कोरोनावायरस को नज़रअंदाज़ करने की 'घातक भूल ना करे कोई देश'

27 फ़रवरी 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सभी देशों से कोरोनावायरस (COVID-19) के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए जल्द से जल्द प्रयासों का दायरा बढ़ाने का आग्रह किया है. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा है कि किसी भी देश को यह नहीं मानना चाहिए कि वो इससे प्रभावित नहीं होगा. ऐसा सोचना एक घातक ग़लती होगी.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की यह अपील एक ऐसे समय में आई है जब कई नए देशों ने कोरोनावायरस संक्रमण के मामलों की पहली बार पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि हालात से तेज़ी और प्रभावी ढंग से निपटने की ज़िम्मेदारी सभी सरकारों की है.

“हर देश को अपने पहले मामले के लिए तैयार रहना होगा, एक स्थान पर केंद्रित मामलों के लिए, सामुदायिक स्तर पर संक्रमण फैलने के सबूत के लिए और सामुदायिक संचारण के सतत रूप से फैलने के लिए.”

“ये चार परिदृश्य हैं, और इन सभी परिदृश्यों की तैयारी एक साथ एक ही समय पर करनी होगी. किसी भी देश यह नहीं मानना चाहिए कि वहां मामले सामने नहीं आएंगे; वह एक घातक ग़लती हो सकती है…यह वायरस सीमाओं का सम्मान नहीं करता है.”

यूएन एजेंसी प्रमुख ने गुरुवार को जिनीवा में COVID-19 पर ताज़ा आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि चीन में 78 हज़ार 630 मामलों की पुष्टि हुई है और दो हज़ार 747 लोगों की मौत हुई है.  

चीन से बाहर 44 अन्य देशो में अब तक तीन हज़ार 474 मामलों का पता चला है और 54 लोगों की मौत हुई है. उन्होंने सचेत किया है कि पिछले दो दिनों में दुनिया के अन्य देशों में नए मामलों की संख्या चीन के नए मामलों से ज़्यादा हो गई है.

इस बीच योरोप और अन्य स्थानों पर एशियाई समुदाय के प्रति डर और नापंसदगी की बढ़ती भावना पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने गहरी चिंता जता है. मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने गुरुवार को जिनीवा में मानवाधिकार परिषद के सत्र में कहा कि इस महामारी ने चीन और पूर्वी एशिया के लोगों के प्रति परेशान कर देने वाले पूर्वाग्रहों की लहर को जन्म दिया है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इस महामारी को “हमारे समाजों की सहन-क्षमता का परीक्षण” क़रार दिया है और कहा है कि मानवाधिकार मानदण्डों को ध्यान में रखकर कार्रवाई करने से उसे ज़्यादा असरदार बनाया जा सकता है.

उन्होंने सभी सदस्य देशों से भेदभाव के सभी रूपों का सख़्ती से मुक़ाबला करने की पुरज़ोर अपील की है.

नए मामले

पिछले 24 घंटों में ब्राज़ील, जॉर्जिया, ग्रीस, उत्तर मैसेडोनिया, नॉर्वे, पाकिस्तान और रोमानिया में पहली बार नए मामलों का पता चला है.

“अगर आप अभी आक्रामकता के साथ कार्रवाई करते हैं तो आप इस वायरस को फैलने से रोक सकते हैं.” उन्होंने बताया कि 90 फ़ीसदी मामलों में यह एक बुखार है और 70 प्रतिशत मामलों में खांसी है.

“आप लोगों को बीमार पड़ने से रोक सकते हैं. आप जिंदगियों को बचा सकते हैं. इसलिए, इन देशों को मेरी सलाह जल्द से जल्द क़दम उठाने की है.”

वायरस को रोक पाना संभव

यूएन एजेंसी प्रमुख ने बताया कि ईरान, इटली, कोरिया गणराज्य में तेज़ी से नए संक्रमणों का पता चलना दर्शाता है कि वायरस क्या कर पाने में सक्षम है, लेकिन इस पर क़ाबू पाना भी संभव है.

उन्होंने चीन के ग्वान्गदोन्ग प्रांत से ऑंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वहां तीन लाख 20 हज़ार नमूने एकत्र किए गए थे जिनमें महज़ 0.14 प्रतिशत ही COVID-19 के लिए पॉज़िटिव पाए गए हैं.

“हमारे पास जो तथ्य हैं वे दर्शाते हैं कि वायरस का व्यापक स्तर पर सामुदायिक संचारण नहीं हुआ है. यह सुझाता है कि इस पर क़ाबू पाना संभव है.”

स्वास्थ्य संगठन ने ऐसे कई देशों का ज़िक्र किया जहां पिछले दो हफ़्तों से नए मामलों का पता नहीं चला है – इनमें बेल्जियम, भारत, कंबोडिया, नेपाल, फ़िलिपींस, रूस, श्रीलंका और वियतनाम शामिल हैं. लेकिन उन्होंने आगाह किया है कि फ़िनलैंड और स्वीडन में बुधवार को नए संक्रमणों का पता चला है जबकि पिछले दो हफ़्ते से वहां कोई नया मामला सामने नहीं आया था.

“बात सिर्फ़ अपने देश में आ रहे मामलों को रोकने तक की नहीं है. बात यह है कि आप तब क्या करते हैं जब आपके यहां मामले हैं.”

“कुछ ऐसी बातें हैं जो हर देश और व्यक्ति कर सकता है. हर देश को मामलों का जल्द पता लगाने, मरीज़ों को अलग रखने, उनके संपर्क में आए लोगों को ढूंढने, गुणवत्तापरक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने, अस्पताल में संक्रमण फैलने से रोकने और समुदाय में इसकी रोकथाम के लिए तैयार रहने की ज़रूरत है.”

स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति गहरा सम्मान

यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने मानवाधिकार परिषद में अपने वक्तव्य में अग्रिम मोर्चों पर जुटे स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलों व उनके सामने पेश जोखिमों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक ख़तरे पर क़ाबू पाने में लगे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए उनके मन में गहरा सम्मान है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त के मुताबिक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनज़र किए जा रहे प्रयासों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं बरता जाना चाहिए. पारदर्शिता व सूचना की सुलभता पर ज़ोर होना चाहिए ताकि स्वास्थ्य संरक्षा में लोगों की भी भागीदारी हो सके.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मरीज़ों या एहतियात के तौर पर लोगों को एकांतवास में रखे जाने की मियाद जोखिम के हिसाब से ही तय होनी चाहिए और उनके भोजन व स्वच्छ पानी तक पहुंच, मानवीय रूप से बर्ताव किए जाने और स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच के अधिकारों सहित अन्य मानवाधिकारों का पूर्ण रूप से ख़याल रखा जाना चाहिए.

 

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