बुर्किना फ़ासो में विस्थापितों के क़ाफ़िले पर वीभत्स जानलेवा हमले की तीखी भर्त्सना

8 अक्टूबर 2020

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने बुर्किना फ़ासो में देश के भीतर ही विस्थापित लोगों के एक काफ़िले पर हुए हमले की तीखी भर्त्सना की है. 4 अक्टूबर की रात को हुए इस हमले में 25 लोगों की मौत हो गई.

इस हमले में मारे गए सभी 25 लोग पुरुष थे और उस काफ़िले में 46 लोग शामिल थे.

ये लोग पिस्सीला क़स्बे से अपने घरों को वहाँ हालात बेहतर होने की उम्मीद के साथ वापिस लौट रहे थे.

एक 26वाँ व्यक्ति इस हमले में गम्भीर रूप से घायल भी हुआ है जिसे हमलावरों ने मृतक जानकर छोड़ दिया था.

शरणार्थी एजेंसी ने बुधवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि हमलावरों ने इन लोगों को क़ाफ़िले से अलग करके उनकी हत्या की. महिलाओं और बच्चों को बाद में रिहा कर दिया गया था, और सशस्त्र गुट घटनास्थल से फ़रार हो गया.

बुर्किना फ़ासों में यूएन शरणार्थी एजेंसी की प्रतिनिधि लोली किमयासी ने कहा कि इस क्रूर और भयावह कृत्य की ख़बर सुनकर सनसनी फैल गई.

उन्होंने कहा “निर्दोष लोग सुरक्षा की तलाश में भटक रहे हैं, इसके बदले उन्हें अपनी जान गँवानी पड़ रही है, और ऐसा बार-बार हो रहा है.”

ये हमला बुर्किना फ़ासो के सनमाटेन्गा प्रान्त के एक गाँव क्विन्टोकूल्गा में हुआ जोकि केन्द्रीय-उत्तरी इलाक़े में स्थित है.

जीवित बचे परिजन पिस्सीला गाँव पहुँचने में कामयाब रहे जोकि घटनास्थल से लगभग 9 किलोमीटर दूर है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की साझीदार एजेंसी आईसीएएचडी प्रभावित लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता मुहैया करा रही है.

हिंसा में उछाल

बुर्किना फ़ासों में हाल के समय में हिंसा में तेज़ी दर्ज की गई जिसमें इस वर्ष सैकड़ों लोगों की जान चली गई है और हज़ारों विस्थापित हो गए हैं.

यूएन शरणार्थी एजेंसी के अनुसार चारों तरफ़ भूमि से घिरे हुए इस पश्चिमी अफ्रीकी देश में आन्तरिक रूप से विस्थापित लोगों और सुरक्षा स्थिति के कारण दुनिया में ये तेज़ी से बढ़ते संकट का रूप लेता जा रहा है.

लगभग 10 लाख लोग देश के भीतर ही विस्थापित हुए हैं जोकि कुल आबादी का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा है, इनमें से बहुत से लोगों को तो कई बार विस्थापित होना पड़ा है.

बुर्किना फ़ासो में संघर्ष के कारण खाद्य असुरक्षा भी पैदा हो गई है जिससे लगभग 30 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.

इनमें पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 5 लाख 35 हज़ार बच्चे भी हैं जो अत्यन्त गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं.

 

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