अफ़ग़ानिस्तान: हिंसा की आग में झुलसते आम नागरिक

अफ़ग़ानिस्तान के सरीपुल प्रांत में विस्थापित महिलाएं और बच्चे.
UNAMA/Eric Kanalstein
अफ़ग़ानिस्तान के सरीपुल प्रांत में विस्थापित महिलाएं और बच्चे.

अफ़ग़ानिस्तान: हिंसा की आग में झुलसते आम नागरिक

शांति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2019 लगातार छठा ऐसा साल साबित हुआ है जब हताहतों की संख्या दस हज़ार का ऑंकड़ा पार कर गई. यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने हिंसा में शामिल सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन करते हुए आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरज़ोर अपील की है.

नई रिपोर्ट के मुताबिक तीन हज़ार 403 आम नागरिकों की मौत हुई है और छह हज़ार 989 लोग घायल हुए हैं. 

यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की 2009 से उन वार्षिक रिपोर्टों की कड़ी का हिस्सा है जिसमें अफ़ग़ान संघर्ष से आम नागरिकों की ज़िंदगी पर असर की पड़ताल की जाती है. यूएन के मुताबिक एक दशक से ज़्यादा समय में हताहत आम नागरिकों की संख्या एक लाख का ऑंकड़ा पार कर गई है. 

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) के प्रमुख और यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि तादामिची यामामोतो ने बताया कि, “अफ़ग़ानिस्तान में लगभग ऐसा कोई भी नागरिक नहीं है जो वहां जारी हिंसा से निजी तौर पर प्रभावित ना हुआ है.”

“यह सभी पक्षों के लिए अनिवार्य है कि लड़ाई रोकने के लिए लम्हे का इस्तेमाल किया जाए क्योंकि शांति का लंबे समय से इंतज़ार है. आम नागरिकों के जीवन की सुरक्षा की जानी होगी और शांति के लिए प्रयास चल रहे हैं.”

यह लगातार छठा साल है जब हताहत आम नागरिकों की संख्या 10 हज़ार का ऑंकड़ा पार कर गई है. अधिकांश हताहतों के लिए सरकार-विरोधी तत्वों को ज़िम्मेदार बताया गया है.   

अफ़ग़ानिस्तान में पिछले दस वर्षों में हताहत लोगों का ऑंकड़ा.
UNAMA
अफ़ग़ानिस्तान में पिछले दस वर्षों में हताहत लोगों का ऑंकड़ा.

इस रिपोर्ट को यूएन मिशन और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने साझा रूप से जारी किया है. पिछले वर्ष की तुलना में इस साल हताहतों की संख्या में पॉंच फ़ीसदी की कमी आई है जिसके लिए मुख्य रूप से ख़ोरासन प्रांत में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (दाएश) के हमलों में कमी को बताया गया है. 

लेकिन अन्य पक्षों की गतिविधियों के कारण हताहतों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है जिनमें तालिबान (21 फ़ीसदी वृद्धि) और अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल (18 फ़ीसदी वृद्धि) प्रमुख हैं. अधिकांश मामलों में आम नागरिक आईईडी धमाकों और हवाई बमबारी में हताहत हुए हैं. 

वर्ष 2019 में हताहतों की संख्या के साथ-साथ रिपोर्ट में कई सिफ़ारिशों को पेश करते हुए विभिन्न पक्षों को ध्यान दिलाया गया है कि जानबूझकर आम नागरिकों या स्थलों को निशाना बनाया जाना अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का गंभीर उल्लंघन है. 

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने अपने बयान मे कहा है कि हिंसक संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को आम नागरिकों की सुरक्षा को हर हाल में ध्यान में रखना होगा.

“युद्धरत पक्षों को ज़रूरी क़दम उठाने होंगे ताकि महिलाएं, पुरुष, लड़के व लड़कियां, बमों, गोलों, रॉकेटों और आईईडी सुरंगों का निशाना ना बनें. इसके परे कुछ होना अस्वीकार्य है.”

रिपोर्ट में सभी पक्षों से पुकार लगाई गई है कि मानवाधिकार व मानवीय क़ानूनों के हनन के आरोपों की तत्काल पारदर्शी व प्रभावी ढंग से जॉंच कर जवाबदेही तय की जानी होगी.