दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा पर यूएन मानवाधिकार प्रमुख की चिंता

27 फ़रवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के बाद उपजे हालात और राजधानी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुई मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भी हिंसा में लोगों के मारे जाने पर गहरा दुख जताते हुए अधिकतम संयम बरते जाने और हिंसा से दूर रहने की अपील की है. 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने गुरुवार को जिनीवा में मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र को पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की स्थिति और अपने कार्यालय के कामकाज से अवगत कराया.  

भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून के बाद हालात की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि “सभी समुदायों के भारतीयों ने बड़ी संख्या में आमतौर पर शांतिपूर्ण ढंग से क़ानून के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया है और देश में धर्मनिरपेक्षता की लंबी परंपरा को अपना समर्थन दिया है.” 

“मैं कुछ गुटों द्वारा मुसलमानों के ख़िलाफ़ हमले करने के मामलों में पुलिस की निष्क्रियता और शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की रिपोर्टों से चिंतित हूँ.” 

“अब इसने व्यापक रूप से अंतर-सामुदायिक हमलों का रूप ले लिया है और रविवार, 23 फ़रवरी, से अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है. मैं सभी राजनैतिक नेताओं से हिंसा की रोकथाम की अपील करती हूं.”

गुरुवार को यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि महासचिव स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और नई दिल्ली में हाल के दिनों में लोगों की मौतों की रिपोर्ट से दुखी हैं. उन्होंने संयम बरतने और हिंसा से परहेज़ करने की अपील की है. 

यूएन प्रवक्ता ने कहा कि महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के लिए महात्मा गांधी प्रेरणा का स्रोत हैं और मौजूदा समय में महात्मा गांधी की मूल भावना की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है ताकि सामुदायिक मेलमिलाप के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण हो सके.

कश्मीर में हालात

भारत सरकार द्वारा कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को अगस्त 2019 में निष्प्रभावी किए जाने के फ़ैसले के बाद पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने मानवाधिकार परिषद को जम्मू और कश्मीर में ताज़ा हालात से अवगत कराया.

यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में कुछ राजनैतिक नेताओं को रिहा किया गया है और हालात कुछ मायनों में सामान्य हो रहे हैं. लेकिन लगभग 800 लोगों को अब भी हिरासत में रखा गया है जिनमें कई राजनैतिक नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं. 

“भारी संख्या में सैन्य बलों की मौजूदगी से स्कूलों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है और अत्यधिक बल प्रयोग व सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकारों के गंभीर हनन के आरोपों की जांच के लिए कोई क़दम नहीं उठाया गया है.” 

यूएन की वरिष्ठ मानवाधिकार अधिकारी के मुताबिक भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फ़ैसले के बाद राज्य में आंशिक रूप से मोबाइल और इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दी हैं. लेकिन सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगाई गई पाबंदियाँ अब भी जारी हैं. 

 

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