारी का अन्त अभी दूर, मगर आशावान होने की वजह भी

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि अनेक देशों में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में तेज़ बढ़ोत्तरी दर्शाती है कि दुनिया अभी, महामारी पर पूर्ण रूप से क़ाबू पाने से दूर है. मगर उन्होंने स्पष्ट किया है कि न्यायसंगत टीकाकरण और साबित हो चुके सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के ज़रिये, कोरोनावायरस को नियन्त्रण में किया जा सकता है, जैसाकि बहुत से देशों ने करके दिखाया है.  

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि जनवरी और फ़रवरी में दुनिया में लगातार छह हफ़्तों तक संक्रमण के मामलों में गिरावट दर्ज की गई थी. 

“अब हमने लगातार सात हफ़्तों से संक्रमण मामले बढ़ते देखे हैं, और चार हफ़्तों से मौतों में भी वृद्धि हुई है.”

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एशिया और मध्य पूर्व के अनेक देशों में कोविड-19 संक्रमणों में भारी बढ़ोत्तरी देखी गई है.

कोविड-19 के संक्रमण के अब तक 13 करोड़ 56 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 29 लाख 30 हज़ार लोगों की मौत हुई है. 

महानिदेशक घेबरेयेसस के मुताबिक विश्व भर में कोरोनावायरस वैक्सीन की 78 करोड़ ख़ुराकें दिये जाने के बाद भी ये हालात बने हुए हैं. 

उन्होंने कहा, “समझने में ग़लती ना करें, वैक्सीन एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली औज़ार हैं. लेकिन वे एकमात्र औज़ार नहीं हैं.”

“शारीरिक दूरी कारगर है. मास्क कारगर है. हाथों की स्वच्छता कारगर है. हवादार कमरे कारगर हैं.”

उन्होंने बताया कि निगरानी, टैस्टिंग, संक्रमितों के सम्पर्क में आए लोगों का पता लगाना व उन्हें अलग रखना, संक्रमितों को उपचार मुहैया कराना - इन सभी उपायों से संक्रमण को रोकने व लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने में मदद मिलती है.

लेकिन भ्रम, इत्मीनान से बैठने और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में विसंगति से, संक्रमण फैलने की रफ़्तार बढ़ रही है जिससे मौतें हो रही हैं.  

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख ने सचेत किया कि वैश्विक महामारी अभी अपने अन्त से बहुत दूर है, लेकिन आशावान होने के भी कारण हैं.  

उन्होंने कोरोनावायरस पर पूर्ण रूप से क़ाबू पाने के लिये सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के साथ-साथ, न्यायसंगत टीकाकरण की अहमियत को रेखांकित किया है, जिससे कुछ ही महीनों के भीतर महामारी को नियन्त्रण में किया जा सकता है. 

असरदार रणनीति की दरकार

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि हालात पर क़ाबू पाने के लिये सुसंगत, समन्वित व व्यापक तौर पर प्रयास किये जाने होंगे. 

“दुनिया भर में, बहुत से देशों ने दिखाया है कि साबित हो चुके सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों और त्वरित व सुसंगत ढंग से संचालित मज़बूत प्रणालियों के ज़रिये वायरस पर क़ाबू पाया जा सकता है.”

इसके परिणामस्वरूप अनेक देशों में कोविड-19 पर नियन्त्रण पाना सम्भव हुआ है, और वहाँ लोग अब खेलकूद आयोजनों, संगीत समारोह, रेस्तराँ का आनन्द उठा सकते हैं और अपने परिवारों व मित्रों से भी मिल सकते हैं.

WHO अन्तहीन तालाबन्दियाँ नहीं चाहता है. जिन देशों ने सर्वोत्तम क़दम उठाए हैं, उन्होंने ज़रूरत के मुताबिक़, नपी-तुली, स्फूर्तिवान और तथ्य आधारित उपायों का मिश्रण लागू किया है.”

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि बहुत से देशों में गहन चिकित्सा कक्षों (आईसीयू) में संक्रमितों की भारी भीड़ है और लोगों की मौतें हो रही है, जिन्हें रोका जा सकता है.

संक्रमणों के बावजूद, प्रभावित देशों में रेस्तराँ और रात्रि क्लबों में भीड़ है, बाज़ार खुले हैं और बेहद कम संख्या में ही लोग ऐहतियात बरत रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि इस भ्रम को तोड़ा जाना होगा कि अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों को कोविड-19 संक्रमित होने से ज़्यादा असर नहीं होगा. 

“यह बीमारी फ़्लू नहीं है. युवा, स्वस्थ लोगों की मौत हुई है. और हम पूरी तरह से इस संक्रमण के उन लोगों पर हुए प्रभाव नहीं जानते हैं, जो इससे उबर पाए हैं.”

महानिदेशक घेबरेयेसस ने आगाह किया कि जिन संक्रमितों में मामूली लक्षण दिखाई दिये हैं, उनमें भी थकान, कमज़ोरी, कपकपी, नीन्द ना आना, मानसिक अवसाद, बेचैनी, जोड़ों में दर्द और छाती में जकड़न जैसे लक्षण, बीमारी से उबरने के बाद भी लम्बे समय तक रहे हैं. 

इस अवस्था को 'लाँग कोविड' कहा गया है.